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किसानों के खाते में पैसा डालने को तैयार सरकार, किसान भाजपा की घेरेबंदी को

कृषि सुधारों को आगे बढ़ाते हुए केंद्र सरकार ने पंजाब-हरियाणा सरकारों से कहा है कि किसानों को फसल खरीद का पैसा सीधे खाते में भेजें। देखने में आकर्षक इस पहल का निहितार्थ क्या है।

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MonikaBy Monika

Published on 19 Feb 2021 5:37 PM GMT

किसानों के खाते में पैसा डालने को तैयार सरकार, किसान भाजपा की घेरेबंदी को
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केंद्र किसानों के खाते में पैसा डालने को तैयार, किसान भाजपा की घेरेबंदी को
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रामकृष्ण वाजपेयी

कृषि सुधारों को आगे बढ़ाते हुए केंद्र सरकार ने पंजाब-हरियाणा सरकारों से कहा है कि किसानों को फसल खरीद का पैसा सीधे खाते में भेजें। देखने में आकर्षक इस पहल का निहितार्थ क्या है। केंद्र सरकार पंजाब और हरियाणा में किसानों को फसल खरीद का पैसा सीधे खाते में क्यों दिलवाना चाहती है ये एक बड़ा सवाल है। क्योंकि ये पहल दोनो राज्यों के आंदोलन कर रहे किसानों की मांगों से मेल नहीं खाती है। क्या किसानों का विरोध दरकिनार कर सरकार अपने एजेंडे पर एक कदम आगे बढ़ गई है।

सीधे किसान के खाते में पैसे का भुगतान

इसके लिए हमें सरकार के इस फैसले को समझना होगा। अभी तक की व्यवस्था के मुताबिक मंडी व्यवस्था में आढ़ती उपज खरीद कर किसान को एमएसपी का भुगतान करता है। लेकिन अब सरकार मंडी और आढ़ती को दरकिनार कर सीधे किसान के खाते में पैसे का भुगतान कर रही है। सरकार का कहना है कि ई मोड से भुगतान करने पर व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और इससे सबका लाभ होगा।

किसान आंदोलन

पीएम किसान योजना का क्रियान्वयन

मंडी और आढ़तियों का क्या होगा। इस पर सरकार का कहना है कि यह मौजूदा मंडी व्यवस्था के स्थान पर नहीं की जा रही है और मंडी व्यवस्था पहले की तरह चालू रहेगी। चूंकि सरकार किसानों को जाम (जनधन, आधार और मोबाइल) की ट्रिनिटी से सीधा लाभ देने के लिए प्रतिबद्ध है। इसलिए इस तरह से पीएम किसान योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है कि किसानों को सीधे उनके खाते में पैसा मिल जाए। लेकिन इसमें एक दिक्कत है कि किसान खेत बटाई पर लेकर खेती करते हैं उनका हित कैसे सुरक्षित होगा इसका इसमें कोई उल्लेख नहीं है। सरकार कह रही है कि मंडी व्यवस्था भी जारी रहेगी लेकिन कब तक यह स्पष्ट नहीं है।

नरेश टिकैत

भाजपा नेताओं को शादियों में इनवाइट नहीं करें

ऐसा लगता है कि किसान आंदोलनकारी भी इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। भाजपा की जनसंपर्क रणनीति की हवा निकालते हुए इस पर पहरा बैठा दिया है। हालत यह है कि पुलिस सपोर्ट लिये बगैर भाजपा नेता क्षेत्र में जनसंपर्क के लिए निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। उधर भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष नरेश टिकैत ने गत दिनों सिसौली में हुई महापंचायत में पहले ही यह कह दिया है कि भाजपा नेताओं को शादियों और दूसरे कार्यक्रमों में इनवाइट नहीं करें। अगर कोई ऐसा करता है तो उसे अगले दिन भारतीय किसान यूनियन के 100 कार्यकर्ताओं को खाना खिलाना पड़ेगा। इसे चाहें तो आदेश समझ लें या सलाह।

नरेश टिकैत ने तो यहां तक कह दिया कि भाजपा नेता अगर जनसंपर्क पर निकलते हैं और बेइज्जत होते हैं तो हमें दोष न दें। बेहतर है अपने घर में ही बैठें।

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किसान 70 सालों से नुकसान झेल रहे

उधर भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने भी शुक्रवार को कह दिया है कि किसान 70 सालों से नुकसान झेल रहे हैं। वे एक और फसल के नुकसान के लिए तैयार हैं। अगर उन्हें फसल काटने के लिए ज्यादा वर्कर की मदद की जरूरत पड़ी तो भी तैयार हैं। वे फसल को घरों पर रख लेंगे लेकिन, आंदोलन को कमजोर नहीं होने देंगे। इन हालात में केंद्र सरकार का किसानों के खाते में पैसा डालने का फैसला क्या रंग लाएगा ये वक्त बताएगा।

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