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गुजरात दंगों पर बड़ा फैसला: सुप्रीम कोर्ट ने 17 दोषियों को दी जमानत

भारत में साल 2002 में हुए गुजरात दंगों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान 17 दोषियों को सशर्त जमानत दे दी हैं।

Shivani Awasthi

Shivani AwasthiBy Shivani Awasthi

Published on 28 Jan 2020 8:14 AM GMT

गुजरात दंगों पर बड़ा फैसला: सुप्रीम कोर्ट ने 17 दोषियों को दी जमानत
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दिल्ली: भारत में साल 2002 में हुए गुजरात दंगों को सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान बड़ा फैसला लिया है। कोर्ट ने गंगे में शामिल 17 दोषियों को सशर्त जमानत दे दी। इस फैसले के साथ ही कोर्ट ने दोषियों को कहा कि वे जमानत पर रहने के दौरान सामाजिक और धार्मिक काम करेंगे।

गुजरात दंगों के दोषियों को सशर्त जमानत:

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को गुजरात दंगों से जुड़े एक मामले की सुनवाई की। इस दौरान साल 2002 में गुजरात में हुए सरदारपूरा हिंसा के 17 दोषियों को कोर्ट ने जमानत दे दी। कोर्ट ने दोषियों को जमानत देने के साथ ही ये शर्त भी रखी कि जमानत के दौरान सभी दोषी सामाजिक और धार्मिक काम करें। ये निर्देश मुख्य न्यायाधीश शरद अरविंद बोबडे, न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने दिए।

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इंदौर और जबलपुर में करेंगे सामाजिक और धार्मिक काम:

बता दें कि जमानत पर छूटे कुछ दोषी अब जबलपुर और इंदौर में रह कर सामजिक और धार्मिक काम करेंगे। दरअसल, कोर्ट ने इन दोषियों को दो समूहों में बाँट दिया गया है। इनके तहत एक बैच को इंदौर और एक बैच को जबलपुर भेजा गया है। वहीं कोर्ट ने इंदौर पर जबलपुर के जिला विधि अधिकारियो को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि दोषियों के कामों पर निगरानी रखी जाए।

अधिकारी रखेंगे दोषियों पर निगरानी:

वहीं कोर्ट ने अफसरों से उन्हें आजीविका के लिए काम करने के लिए भी कहा है। कोर्ट ने राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण को अनुपालन रिपोर्ट दायर करने के लिए कहा है। इसके साथ ही अधिकारियों से सुप्रीम कोर्ट ने जमानत के दौरान दोषियों के आचरण पर भी रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है।

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2002 में गुजरात दंगों में मारे गये थे 59 कार सेवक:

गौरतलब है कि साल 2002 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के दौरान राज्य में अलग-अलग जगह पर कई दंगे हुए थे, इन दंगों की जांच के लिए आयोग गठित किया था।

यह दंगे गोधरा रेलवे स्टेशन के समीप साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन की दो बोगियों में आग लगाए जाने के बाद भड़के थे जिसमें 59 ‘कारसेवक’ मारे गए थे।

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