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भारत ने ड्रैगन को फिर दिया बड़ा झटका, चीनी कंपनियों से छीने कई बड़े प्रोजेक्ट

चीन के साथ सैन्य विवाद के बाद भारत के कड़े रुख के कारण चीनी कंपनियों को लगातार झटके लग रहे हैं। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने बड़ा कदम उठाते हुए...

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NewstrackBy Newstrack

Published on 18 July 2020 3:57 AM GMT

भारत ने ड्रैगन को फिर दिया बड़ा झटका, चीनी कंपनियों से छीने कई बड़े प्रोजेक्ट
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अंशुमान तिवारी

नई दिल्ली: चीन के साथ सैन्य विवाद के बाद भारत के कड़े रुख के कारण चीनी कंपनियों को लगातार झटके लग रहे हैं। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने बड़ा कदम उठाते हुए दिल्ली -मुंबई कॉरिडोर परियोजना में दो चीनी कंपनियों का ठेका रद्द कर दिया है। दूसरी ओर रेलवे ने बड़ा कदम उठाते हुए कानपुर से मुगलसराय के बीच सिगनल व दूरसंचार के काम के लिए चीनी कंपनी के साथ 471 करोड़ रुपए के करार को खत्म कर दिया है।

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दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर परियोजना का काम छीना

पूर्वी लद्दाखी की गलवान घाटी में भारत और चीन के बीच सैन्य विवाद पैदा होने के बाद मोदी सरकार ने चीन के खिलाफ सख्त रुख अपना लिया है। 59 चीनी एप्स पर पाबंदी लगाने के साथ ही विभिन्न परियोजनाओं से चीनी कंपनियों को बेदखल करने का सिलसिला जारी है। इसी कड़ी में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार की महत्वाकांक्षी ग्रीन फील्ड दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर परियोजना में दो चीनी कंपनियों का करार रद्द कर दिया गया है। मंत्रालय ने ठेका हासिल कर चुकीं चीनी की दो कंपनियों के ठेके को रद्द करते हुए काम करने से मना कर दिया है।

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गडकरी ने पहले ही कर दिया था एलान

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने पहले ही साफ कर दिया था कि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना में चीनी कंपनियों को अब नहीं घुसने दिया जाएगा। उनका कहना था कि प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष दोनों तरीकों से चीनी कंपनियों को काम की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि किसी चीनी कंपनी को ठेका मिल गया है तो उसका ठेका रद्द करके फिर टेंडर जारी किए जाएंगे या करार में शामिल दूसरे नंबर की कंपनी को ठेका दे दिया जाएगा।

पावर टिलर के आयात पर भी प्रतिबंध

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय से पहले विदेश व्यापार महानिदेशालय ने भी कृषि क्षेत्र में प्रयोग होने वाले पावर टिलर के आयात पर रोक लगा दी है। चीन से आयात होने वाले पावर टिलर भारत के मुकाबले काफी सस्ते होते हैं और इस कारण टिलर बाजार में चीन की हिस्सेदारी करीब 35 फ़ीसदी तक है। सरकार के इस फैसले से चीन को बड़ा झटका लगा है। देश में काफी संख्या में किसान पावर टिलर का उपयोग करते हैं और देश में सालाना 35 से 40 हजार पावर टिलर की खरीद होती है।

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रेलवे ने रद्द किया चीनी कंपनी का करार

उधर रेलवे ने बड़ा कदम उठाते चीनी कंपनी बीजिंग नेशनल रेलवे रिसर्च एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट और सिग्नल एंड कम्युनिकेशन से किए गए 471 करोड़ रुपए के करार को रद्द कर दिया है। कानपुर और मुगलसराय के बीच 417 किलोमीटर लंबे रेल खंड पर सिग्नल और दूरसंचार के काम के लिए चीनी कंपनी का यह ठेका दिया गया था। रेलवे की ओर से शुक्रवार को करार को रद्द करने का लेटर जारी कर दिया गया।

काम की धीमी प्रगति पर कड़ी कार्रवाई

इस मामले में पहले ही ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कारपोरेशन ऑफ इंडिया की ओर से चीनी कंपनी को 14 दिन का नोटिस जारी किया गया था। यह नोटिस काम की धीमी प्रगति को लेकर जारी किया गया था। 2016 में दिए गए इस ठेके में 2019 तक काम पूरा होना था मगर अभी तक सिर्फ 20 फीसदी ही काम हो पाया है। अब इस मामले में बड़ा कदम उठाते हुए कंपनी का करार रद्द कर दिया गया है। इस प्रोजेक्ट के लिए विश्व बैंक से पैसा मिला है और करार खत्म करने की जानकारी विश्व बैंक को दे दी गई है। माना जा रहा है कि पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में सैन्य विवाद बढ़ने के कारण चीनी कंपनियों को आने वाले दिनों में और झटके लग सकते हैं।

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