चीन को उसी की भाषा में जवाब देगा भारत, ड्रैगन के आगे किसी भी मोर्चे पर नहीं झुकेगा देश

लद्दाख में अपने सैनिकों की तैनाती करके टकराव का माहौल बनाने वाले चीन को भारत हर मोर्चे पर उसी की भाषा में जवाब देगा। भारत ने हर मोर्चे पर चीन को करारा जवाब देने के लिए रणनीति तैयार कर ली है।

नई दिल्ली: लद्दाख में अपने सैनिकों की तैनाती करके टकराव का माहौल बनाने वाले चीन को भारत हर मोर्चे पर उसी की भाषा में जवाब देगा। भारत ने हर मोर्चे पर चीन को करारा जवाब देने के लिए रणनीति तैयार कर ली है। पिछले दो दिनों के दौरान दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठकों में व्यापार, कूटनीति और सैन्य आक्रामकता सहित हर मोर्चे पर चीन को जवाब देने की रणनीति तैयार कर ली गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सीडीएस जनरल बिपिन रावत और तीनों सेनाओं के प्रमुख लद्दाख में पैदा हुई संवेदनशील स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

ताइवान को समर्थन नहीं हो रहा बर्दाश्त

चीन इन दिनों कोरोना संकट के कारण पूरी दुनिया के निशाने पर है और कूटनीतिक स्तर पर भी ताइवान और हांगकांग में फंसा हुआ है। हांगकांग में चीन कड़े सुरक्षा कानून बनाने की कोशिश में जुटा हुआ है ताकि वहां लोकतंत्र समर्थकों के आंदोलन को कुचला जा सके। ताइवान के मुद्दे पर अमेरिकी रुख को भारत का परोक्ष समर्थन चीन को काफी नागवार गुजरा है। सत्ताधारी दल के दो सांसदों के ताइवान के राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण में शामिल होने पर चीन ने गहरी आपत्ति जताई है।

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चीनी काउंसलर ने जताई आपत्ति

दिल्ली में चीनी दूतावास के काउंसलर लियू बिंग ने इस समारोह में भारत की ओर से सांसद मीनाक्षी लेखी और राहुल कासवान के शामिल होने पर विरोध दर्ज कराया है। इन दोनों सांसदों ने ताइवान के राष्ट्रपति वेन के शपथ ग्रहण समारोह में वर्चुअल माध्यम से शिरकत की थी। चीन के काउंसलर ने दोनों सांसदों से लिखित शिकायत भी दर्ज कराई जिसमें दोनों सांसदों की तरफ से दिए गए बधाई संदेश को गलत बताया गया है। इस समारोह में अमेरिकी विदेश मंत्री सहित दुनिया के तमाम देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था।

कंपनियों के काम समेटने से झुंझलाहट

व्यापारिक मोर्चे पर मिल रहे झटके के कारण इन दिनों चीन का रुख काफी झुंझलाहट भरा हुआ है। कोरोना संकट के साए में तमाम बड़ी विदेशी कंपनियां चीन से अपना कारोबार समेट रही हैं। अमेरिका ने भी चीनी कंपनियों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए शिकंजा कस दिया है। अमेरिका ने कई चीनी कंपनियों को काली सूची में डाल दिया है। दूसरी ओर कोरोना संकट के दौरान सार्थक भूमिका निभाने की वजह से ताइवान को दुनिया का समर्थन मिला है। भारत और अमेरिका के बीच बढ़ रही रणनीतिक साझेदारी से भी चीन में भारी झुंझलाहट दिख रही है।

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बौखलाहट में उठाया लद्दाख में कदम

लद्दाख में गाल्वन घाटी और पैंगॉन्ग लेक के इर्द-गिर्द चीनी सैनिकों की तैनाती को चीन की बौखलाहट से जोड़कर देखा जा रहा है। जानकारों का कहना है कि चीन ने इस इलाके में कभी इस तरह का आक्रामक रुख नहीं दिखाया था। इसलिए माना जा रहा है कि चीन ने दबाव बनाने के लिए इस तरह का कदम उठाया है। चीन व्यापारिक मोर्चे पर भारत पर दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है ताकि अमेरिका सहित अन्य देशों की रणनीतिक मोर्चाबंदी से भारत को दूर किया जा सके।

भारत का कदम वापस न खींचने का संकेत

इस बीच भारत की ओर से भी चीन को स्पष्ट संकेत दिया गया है कि वह अपना कदम पीछे नहीं खींचेगा। हालांकि माहौल को सामान्य बनाने की कोशिशें भी जारी है मगर इसके साथ ही भारत ने चीन को सख्त संदेश भी दिया है। हाल के दिनों में भारत ने उत्तर सिक्किम, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख के संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में अपने सैनिकों की संख्या में बढ़ोतरी की है। रक्षा सूत्रों का कहना है कि इसके जरिए भारत ने चीन को स्पष्ट संदेश दिया है कि वह चीन के आक्रामक सैन्य रुख के आगे किसी भी कीमत पर झुकने को तैयार नहीं है।

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हालात पर पीएम की गहरी नजर

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की सैन्य प्रमुखों के साथ हुई बैठक के बाद प्रधानमंत्री ने भी हालात की समीक्षा की है। उन्होंने इस मुद्दे पर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल व सीडीएस जनरल बिपिन रावत के साथ ही तीनों सैन्य प्रमुखों के साथ विस्तार से चर्चा की है। सूत्रों का कहना है कि भारत पूरे मामले पर गहरी नजर बनाए हुए हैं और चीन को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार है।