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COVID-19:इटली की इस गलती से सबक लें, भारतीय अस्पतालों ने निकाला ये फॉर्मूला

कोरोना वायरस ने महामारी का विकराल रूप धारण कर लिया हैं। इसका भयावह खतरा दिखाई देने लगा हैं। ऐसे में सभी स्टाफ को अस्पतालों में ड्यूटी पर लगा देना सही है, अगर इटली  को देखे तो वहां यहीं हुआ। लेकिन, इस रणनीति में कमी यह है

suman

sumanBy suman

Published on 28 March 2020 5:35 AM GMT

COVID-19:इटली की इस गलती से सबक लें, भारतीय अस्पतालों ने निकाला ये फॉर्मूला
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नई दिल्ली: कोरोना वायरस ने महामारी का विकराल रूप धारण कर लिया हैं। इसका भयावह खतरा दिखाई देने लगा हैं। ऐसे में सभी स्टाफ को अस्पतालों में ड्यूटी पर लगा देना सही है, अगर इटली को देखे तो वहां यहीं हुआ। लेकिन, इस रणनीति में कमी यह है कि अगर किसी एक स्टाफ को कोरोना वायरस का संक्रमण हुआ तो फिर बाकी हॉस्पिटल स्टाफ को भी क्वारेंटाइन में भेजना पड़ेगा। क्योंकि अस्पताल का हरेक स्टाफ प्रत्यक्ष या परोक्ष तौर पर एक-दूसरे के संपर्क में आता ही है। ऐसे में अस्पताल में स्टाफ की भारी किल्लत हो जाएगी और पूरा अस्पताल ही बेकार पड़ जाएगा। इटली में यही हुआ।

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भारत इटली की गलती से ले सबक

इटली की इसी गलती से सबक लेकर देश के शीर्ष सकारी अस्पतालों ने रोटेशन फॉर्म्युला अपना लिया। जिसके तहत डॉक्टरों, नर्सों समेत तमाम हॉस्पिटल स्टाफ को तीन भागों में बांट दिया गया है। ए ग्रुप एक सप्ताह तक काम करता है और दो सप्ताह तक स्टैंड बाय मोड में चला जाता है। इसी तरह बी और सी ग्रुप भी करते हैं। यह फॉर्म्युला अपनाने वालों में दिल्ली, जोधपुर और भोपाल के एम्स, दिल्ली के सफदरजंग और लोक नायक अस्पताल आदि शामिल हैं।

सोशल डिस्टैंसिंग

एक अधिकारी ने बताया कि इस तरीके से अगर किसी एक ग्रुप के साथ संक्रमण का खतरा पैदा भी हो तो दो ग्रुप तैयार रहते हैं। दिल्ली एम्स के डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा, 'यह फॉर्म्युला अस्पतालों में सोशल डिस्टैंसिंग सुनिश्चित करता है। इससे तैयारी का हमारा स्तर बढ़ाता है और पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (PPE) जैसे महत्वपूर्ण संसाधनों को सुरक्षित बनाता है।'

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लोक नायक हॉस्पिटल के कार्यकारी प्रमुख डॉ. जेसी पासी ने कहा कि उन्होंने भी यही व्यवस्था अपना रखी है। अस्पताल में अभी कोविड-19 के छह मरीज भर्ती हैं। उन्होंने बताया कि यूं तो अस्पताल में अभी PPE का पर्याप्त भंडार है, लेकिन भविष्य में इसकी कमी हो सकती है क्योंकि मैन्युफैक्चरर थोक मात्रा के ऑर्डर नहीं ले रहे हैं।

उपकरणों का अभाव

देशभर के कई अस्पतालों में पटना के नलांदा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (NMCH) के एक सीनियर डॉक्टर ने कहा कि WHO रेकमेंडेड हजामत सूट्स उपलब्ध नहीं हैं। ये सूट उन डॉक्टरों को पहनना जरूरी हैं जो कोविड-19 मरीज का इलाज करते हैं। उन्होंने कैंपस में साफ-सफाई की कमी की तरफ भी इशारा किया।

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खतरा

स्वास्थय विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को उन देशों से सीखना चाहिए जहां कोविड-19 महामारी ने कई लोगों की जानें ले लीं जिनमें बहुत से स्वास्थ्यकर्मी भी शामिल हैं। मसलन, इटली में 45 डॉक्टरों की मौत हो चुकी है। इटैलियन नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ के मुताबिक, इटली में महामारी शुरू होने से अब तक 6 हजार स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित हो चुके हैं।

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