बड़ी खबर: कर्मचारियों की बड़ी मांग, कहा- नहीं तो करेंगे बड़ा आंदोलन

इंडियन पब्लिक सर्विस इम्पलॉइज फेडरेशन (इप्सेफ) के आह्वान पर देश भर के केन्द्रीय और राज्यों के कर्मचारियों ने शुक्रवार को अपने कार्यालयों, प्रतिष्ठानों में ‘‘अधिकार दिवस’’ का आयोजन किया

Employees demand

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लखनऊ: इंडियन पब्लिक सर्विस इम्पलॉइज फेडरेशन (इप्सेफ) के आह्वान पर देश भर के केन्द्रीय और राज्यों के कर्मचारियों ने शुक्रवार को अपने कार्यालयों, प्रतिष्ठानों में ‘‘अधिकार दिवस’’ का आयोजन किया और प्रधानमंत्री व अपने-अपने राज्यों के मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेज कर अंग्रेजों के समय से चले आ रहे नियमों, कंडक्ट रूल्स, चरित्र पंजिका आदि को समाप्त कर लोकतांत्रिक तथा ट्रेड यूनियन अधिकार देने तथा सेवा में निष्पक्ष कार्य करने का दायित्व भी देने की मांग की। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि अगर सरकार ने उनकी मांगों पर विचार नहीं किया तो कोविड-19 के बाद बड़े आंदोलन की घोषणा की जायेगी।

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कोरोना मरीजों का इलाज कर रहे कर्मचारियों को करें प्रोत्साहित

इप्सेफ अध्यक्ष वीपी मिश्र ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया है कि कोविड-19 के मरीजों का इलाज कर रहे कर्मचारियों को प्रोत्साहित किया जाए तथा स्टाफ की कमी को देखते हुए सेवानिवृत्त नर्सेज एवं पैरामेडिकल स्टाफ की सेवायें ली जाए जिससे कि सुचारू रूप से इलाज चल सके।

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कर्मचारियों की सरकार से ये है मांग

कर्मचारियों की मांगो के संबंध में इप्सेफ के राष्ट्रीय सचिव अतुल मिश्र ने बताया कि राष्ट्रीय वेतन आयोग का गठन करके ‘‘एक देश-एक वेतन भत्ते सुविधाएं’’ दी जाए, पुरानी पेंशन की बहाली की जाए, सातवे वेतन आयोग की वेतन विसंगतियां दूर की जाए, आटोनोमस संस्थाओं के कर्मचारियों को बोनस तथा 7वें वेतन आयोग का लाभ दिया जाए।

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इसके अलावा राजकीय निगम, स्थानीय निकायों, शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को केन्द्र के समान वेतन भत्ते दिये जाए तथा उन्हे सुदृढ़ किया जाए जिससे निजी संस्थानों की मोनोपोली समाप्त हो, निजीकरण व्यवस्था को तत्काल समाप्त किया जाए, केन्द्र व राज्य सरकारों द्वारा वित्तपोषित योजनाओं में कार्यरत आउटसोर्सिंग या संविदा (ठेका) आंगन बाड़ी, सहायिका, मनरेगा और शिक्षकों को नियमित करने की नीति बनायी जाए।

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इन राज्यों के कर्मचारी आयोजन में हुए शामिल

इप्सेफ का दावा है कि ‘‘अधिकार दिवस’’ के आयोजन में कई लाख कर्मचारियों ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर करते हुए भागीदारी की। जिसमे उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, हिमांचल, उत्तराखण्ड पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक आदि राज्यों के कर्मचारियों ने जोश खरोश के साथ अधिकार दिवस मनाया तथा प्रधानमंत्री व राज्यों के मुख्यमंत्रियों को ज्ञापन भेजा।

रिपोर्ट- मनीष श्रीवास्तव

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