इसरो ने फिर रचा इतिहास, RiSAT-2BR1 समेत 10 सैटेलाइट लॉन्च, जानें खासियत

रतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के लिए बुधवार का दिन बेहद खास है। इसरो ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से पीएसएलवी सी-48 रॉकेट को लांच कर दिया है। इसकी लॉन्चिंग के बाद अब देश की सीमाओं पर नजर रखना आसान हो जाएगा।

नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के लिए बुधवार का दिन बेहद खास है। इसरो ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से पीएसएलवी सी-48 रॉकेट को लांच कर दिया है। इसकी लॉन्चिंग के बाद अब देश की सीमाओं पर नजर रखना आसान हो जाएगा। यह 75वां लॉन्च व्हीकल मिशन है सतीश धवन स्पेस सेंटर श्रीहरिकोटा से पीएसएलवी की 50वीं उड़ान है।

इसरो पीएसएलवी के जरिये एक साथ 10 सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजा है। इनमें देश की दूसरी खुफिया आंख कही जा रही रडार इमेजिंग अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट आरआईसैट-2बीआर1 भी शामिल है। आरआईसैट-2बीआर1 सैटेलाइट रात के अंधेरे और खराब मौसम में भी काम करेगी। धरती पर कितना भी मौसम खराब हो, कितने बादल छाए हों, इसकी निगाहें उन घने बादलों के बावजूद सीमाओं की स्पष्ट तस्वीर लेंगी।

33 देशों के 319 सैटेलाइट्स छोड़ने का रिकॉर्ड

इस लॉन्चिंग के साथ ही इसरो के नाम एक और रिकॉर्ड बन गया। 20 सालों में 33 देशों के 319 उपग्रह छोड़ने का रिकॉर्ड बनाया है। 1999 से लेकर अब तक इसरो ने कुल 310 विदेशी सैटेलाइट्स अंतरिक्ष में स्थापित किए हैं। आज के 9 उपग्रहों को मिला दें तो ये संख्या 319 हो गई है। यह 319 सैटेलाइट्स 33 देशों के हैं।

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पीएसएलवी-सी48 क्यूएल रॉकेट के लॉन्च होने के 21 मिनट बाद अब सभी 10 उपग्रह अपनी-अपनी निर्धारित कक्षाओं में स्थापित हो जाएंगे। पीएसएलवी-सी48 क्यूएल रॉकेट में चार स्ट्रैप ऑन हैं, इसलिए पीएसएलवी के आगे क्यूएल लिखा गया है।

रीसैट-2बीआर1 दिन और रात दोनों समय काम करेगा। ये माइक्रोवेव फ्रिक्वेंसी पर काम करने वाला सैटेलाइट है। इसलिए इसे राडार इमेजिंग सैटेलाइट कहते हैं। यह रीसैट-2 सैटेलाइट का आधुनिक वर्जन है।

यह किसी भी मौसम में काम कर सकता है। साथ ही यह बादलों के पार भी तस्वीरें ले पाएगा, लेकिन ये तस्वीरें वैसी नहीं होंगी जैसी कैमरे से आती हैं। देश की सेनाओं के अलावा यह कृषि, जंगल और आपदा प्रबंधन विभागों की भी मदद करेगा।

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इसरो पीएसएलवी-सी48 क्यूएल रॉकेट के माध्यम से RiSAT-2BR1 को तो लॉन्च करेगा ही। इसके साथ ही वह अमेरिका के 6, इजरायल, जापान और इटली के भी एक-एक सैटेलाइट का प्रक्षेपण इसी रॉकेट से करेगा। रीसैट-2बीआर1 उपग्रह 628 किलोग्राम वजनी है। इसको पृथ्वी की कक्षा से 576 किलोमीटर ऊपर स्थापित किया जाएगा।

26/11 मुंबई हमले के बाद रीसैट-2 सैटेलाइट को भारत ने लॉन्‍च किया था। सीमाओं की रक्षा खासतौर पर समुद्री सीमाओं की निगरानी में इस सैटेलाइट ने काफी सराहनीय काम किया है। इसकी वजह से सीमाओं की फास्‍ट ट्रैक मॉनिटरिंग करना संभव हो पाया था।

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इससे पहले लॉन्‍च किए गए रीसैट-1 सैटेलाइट की सीमाएं काफी हद तक सीमित थीं। रीसैट 2बीआर1 में लगने वाले डिफेंस इंटेलिजेंस सेंसर को भारत में ही बनाया गया है। इसमें मौजूद एक्‍स बैंड एसएआर कैपेबिलिटी की वजह से ही यह उपग्रह हर मौसम में साफ तस्‍वीरें ले सकेगा।