गहलोत की मुसीबतः छूट रहे पसीने, कैसे मनाएं समर्थकों को

गहलोत ने विधानसभा में विश्वासमत प्रस्ताव लाने का एलान भी कर दिया है। हालांकि विश्वासमत को लेकर गहलोत की दिक्कतें दूर हो गई हैं।

Ashok Gehlot

अंशुमान तिवारी

जयपुर: सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायकों की कांग्रेस में वापसी से विश्वासमत को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का संकट पूरी तरह खत्म हो गया है। गहलोत ने विधानसभा में विश्वासमत प्रस्ताव लाने का एलान भी कर दिया है। हालांकि विश्वासमत को लेकर गहलोत की दिक्कतें दूर हो गई हैं। मगर अब उनके सामने एक नई मुसीबत खड़ी हो गई है।

गहलोत ने दिया यह संदेश

सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायकों की कांग्रेस में वापसी से गहलोत के समर्थक विधायक नाराज बताए जा रहे हैं। हालांकि जब से सचिन पायलट की राहुल और प्रियंका से मुलाकात हुई है तब से गहलोत अपने समर्थक विधायकों की नाराजगी दूर करने की कोशिश में लगे हुए हैं। मगर इन विधायकों की नाराजगी दूर नहीं हो पा रही है। गहलोत ने अपने समर्थक विधायकों को इस मुद्दे पर संदेश दिया है भूलो, माफ करो और आगे बढ़ो। वैसे सियासी गलियारों में यह चर्चा तैर रही है कि गहलोत के इस संदेश पर अमल होना थोड़ा मुश्किल दिख रहा है।

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Ashok Gehlot
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यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या गहलोत ने बागी विधायकों को खुद माफ कर दिया है ? सियासी जानकारों के मुताबिक आने वाले दिनों में गहलोत समर्थकों की नाराजगी भी प्रकट हो सकती है। गहलोत से मुलाकात में इन विधायकों ने इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी साफ तौर पर जताई है। गहलोत अपने समर्थक विधायकों को मनाने में जुटे हुए हैं। मगर उन्हें किस हद तक कामयाबी मिलती है। यह आने वाला वक्त ही बता पाएगा। इन विधायकों को इस बात का डर भी सता रहा है कि कहीं बागी विधायक उनके मंत्री पदों पर कब्जा न कर लें।

समर्थकों की उम्मीदें पूरा करना भी मुश्किल

Ashok Gehlot
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गहलोत की एक और मुसीबत अपने समर्थक विधायकों की जरूरत से ज्यादा उम्मीदें भी हैं। कांग्रेस में एक महीने से ज्यादा समय तक चले संकट के दौरान गहलोत के समर्थक विधायक उनके साथ चट्टान की तरह डटे रहे। उन्होंने कदम-कदम पर गहलोत का साथ दिया और इसी वजह से सचिन पायलट खेमे की कोशिशें भी विफल हो गईं। अब इन समर्थक विधायकों ने गहलोत से काफी उम्मीदें पाल रखई हैं। कुछ विधायकों ने मंत्री बनने का सपना देख रखा है तो कुछ और महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियां चाहते हैं।

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अब देखने वाली बात यह होगी कि गहलोत अपने समर्थक विधायकों को कहां तक संतुष्ट कर पाते हैं। गहलोत समर्थक विधायकों की नाराजगी का नजारा जैसलमेर में भी दिखा था। वहां पर गहलोत समर्थक विधायकों ने खुलकर कहा था कि अगर 22 विधायक मिलकर दबाव बना सकते हैं तो हमारी संख्या तो उनसे काफी ज्यादा है। पार्टी आलाकमान को हमारा पक्ष जरूर सुनना पड़ेगा। उस समय गहलोत ने किसी तरह अपने समर्थक विधायकों को आलाकमान की बात मानने के लिए मनाया था।

सचिन समर्थकों की भी राह मुश्किल

Sachin Pilot
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सचिन पायलट के समर्थक विधायकों की भी आगे की राह मुश्किल नजर आ रही है। सियासी जानकारों का कहना है कि भविष्य में पायलट को संगठन में पद देकर राजस्थान की सियासत से दूर किया जा सकता है। ऐसे में पायलट समर्थक विधायक भी अपने भविष्य को लेकर परेशान हैं। सूत्रों के मुताबिक बागी विधायकों को पद दिए जाने का गहलोत खेमे की ओर से विरोध किए जाने की आशंका है। ऐसे में पायलट समर्थक विधायकों के सामने इंतजार करने के अलावा कोई विकल्प नजर नहीं आ रहा है।

Ashok Gehlot With Pilot
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बगावत के बाद गुरुवार को सचिन पायलट और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की पहली बार मुलाकात हुई। इस मुलाकात के दौरान दोनों ने हाथ तो जरूर मिलाया, लेकिन दोनों की बॉडी लैंग्वेज ज्यादा सहज नहीं दिख रही थी। बाद में पायलट कांग्रेस विधायकों की बैठक में भी पहुंचे और वहां कांग्रेस के एकजुट होने का संदेश दिया गया। सियासी जानकारों का कहना है कि गहलोत और पायलट के रिश्तों में ऐसी गांठ पड़ चुकी है जिसके भविष्य में दूर होने की संभावनाएं काफी कम नजर आ रही हैं।

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