जम्मू-कश्मीर में ‘कुछ बड़ा’ होने की आशंका, विपक्षी दलों की आपात बैठक

आतंकी हमलों की आशंका के मद्देनजर जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। इसके साथ ही अमरनाथ यात्रा को रोक दिया है और सभी पर्यटकों और श्रद्धालुओं को जल्द से जल्द घाटी छोड़ने को कहा गया है। सुरक्षा से जुड़े बदले हालात को देखते हुए राज्य की प्रमुख पार्टियों ने आपात बैठक बुलाई है।

श्रीनगर: आतंकी हमलों की आशंका के मद्देनजर जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। इसके साथ ही अमरनाथ यात्रा को रोक दिया है और सभी पर्यटकों और श्रद्धालुओं को जल्द से जल्द घाटी छोड़ने को कहा गया है। सुरक्षा से जुड़े बदले हालात को देखते हुए राज्य की प्रमुख पार्टियों ने आपात बैठक बुलाई है।

राज्य की पार्टियों को अंदेशा है कि केंद्र सरकार कुछ बड़ा फैसला ले सकती है, जिसके तहत आपात बैठक बुलाई गई है। इसी बीच पंजाब से लगने वाले सीमा पर हाई अलर्ट कर दिया गया है। इस बीच पीपीडी प्रमुख और राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती रात में नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला से मिलने पहुंचीं। फारूक के बाद वह सजाद लोन से मिलने वाली हैं।

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जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां डर का मौहाल है, जो घबराहट मैंने पहले कभी नहीं देखी। एक तरफ गवर्नर साहब बोलते हैं कि स्थिति सामान्य है। दूसरी तरफ अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाता की जा रही है। महबूबा ने कहा, ‘अगर आप बीजेपी के प्रमुख नेताओं के बयान को सुनेंगे और घाटी में केंद्रीय बलों की तैनाती को देखेंगे तो यह कश्मीर के किसी भी निवासी के दिल में शंका पैदा करने वाला है। केंद्रीय बल राज्य पुलिस को नजरअंदाज कर रहे हैं। यह सब कुछ इस ओर इशारा करता है कि कुछ बड़ा प्लान किया जा रहा है।’

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वहीं, वरिष्ठ कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि कश्मीर में खौफ का माहौल है, इस तरह का एडवाइजरी इससे पहले कभी नहीं आई। कांग्रेस नेता ने कहा कि इससे पहले कभी ऐसी कोई एडवाइजरी जारी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि आर्टिकल 35-A और आर्टिकल 370 को हटाने को लेकर चल रहीं अटकलों से घाटी में खौफ का माहौल है। उन्होंने कहा कि इन दोनों धाराओं को हटाने से कश्मीर से ज्यादा जम्मू और लद्दाख का नुकसान होगा।

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उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट कर कहा कि गुलमर्ग में होटलों में रहने वाले दोस्तों को छोड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है। राज्य परिवहन की बसों को पहलगाम और गुलमर्ग से लोगों को बाहर निकालने के लिए लगाया गया है। अगर (अमरनाथ) यात्रा के लिए खतरा है तो गुलमर्ग को क्यों खाली किया जा रहा है?।

दरअसल, अतिरिक्त जवानों की तैनाती को आर्टिकल 35-A और 370 को खत्म करने से जोड़कर देखा जा रहा है, जबकि केंद्र ने इन अटकलों को खारिज किया है।