तो क्या देशद्रोही हैं कन्हैया! मंच पर की ऐसी भूल, आ रहे कमेंट

JNU छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष और CPI नेता कन्हैया कुमार अपने बयानों की वजह से चर्चा में बने रहते हैं। वो हर समय कोई न कोई बयान की वजह से सुर्खियों में आ जाते हैं।

पटना: JNU छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष और CPI नेता कन्हैया कुमार अपने बयानों की वजह से चर्चा में बने रहते हैं। वो हर समय कोई न कोई बयान की वजह से सुर्खियों में आ जाते हैं। वो एक बार फिर से चर्चा में आ गए हैं जब पटना में हुई ‘संविधान बचाओ, नागरिकता बचाओ’ महारैली में कुछ ऐसा कर दिया कि सबके सामने हंसी का पात्र बन गए। असल में, कन्हैया की रैली में जब राष्ट्रगान गाया गया, तब उन्होंने अंतिम दो लाइन में ”जन गण मंगल” के बदले ”जन मन गण” गा दिया। उसके बाद में उन्हें अपनी इस गलती का अहसास हुआ। जिसके बाद ही उन्‍होंने राष्‍ट्रगान को पूरा गाया।

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सोशल मीडिया में हुए ट्रोल

कन्हैया ने अपने भाषण की शुरुआत करने से पहले गांधी मैदान में मौजूद लोगों से खड़े होकर राष्ट्रगान गाने की अपील की और फिर राष्ट्रगान शुरू किया। लेकिन जैसे ही उन्होंने राष्ट्रगान शुरू किया उन्होंने लास्ट की दो लाइन में ”जन गण मंगल” के बदले ”जन मन गण” गा दिया। उन्होंने गलती का अहसास होने पर दोबारा राष्ट्रगान गाया गया। इस वाकये के बाद लोगों ने उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल करना शुरू कर दिया है।

गांधी मैदान में हुई महारैली

आपको बता दें कि पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में गुरुवार को NPR-NRC-CAA विरोधी संघर्ष मोर्चा की ‘संविधान बचाओ नागरिकता बचाओ’ महारैली का आयोजन किया गया था। इसमें JNU छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष व CPI नेता कन्हैया के साथ वाम विचारों से जुड़ी और भी कई हस्तियां शामिल हुई थीं।

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मोदी सरकार पर जमकर बरसे कन्हैया

इस महारैली में दिल्ली की हिंसा के लिए केंद्र सरकार को निशाना बनाया। कन्‍हैया ने यहां तक कहा कि, इस घटना के कारण उन्‍हें तीन दिनों से नींद नहीं आ रही है। उन्होंने कहा कि देश में जो चल रहा है और जो उथल-पुथल है, उसकी वजह से मैं सो नहीं पा रहा हूं। उन्‍होंने कहा कि ‘गांधी जिंदाबाद’ कहने वाले को देशद्रोही बताया जा रहा है और ‘गोडसे जिंदाबाद’ कहने वाले को संसद पहुंचाया जा रहा है। आजादी के बाद देश में जो मुसलमान रह गए हैं, उन्होंने जिन्ना के बजाय गांधी को राष्ट्रपिता माना है। लेकिन आज सरकार ने गोडसे को चुन लिया है। अब जनता तय करेगी कि गांधी के साथ रहना है या गोडसे के साथ।

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