लाखों सैनिक तैनात: धोखेबाज चीन की हालत खराब, सबक सिखाने को तैयार भारत

पूर्वी लद्दाख गलवान घाटी में भारत-चीन सीमा पर तनाव लगातार बढ़ता ही जा रहा है। ऐसे में धोखेबाज नाकारे चीन को उसके किेए का सबक सिखाने के लिए भारत हर संभव प्रयास कर रहा है।

Published by Vidushi Mishra Published: June 18, 2020 | 2:18 pm

नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख गलवान घाटी में भारत-चीन सीमा पर तनाव लगातार बढ़ता ही जा रहा है। ऐसे में धोखेबाज नाकारे चीन को उसके किेए का सबक सिखाने के लिए भारत हर संभव प्रयास कर रहा है। एलएसी(लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल) पर जवानों की टुकड़ियों की बढ़-चढ़कर तैनाती की जा रही है। भारत ने जल-थल और नभ में जिस तरह अपनी शक्ति को स्थापित किया है, उससे पार पाना भी चीन के लिए मुमकिन ही नहीं है।

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हर मोर्चे पर चीन के सामने डटी

भारतीय सेना हालातों को देखते हुए इस समय भी हर मोर्चे पर चीन के सामने डटी हुई है। चीन के धोखाबाजी वाले स्वभाव को देखते हुए भारत अब और चौकन्ना हो गया है और इसी के चलते सरहद से हर मोर्च का मुहंतोड़ जवाब देने के लिए तैयार है।

ऐसे में लद्दाख में 3 इंफैंट्री डिविजन डिप्लायड हैं। इसके अलावा ऊंचाई पर युद्धाभ्यास करने वाली दो अलग-अलग ब्रिगेड भी तैनात हैं। हिमाचल प्रदेश में और ज्यादा ट्रूप्स भेजे जा चुके हैं।

साथ ही उत्तराखंड में गढ़वाल और कुमाऊं सेक्टर में सैन्य बल बढ़ा दिया गया है। उत्तरकाशी के चिन्यालिसौर में एयरफोर्स ने हवाई पट्टी को सक्रिय कर दिया है।

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भारत ने पूरी तैयारियां कर ली

बता दें, चीन की नजर यहां भी हमेशा रही है तो इस बात को ध्यान में रखते हुए भारत पूरी तरह तैयार हो चुका है। सिक्किम में सैन्य बल बढ़ाया जा चुका है। अरुणाचल प्रदेश में भी भारत ने पूरी तैयारियां कर ली हैं।

वहीं जम्मू कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल में उत्तरी सेना के कमांड में 34,000 भारतीय सैनिक तैनात हैं। उत्तराखंड में केंद्रीय आर्मी कमांड में 15,500 सैनिक तैनात हैं।

बात करें अगर सिक्किम, अरुणाचल, असम, नागालैंड और बंगाल की, तो यहां पूर्वी आर्मी कमांड में 1 लाख 75 हज़ार 500 सैनिक तैनात हैं। इस तरह सैनिकों की कुल संख्या 225,000 है।

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ड़ाकू विमानों की तैनाती

इसके अलावा सुकना में 33 कोर, तेजपुर में 4 कोर, रांची में 17 माउंटेन स्ट्राइक कोर को भारत ने तैनात कर दिया है। भारतीय वायु सेना की तरफ से एलएसी से सटे बेस पर लड़ाकू विमानों की तैनाती भी की गई है।

भारतीय नौसेना ने हिंद महासागर में अपनी ताकत को बढ़ाना शुरू कर दिया है। यानी जल, थल और नभ हर जगह से भारत तैयार है। चीन को किसी भी कीमत पर हरा के रहना है।

ऐसे में चीन के रक्षा विशेषज्ञ और सैन्य चीनी मैगजिन मॉर्डर्न वैपनरी के संपादक हुआंग गुओझी ने लिखा है कि पहाड़ी मैदान और पर्वतीय क्षेत्रों में सबसे ज्यादा अनुभवी सेना सिर्फ भारत के पास है और 12 डिवीजन में 2 लाख सैनिकों के साथ भारत दुनिया की सबसे शक्तिशाली माउंटेन फाइटिंग फोर्स है।

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चीन के लिए आसान नहीं

इसी सिलसिले में हार्वर्ड केनेडी स्कूल के वेलफेयर सेंटर फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल अफेयर्स की रिसर्च में कहा गया है कि युद्ध की स्थिति में भारत उत्तरी सीमाओं में चीन पर भारी पड़ सकता है।

आगे इस रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन की सामरिक शक्तियां बिखरी हुई हैं और सैनिकों को लाना-ले जाना चीन के लिए आसान नहीं होगा। चीन के ये कड़ी ही नहीं बहुत ही ज्यादा मुश्किल चुनौती है।

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