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भारत युद्ध को तैयार: आ रहे ये सुपर-पॉवर ड्रोन, सेनाओं की ताकत में बढ़ोत्तरी

चीन लगातार भारत के साथ बातचीत के बाद भी लद्दाख सीमा पर अपनी हरकतों को कम नहीं कर रहा है। ऐसे में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर जारी तनातनी के चलते रक्षा मंत्रालय अमेरिका से 30 जनरल एटॉमिक्स MQ-9A रीपर ड्रोन खरीदने की तैयारी कर रहा है।

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NewstrackBy Newstrack

Published on 23 Sep 2020 5:18 AM GMT

भारत युद्ध को तैयार: आ रहे ये सुपर-पॉवर ड्रोन, सेनाओं की ताकत में बढ़ोत्तरी
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नई दिल्ली: चीन लगातार भारत के साथ बातचीत के बाद भी लद्दाख सीमा पर अपनी हरकतों को कम नहीं कर रहा है। ऐसे में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर जारी तनातनी के चलते रक्षा मंत्रालय अमेरिका से 30 जनरल एटॉमिक्स MQ-9A रीपर ड्रोन खरीदने की तैयारी कर रहा है। बता दें, ड्रोन खरीदने का ये सौदा करीब 3 बिलियन डॉलर यानी 22,000 करोड़ रुपये में होगा।

6 ड्रोन अमेरिका से तुरंत खरीदे जाएंगे

सीमा पर चल रहे तनाव के बीच रक्षा मंत्रालय ने आंतरिक बैठकों के बाद 6 रीपर मीडियम एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस ड्रोनों की प्रारंभिक लॉट की खरीद का रास्ता साफ कर दिया है। अब भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना के लिए ये 6 ड्रोन अमेरिका से तुरंत खरीदे जाएंगे। सेना के तीनों अंगो को फिलहाल दो-दो ड्रोन मिलेंगे। जिससे हर सेना की ताकत में दोगुना क्षमता बढ़ जाएगी।

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तीनों सेनाओं को 8-8 ड्रोन

भारतीय सेना से हवाले से सूत्रों ने इस बारे में बताया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की आगामी बैठक से पहले 30 ड्रोनों के लिए स्वीकृति की आवश्यकता (AON) को प्रमुखता से रखा जाएगा।

इस हिसाब से अनुबंध को दो भागों में बांटा जा रहा है। करीब 600 मिलियन डॉलर (4,400 करोड़ रुपये) के 6 MQ-9s आने वाले कुछ महीनों में एकमुश्त पैसे देकर खरीदे जाएंगे और तीनों सेनाओं को दे दिए जाएंगे। वहीं बाकी 24 ड्रोन अनुबंध में विकल्प के तहत अगले तीन वर्षों में हासिल कर लिए जाएंगे। इनमें से तीनों सेनाओं को 8-8 ड्रोन फिर दिए जाएंगे।

defence ministry फोटो-सोशल मीडिया

बता दें, ये सौदा बीते 3 वर्षों से लाइन में लगा हुआ है। साल 2017 में यह अत्याधुनिक ड्रोन केवल भारतीय नौसेना के लिए खरीदा जाना था, लेकिन बाद में इसे तीनों सेनाओं के लिए खरीदने का फैसला लिया गया। वहीं सरकार ने 2018 में अमेरिका द्वारा भारत को बिक्री के लिए एमक्यू -9 के सशस्त्र संस्करण को मंजूरी दे दी थी।

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फास्ट-ट्रैक के जरिए खरीद

हालाकिं रक्षा मंत्रालय द्वारा हार्डवेयर खरीद में एओएन(AON) औपचारिक रूप से पहला कदम है। एओएन(AON) मामलों को अनुबंध में बदलने के लिए सामान्यत् कई साल लगते हैं। लेकिन ड्रोन खरीद को लेकर माना जा रहा है कि इसे बहुत छोटे समय सीमा में पूरा कर लिया जाएगा। इसे अमेरिकी सरकार के साथ भारत सरकार समझौते के तहत फास्ट-ट्रैक के जरिए खरीदेगी।

फिेलहाल 6 ड्रोन अमेरिका से तुरंत लिए जाने के लिए रक्षा मंत्रालय तैयारी कर रहा है। अमेरिकी सशस्त्र बलों या उसके सहयोगियों ने पहले से ही ऐसे ड्रोनों का उत्पादन कर रखा हो। अब ये स्पष्ट नहीं है कि ड्रोन के शुरुआती बैच को हेलफायर मिसाइलों और अन्य एयर-टू-ग्राउंड मिसाइल से लैस किया जाएगा या नहीं किया जाएगा।

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