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यहां बरसो से ताले में कैद हैं रामलला, आखिर क्यों किया गया ऐसा

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के बारे में कौन नहीं जानता। श्रीराम को हिंदु सनातन धर्म के सबसे पूज्यनीय और सबसे महानतम देव माने जाते हैं। वैसे तो आप रामलला के जन्मस्थान यानि अयोध्या के बारे में तो जानते ही होंगे।

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ShreyaBy Shreya

Published on 9 Feb 2020 9:27 AM GMT

यहां बरसो से ताले में कैद हैं रामलला, आखिर क्यों किया गया ऐसा
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लखनऊ: मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के बारे में कौन नहीं जानता। श्रीराम को हिंदु सनातन धर्म के सबसे पूज्यनीय और सबसे महानतम देव माने जाते हैं। वैसे तो आप रामलला के जन्मस्थान यानि अयोध्या के बारे में तो जानते ही होंगे। लेकिन आज हम आपको श्री राम के ननिहाल के बारे में बताने जा रहे हैं।

चंदखुरी गांव, जहां है रामलला का ननिहाल

रामलला का ननिहाल छत्तीसगढ़, जिसे पुरातनकाल में दक्षिण कोसल के नाम से भी जाना जाता रहा है, इसी दक्षिण कोसल (छत्तीसगढ़) में ही है। रायपुर से 40 किलोमीटर दूर चंदखुरी गांव में ही रामलला के मामा का घर है। ये गांव माता कौशल्या की जन्म स्थली माना जाता है। यहां माता कौशल्या का मंदिर भी है। यही वजह कि यहां के लोग भगवान राम को भांजे के रूप में पूजते हैं। यहीं नहीं, यहां के लोग अपनी बहन के बेटे को भगवान राम के रूप में पूजते हैं।

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23 सालों से अपने ननिहाल में ताले में बंद हैं श्री राम

लेकिन पिछले 23 सालों से श्री राम अपने ननिहाल में ताले में बंद हैं। दरअसल, यहां पर दो परिवारों के बीच आधिपत्य को लेकर चल रही लड़ाई की वजह से यहां भगवान राम के मंदिर में ताला लगा हुआ है। दोनों परिवारों के बीच मंदिर के मालिकाना हक को लेकर चल रहे विवाद की वजह से यह मंदिर बंद रखा गया है।

गांव के मध्य में स्थित है रामलला का मंदिर

छत्तीसगढ़ के चंदखुरी गांव में जलसेन नामक जलाशय के मध्य टापू में माता कौशल्या का मंदिर है, जहां माता कौशल्या की गोद में रामलला विराजमान हैं। बता दें कि विश्व में माता कौशल्या का यह इकलौता मंदिर है। गांव के मध्य में भगवान राम का मंदिर है जो कि पिछले 23 सालों से बंद चल रहा है।

सैकड़ों वर्ष पूर्व हुआ था इस मंदिर का निर्माण

गांव की सरपंच इंदु शर्मा बताती हैं कि इस मंदिर को सैकड़ों वर्ष पूर्व बनवाया गया था। जब सीताराम स्वामी नायडू गांव के मालगुजार थे, तब उन्होंने साल 1952 में आयुर्वेदिक डॉक्टर के रूप में यहां आए नरसिंह प्रसाद उपाध्याय को मंदिर की सेवा में नियुक्त किया था और मंदिर की लगभग 28 एकड़ जमीन की जिम्मेदारी सौंपी थी। इसके कुछ समय बाद ही स्वामी नायडू की मृत्यु हो गई।

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1997 से बंद है श्री राम का मंदिर

सरपंच इंदु शर्मा ने बताया कि मई, 1997 में उनके ससुर एवं मंदिर के पुजारी नरसिंह प्रसाद उपाध्याय की मृत्यु हो जाने के बाद गांव के प्रतिष्ठित बैस परिवार ने इस मंदिर और जमीन पर दावा किया और मंदिर में कथित रुप से ताला लगा दिया। तब (1997) से ही ये मंदिर बंद है। इंदु शर्मा ने बताया कि तब से ही दोनों परिवारों के बीच इस मंदिर के हक के लिए लड़ाई चल रही है।

बैस परिवार का क्या है कहना...

गांव की सरपंच इंदु शर्मा चाहती हैं कि मंदिर को खोल दिया जाए, जिससे गांव के लोग दर्शन कर सकें। वहीं गांव के बैस परिवार का मंदिर को लेकर अलग दावा है। बैस परिवार के सदस्य महेश बैस का कहना है कि जब स्वामी नायडू गांव के मालगुजार थे, तब बैस परिवार ने उनकी पूरी जमीन खरीदी थी। जिसके साथ ही यह मंदिर भी बैस परिवार के हिस्से में आ गया था।

300 साल पुराना है मंदिर

उन्होंने कहा कि मंदिर लगभग 300 साल पुराना है और मालगुजार नायडू ने इस मंदिर की पूरी मरम्मत साल 1915 में कराई थी। उन्होंने बताया कि उनके परिवार के पास मंदिर आने के बाद भी पुजारी उपाध्याय का परिवार इस मंदिर में पूजा-अर्चना करता था। लेकिन पुजारी की मृत्यु के बाद मंदिर में पूजा होनी बंद हो गई। उन्होंने कहा कि मंदिर भी रख रखाव के अभाव में जर्जरित हो गया है और सावधानी बरतते हुए मंदिर को बंद करना पड़ा।

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जल्द ही शुरु होगा मंदिर की मरम्मत का काम

बैस ने बताया कि उनके परिवार ने मंदिर का नया नक्शा बना लिया है और जल्द ही मंदिर की मंदिर की मरम्मत का काम शुरु कर दिया जाएगा, जिससे मंदिर जल्द ही खुल सके। इस मंदिर का निर्माण गांव में बने कौशल्या माता के मंदिर के बाद हुआ है। जिसके आधार पर मंदिर के निर्माण का समय 6वीं शताब्दी माना जा सकता है।

साल 2020 के अंत तक बनेगा भव्य राम मंदिर

ऐसा भी कहा जा रहा है कि छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भी भगवान राम का भव्य मंदिर बनाया जा रहा है। इस मंदिर का निर्माण चंदखुरी गांव में किया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2020 के अंत तक राम मंदिर का काम पूरा कर लिया जाएगा।

भांजे के रुप में होती है भगवान राम की पूजा

बताया जाता है कि राम जी ने अपने वनवास के 12 साल भी छत्तीसगढ़ में ही बिताए थे। पुरातत्वविद कहते हैं कि चूंकि छत्तीसगढ़ श्रीराम का ननिहाल है इसलिए राम छत्तीसगढ़ वाले लोगों के भांजे हुए। यही कारण है कि यहां पर भगवान राम की भांजे के रुप में पूजा होती है और यहां के निवासी अपने भांजे में भगवान राम की छवि देखते हैं, तथा यहां भांजे का पैर छूने का रिवाज है।

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