ये है ऑपरेशन लोटस जो जुटाएगा जादुई आंकड़ा  

महाराष्ट्र में प्रमुख राजनीतिक दल इस मोड़ पर सरकार बनाने के लिए एक दूसरे पर कटाक्ष कर रहे हैं, अब सभी की निगाहें 13 निर्दलीय और छोटे दलों के 16 विधायकों पर लग गई हैं। क्योंकि 288 सदस्यों वाली विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 145 की संख्या हासिल करने के लिए फ्लोर टेस्ट में इनकी भूमिका अहम है।

महाराष्ट्र: सरकार बनाने को लेकर खींच-तान में लगे महाराष्ट्र के सभी सियासी दलों की टेंसन अभी खत्म नहीं हुई है। अजित पवार के साथ मिलकर सरकार बनाने वाले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने अब विधानसभा में फ्लोर टेस्ट पास करना बड़ी चुनौती है। हालांकि शपथ ग्रहण के बाद  भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने ‘ऑपरेशन लोटस’ शुरू कर दिया है।

संख्या हासिल करने के लिए फ्लोर टेस्ट में इनकी भूमिका अहम

जबकि महाराष्ट्र में प्रमुख राजनीतिक दल इस मोड़ पर सरकार बनाने के लिए एक दूसरे पर कटाक्ष कर रहे हैं, अब सभी की निगाहें 13 निर्दलीय और छोटे दलों के 16 विधायकों पर लग गई हैं। क्योंकि 288 सदस्यों वाली विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 145 की संख्या हासिल करने के लिए फ्लोर टेस्ट में इनकी भूमिका अहम है।

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कांग्रेस-राकांपा के साथ एक समय की भाजपा की सहयोगी रही शिवसेना सरकार बनाने के लिए बातचीत कर रही है। शिवसेना का दावा है कि उसके 56 विधायकों के अलावा उसे सात विधायकों का समर्थन हासिल है।

उधर 105 सीटों हासिल करके 21 अक्टूबर को हुए विधानसभा चुनावों में सबसे बड़े दल के रूप में उभरी भाजपा का दावा है कि उसे 14 और विधायकों के समर्थन हासिल है जिससे उसकी संख्या प्रभावी रूप से 119 तक पहुंच रही है।

हालांकि यह निश्चित नहीं है कि कितने विधायक एनसीपी नेता अजीत पवार का समर्थन कर रहे हैं, जिन्होंने शनिवार को भाजपा के साथ हाथ मिलाया और मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस के नेतृत्व वाली भाजपा नीत सरकार में उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। लेकिन फिलहाल उनके साथ पांच विधायक दिख रहे हैं।

अचलपुर के विधायक और प्रहार जनशक्ति पार्टी (PJP) के प्रमुख बच्चू कडू, जिन्होंने कई दिनों पहले शिवसेना को समर्थन का पत्र दिया था, उन्होंने रविवार को बताया कि वह और उनके दो विधायक सहयोगी उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी का समर्थन करना जारी रखेंगे।

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क्रान्तिकारी शेतकरी पक्ष (केएसपी) के विधायक शंकरराव गदाख ने भी शिवसेना को समर्थन का पत्र दिया है, जिसमें आशीष जायसवाल (रामटेक), नरेंद्र गोदारेकर (भंडारा), मनीला गावित (सकरी) और चंद्रकांत पाटिल (मुक्तेनगर) शामिल हैं।

भाजपा का समर्थन करने वाले विधायकों में निर्दलीय रवि राणा (बडनेरा), किशोर जोरगेवार (चंद्रपुर), गीता जैन (मीरा भायंदर), महेश बाल्दी (उरण), संजय शिंदे (करमाला), राजेंद्र राउत (बरशी), आकाश अवडे (इचलकरंजी) शामिल हैं। और राजेंद्र पाटिल (शिरोल) हैं।

इन नेताओं को दी गयी जिम्मेदारी

बीजेपी ने नारायण राणे, राधाकृष्ण विखे पाटिल, गणेश नाइक और बबनराव पचपुते को विधानसभा में फ्लोर टेस्ट के लिए बहुमत जुटाने की जिम्मेदारी दी गई है। ये चारों नेता पहले शिवसेना या एनसीपी या फिर कांग्रेस में रह चुके हैं। राज्यसभा सांसद राणे बीजेपी में शामिल होने के पहले लंबे समय तक शिवसेना और कांग्रेस में लंबे समय तक रहे हैं।

दोनों ही दलों में राणे की अच्छी पैठ मानी जाती है। स्वयं राणे भी यह कह चुके हैं कि शिवसेना में उद्धव और कांग्रेस में अशोक चव्हाण को छोड़कर सभी मेरे दोस्त हैं। गौरतलब है कि विधायकों की खरीद-फरोख्त के डर से शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस, तीनों दलों ने अपने विधायकों को होटल में रखा है।

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राणे ने किया था सरकार बनाने का दावा

कुछ दिन पहले ही नारायण राणे ने भाजपा की सरकार बनने का दावा किया था। राणे ने प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू किए जाने के बाद भाजपा की सरकार बनाने के लिए पूरी कोशिश करने का बयान दिया था।

उन्होंने कहा था कि सरकार बनाने के लिए जो भी करना होगा, वह करेंगे। साम, दाम, दंड, भेद शिवसेना ने ही सिखाया है। बता दें कि कर्नाटक में सत्ताधारी कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन के कई विधायक बागी हो गए थे। सभी बागी विधायक मुंबई आकर एक होटल में रुके थे।