राम मंदिर विवाद: जमीन पर दावा छोड़ने को तैयार मुस्लिम पक्ष, लेकिन रख दी ये शर्तें

राम जन्भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी हो चुकी है। इस बीच अयोध्या मामले में नया मोड़ गया है। मध्यस्थता पैनल ने देश की सर्वोच्च अदालत को सूचित किया है कि 2.77 एकड़ की जमीन के बंटवारे के इस विवाद में वह समझौते तक पहुंच चुका है।

नई दिल्ली: राम जन्भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी हो चुकी है। इस बीच अयोध्या मामले में नया मोड़ गया है। मध्यस्थता पैनल ने देश की सर्वोच्च अदालत को सूचित किया है कि 2.77 एकड़ की जमीन के बंटवारे के इस विवाद में वह समझौते तक पहुंच चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक पैनल ने कहा है कि मुस्लिम पक्ष राम मंदिर के लिए कुछ शर्तों के साथ विवादित भूमि पर अपना दावा छोड़ने के लिए तैयार है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने ही मध्यस्थता पैनल का गठन किया है।

एक अंग्रेजी अखबार में सूत्रों के हवाले से यह बात कही गई है। अखबार की रिपोर्ट में कहा है कि सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्वाणी अखाड़ा, निर्मोही अनी अखाड़े का एक प्रतिनिधि (सभी 8 निर्मोही अखाड़े इसके तहत आते हैं), हिंदू महासभा और राम जन्मस्थान पुनरुद्धार समिति ने समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते में मुस्लिम पक्ष द्वारा राम मंदिर को उचित स्थान देने के बदले कुछ शर्तें रखी हैं।

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मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि समझौते में शर्त है कि 1991 के कानून का सख्ती से पालन किया जाए जिसके तहत 15 अगस्त 1947 से जारी व्यवस्था के मुताबिक इस जगह का सबके लिए प्रार्थना स्थल के तौर पर प्रयोग किया जाता था।

इसके अलावा शर्त रखी गई है कि अयोध्या में सभी मस्जिदों की मरम्मत और खासतौर पर दूसरे स्थान पर वक्फ बोर्ड को मस्जिद निर्माण के लिए जगह दी जाए।

लेकिन इस समझौते के लिए हुई मध्यस्थता में विवादित भूमि के दो बड़े दावेदार वीएचपी समर्थित राम जन्मभूमि न्यास और रामलला विराजमान और जमीयत उलेमा शामिल नहीं हुए।

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इस मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कह गया है कि मुस्लिम पार्टियों ने अपना दावा छोड़ दिया है और राम मंदिर निर्माण के लिए सहमति दे दी है।

इन मुद्दों पर बनी सहमति

-मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के सभी धार्मिक स्थलों की 1947 से पहले वाली स्थिति बरकरार रखने के लिए कानून को लागू करने की मांग की गई है। 1991 में लागू स्पेशल प्रॉविजन ऐक्ट के तहत धार्मिक स्थलों को दूसरे स्थान में परिवर्तिन न किया जाए। यह ऐक्ट रामजन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद में नहीं लागू होता है।

-2.77 एकड़ की विवादित भूमि पर मुस्लिम पक्ष अपना दावा छोड़ेंगे। इसके बदले में सरकार अयोध्या में सभी मस्जिदों के मरम्मत का काम पूरा करे और सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद निर्माण के लिए दूसरी जगह मुहैया कराई जाएगी।

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-ऑर्कियॉलजिकल सर्वे ऑफ इंडिया मैनेजमेंट मुस्लिमों के प्रार्थना के लिए कुछ मस्जिदों को खोले और कोर्ट द्वारा नियुक्त कमिटी और मुस्लिम पार्टियां इसका फैसला करेंगी कि किन मस्जिदों को पूजा के लिए खोला जाए

-रिपोर्ट में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त मध्यस्थता पैनल के सदस्य जस्टिस कलिफुल्ला, वरिष्ठ वकील पांचू और आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने भी अंग्रेजी अखबार से बताया कि जमीयत धड़े के लिए भी इस समझौते को इंकार करना बहुत मुश्किल होगा।