जब पाकिस्तान में घिर गये थे डोभाल, मुसलमानों ने पूछा- क्या तुम हिन्दू हो?

सर्जिकल स्ट्राइक के मास्टर माइंड माने जाने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का जन्म आज ही के दिन 20 जनवरी को हुआ था। वह एक ऐसे भारतीय हैं, जो खुलेआम पाकिस्तान को बलूचिस्तान छीन लेने की चेतावनी देने से गुरेज़ नहीं करते।

नई दिल्ली: सर्जिकल स्ट्राइक के मास्टर माइंड माने जाने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का जन्म आज ही के दिन 20 जनवरी को हुआ था। वह एक ऐसे भारतीय हैं, जो खुलेआम पाकिस्तान को बलूचिस्तान छीन लेने की चेतावनी देने से गुरेज़ नहीं करते।

वह पाकिस्तान के लाहौर में अपने देश की रक्षा के लिए 7 साल तक मुसलमान बनकर रहे थे। वे भारत के ऐसे एकमात्र नागरिक हैं, जिन्हें सैन्य सम्मान कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान पाने वाले वह पहले पुलिस अफसर हैं।

 

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जब डोभाल से पूछा गया, क्या तुम हिन्दू हो?

डोभाल ने विदर्भ मैनेजमेंट एसोसिएशन के समारोह में भाषण देते हुए एक कहानी सुनाई थी, “लाहौर में औलिया की एक मज़ार है। जहां बहुत से लोग आते हैं। मैं एक मुस्लिम शख़्स के साथ रहता था।

मैं वहां से गुज़र रहा था तो मैं भी उस मज़ार में चला गया। वहां कोने में एक शख़्स बैठा हुआ था जिसकी लंबी सफ़ेद दाढ़ी थी। उसने मुझसे छूटते ही सवाल किया कि क्या तुम हिंदू हो?”

डोभाल ने उन्हें बताया कि नहीं। डोभाल के मुताबिक़, “उसने कहा मेरे साथ आओ और फिर वो मुझे पीछे की तरफ़ एक छोटे से कमरे में ले गया। उसने दरवाज़ा बंद कर कहा, देखो तुम हिंदू हो। मैंने कहा आप ऐसा क्यों कह रहे हैं? तो उसने कहा आपके कान छिदे हुए हैं।

मैंने कहाँ, हाँ बचपन में मेरे कान छेदे गए थे लेकिन मैं बाद में कनवर्ट हो गया था। उसने कहा तुम बाद में भी कनवर्ट नहीं हुए थे। ख़ैर तुम इसकी प्लास्टिक सर्जरी करवा लो नहीँ तो यहाँ लोगों को शक हो जाएगा।”

डोभाल आगे बताते हैं, “उसने मुझसे पूछा कि तुम्हें पता है मैंने तुम्हें कैसे पहचाना। मैंने कहा नहीं तो उसने कहा, क्योंकि मैं भी हिंदू हूँ। फिर उसने एक अलमारी खोली जिसमें शिव और दुर्गा की एक प्रतिमा रखी थी।

उसने कहा देखो मैं इनकी पूजा करता हूँ लेकिन बाहर लोग मुझे एक मुस्लिम धार्मिक शख़्स के रूप में जानते हैं।” उस वक्त डोभाल एक अंडर कवर एजेंट के तौर पर काम कर रहे थे।

 

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जानें अजीत डोभाल के बारे में खास बातें

अजीत डोभाल आई.पी.एस. और भारत के वर्तमान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में 20 जनवरी, 1945 को अजीत डोभाल का जन्म हुआ था। इनके पिता इंडियन आर्मी में थे। अजमेर मिलिट्री स्कूल से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने आगरा यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में पोस्ट-ग्रेजुएशन किया है।

1968 केरल बैच के आईपीएस अफसर अजीत डोभाल अपनी नियुक्ति के चार साल बाद साल 1972 में इंटेलीजेंस ब्यूरो से जुड़ गए थे।
अजीत डोभाल ने करियर में ज्यादातर समय खुफिया विभाग में ही काम किया है। कहा जाता है कि वह सात साल तक पाकिस्तान में खुफिया जासूस रहे।

साल 2005 में एक तेज तर्रार खुफिया अफसर के रूप में स्थापित अजीत डोभाल इंटेलीजेंस ब्यूरो के डायरेक्टर पद से रिटायर हो गए।
इसके बाद साल 2009 में अजीत डोभाल विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन के फाउंडर प्रेसिडेंट बने, इस दौरान न्यूज पेपर में लेख भी लिखते रहे।

ऑपरेशन ब्लैक थंडर’ का किया था नेतृत्व

साल 1989 में अजीत डोभाल ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर से चरमपंथियों को निकालने के लिए ‘ऑपरेशन ब्लैक थंडर’ का नेतृत्व किया था।
उन्होंने पंजाब पुलिस और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के साथ मिलकर खुफिया ब्यूरो के अधिकारियों के दल के साथ मुख्य भूमिका निभाई थी।

जम्मू-कश्मीर में घुसपैठियों और शांति के पक्षधर लोगों के बीच काम करते हुए डोभाल ने कई आतंकियों को सरेंडर कराया था।
अजीत डोभाल 33 साल तक नार्थ-ईस्ट, जम्मू-कश्मीर और पंजाब में खुफिया जासूस रहे हैं, जहां उन्होंने कई अहम ऑपरेशन किए हैं।

30 मई, 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अजीत डोभाल को देश के 5वें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में नियुक्त किया।
ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान उन्होंने एक जासूस की भूमिका निभाई और भारतीय सुरक्षा बलों के लिए महत्वपूर्ण खुफिया जानकारी उपलब्ध कराई, जिसकी मदद से सैन्य ऑपरेशन सफल हो सका। पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान वह सबसे ज्यादा चर्चा में आए।

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