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किसानों की धैर्य की परीक्षा न लें, कृषि कानून पर पुनर्विचार करे सरकार: शरद पवार

पूर्व कृषि मंत्री शरद पवार ने मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि, इन कानूनों को बिना चर्चा के पारित किया गया था। सभी ने सरकार से कहा था कि वे इस पर चर्चा करें, लेकिन विपक्ष की बात को दरकिनार कर दिया गया।

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NewstrackBy Newstrack

Published on 11 Dec 2020 12:17 PM GMT

किसानों की धैर्य की परीक्षा न लें, कृषि कानून पर पुनर्विचार करे सरकार: शरद पवार
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कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने कहा है कि उन्हें दुख है कि किसान सिर्फ कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग करते हैं, जबकि इसके फायदों पर चर्चा भी नहीं करते हैं।
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नई दिल्ली: केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आन्दोलन आज 16वें दिन भी जारी है। अब तक सरकार और किसान नेताओं के बीच की बातचीत बेनतीजा रही है।

किसान अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं। विपक्ष किसानों की मांगों को जायज ठहराते हुए उनके साथ खड़ा हो गया है। वह सरकार पर हमला बोलने के साथ ही नसीहत भी दे रहा है।

इसी कड़ी में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) प्रमुख और पूर्व कृषि मंत्री शरद पवार का ताजा बयान सामने आया है। जिसमें उन्होंने कहा है कि सरकार को कृषि कानूनों पर पुनर्विचार करने की जरूरत है।

farmer किसान आन्दोलन(फोटो:सोशल मीडिया)

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किसानों की मांगें पूरी नहीं हुई तो देश के बाकी राज्यों में भी शुरू हो सकता है आन्दोलन

पूर्व कृषि मंत्री ने मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि, इन कानूनों को बिना चर्चा के पारित किया गया था, सभी ने सरकार से कहा था कि वे इस पर चर्चा करें, लेकिन विपक्ष की बात को दरकिनार करते हुए सरकार ने कृषि कानूनों को संसद से जल्दबाजी में पारित किया।

शरद पवार ने कहा कि ऐसा मत सोचो कि अब केंद्र सरकार किसानों की मांग को सुनने के मूड में नहीं है, इसलिए यह आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।

अभी यह आंदोलन दिल्ली सीमाओं तक सीमित है। यदि सही समय पर निर्णय नहीं लिया गया तो यह आंदोलन अन्य जगहों पर भी फैल जाएगा। मैं अनुरोध करता हूं कि किसानों के धैर्य की परीक्षा न लें।

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Farmer किसान आंदोलन (फोटो: सोशल मीडिया)

कृषि मंत्री ने की आंदोलन खत्म करने की अपील

आज 16वें दिन कृषि कानूनों के विरोध में आन्दोलन कर रहे किसानों से देश के केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने एक बार फिर से आन्दोलन समाप्त करने की अपील की है।

उन्होंने कहा कि हम किसानों की समस्याओं पर विचार कर रहे हैं। हमने किसानों से पूछा कि एपीएमसी को सुदृढ़ बनाने के लिए क्या करना चाहिए, इस पर किसानों ने कोई जवाब नहीं दिया, वह चुप हो गए।

राज्य सरकारों को अधिकार है कि वह प्राइवेट मंडियों के रजिस्ट्रेशन और टैक्स पर फैसला ले सकती हैं। हम एसडीएम कोर्ट की जगह न्यायिक कोर्ट के रास्ते खोलने पर विचार कर सकते हैं।

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने कहा कि हमने किसानों को जो सुझाव भेजे हैं, उसमें एपीएमसी मंडी के बाहर प्राइवेट मंडियों के रजिस्ट्रेशन को लेकर किसानों के डर को दूर किया गया है।

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