श्रमिकों के लिए नया कानून: बदल देगा मजदूरों की परिभाषा, मिलेंगी ये सुविधाएं

भारत सरकार प्रवासी मजदूरों पर इस साल के अंत तक कानून बनाने जा रही है। ये कानून कर्मचारी राज्य बीमा निगम के तहत प्रवासी मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य लाभ पहुंचाने के मद्देनजर बनाया जाएगा।

नई दिल्ली: कोरोना वायरस को रोकने के लिए लागू लॉकडाउन में सबसे ज्यादा कोई चर्चा में रहा, तो वे हैं प्रवासी मजदूर। घर वापसी के लिए उनके संघर्ष की हर रोज एक नई कहानी बयां हो रही है। वहीं, इन सब के बीच प्रवासी मजदूरों को दोबारा परिभाषित किया जा रहा है। इसके लिए सरकार ने तैयारी भी कर ली है।

प्रवासी मजदूरों पर इस साल के अंत तक कानून

दरअसल, भारत सरकार प्रवासी मजदूरों पर इस साल के अंत तक कानून बनाने जा रही है। ये कानून कर्मचारी राज्य बीमा निगम के तहत प्रवासी मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य लाभ पहुंचाने के मद्देनजर बनाया जाएगा।

 श्रम मंत्रालय केंद्रीय मंत्रिमंडल में पेश करेगा श्रमिकों पर अपडेटेड कानून

इसके तहत श्रम मंत्रालय लाखों श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा पर एक अपडेटेड कानून केंद्रीय मंत्रिमंडल में लेकर जाएगा। इस बारे में श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि प्रवासी मजदूरों के हित के लिए कानूनी ढांचे को मजबूत किया जायेगा।

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मजदूरों के रोजगार का रिकॉर्ड तक नहीं सरकार के पास

बता दें कि कोरोना संकट के बीच प्रवासी मजदूरों की स्थिति पर त्रुटिपूर्ण मामले सामने आये, जिसमें सरकार को ज्ञात हुआ कि मजदूरों के रोजगार का रिकॉर्ड तक सरकार के पास नहीं है। ऐसे में मजदूरों के पलायन, उनके रोजगार को लेकर काफी समस्या सामने आ रही है। इन्ही त्रुटियों को ठीक करने के लिए 41 साल पुराने कानून में सरकार बदलाव लाएगी।

एक बार घर जाने का किराए की होगी व्यवस्था

नया कानून व्यक्तिगत प्रवासी मजदूरों पर लागू होगा। जिसमें ये व्यवस्था की जायेगी कि पूरे देश के श्रमिकों को पोर्टेबिलिटी का लाभ मिले। वहीं हर साल उन्हें एक बार घर जाने का किराया दिया जाए।

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पेंशन व स्वास्थ्य सेवा पंजीकरण पर भी काम

श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा, जिसमें पेंशन व स्वास्थ्य सेवा पंजीकरण शामिल है, पर भी केंद्र काम करेगा। इसके अलावा श्रमिकों का आधार-लिंक्ड राष्ट्रीय डेटाबेस बनाये जाने की योजना है, जिससे उनकी जानकारी सेफ रहे और केंद्र व राज्य सरकारें इसका एक्सेस कर सकें।

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