चीन में नया वायरस: कोरोना से भी ज्यादा खतरनाक, लक्षण पता करना बहुत मुश्किल

एसिम्टोमैटिक कोरोना का मरीज कोविड-19 के आम मरीज से ज़्यादा खतरनाक होता है क्योंकि कम से कम उनमें कोरोना के लक्षण नजर आते हैं। दुनियाभर में कोरोना के जो मामले अब तक सामने आए हैं वो सिम्टोमैटिक केसेज थे यानी वो कोरोना से संक्रमित भी थे और उनमें इसके लक्षण भी साफ तौर पर दिखाई दे रहे थे इसलिए उनको पहचानना भी आसान था।

नई दिल्ली: दुनिया में करीब 70 हजार लोगों की जान ले चुके और 13 लाख लोगों को बीमार बना चुके कोरोना के खौफ से अभी दुनिया कांप ही रही है कि एक और नए कोरोना ने दस्तक दे दी है। ये नया कोरोना भी चीन के उसी हुबेई प्रांत से आया है जहां से पुराना कोरोना निकला था। जानकारों की मानें तो ये नया कोरोना पुराने कोरोना से भी कहीं ज्यादा खतरनाक है क्योंकि इस नए कोरोना का कोई लक्षण ही नहीं है। यानी इसके शिकार शख्स को पता ही नहीं चलेगा कि वो संक्रमित है या नहीं?

नई शक्ल में कोरोना उसी चीन में दोबारा लौट

अभी तक सर्दी, खांसी, गला खराब, बुखार सांस लेने में तकलीफ को ही कोरोना के लक्षण बताए गए हैं और अभी इस कोरोना से पूरी दुनिया जूझ ही रही है कि दुनिया को डराने के लिए नई शक्ल में   उसी चीन में दोबारा लौट आया है जहां से पहला कोरोना फैला था, मगर इस बार ज्यादा खतरनाक तरीके से। इस नए कोरोना के संक्रमण का कोई लक्षण ही नहीं है इसीलिए इसे एसिम्टोमैटिक केस कहा जा रहा है।

एसिम्टोमैटिक केस का मतलब है कि कोई कोरोना से संक्रमित तो हो मगर उसमें इस बीमारी के कोई लक्षण नज़र ही ना आएं। मतलब इसकी जानकारी ना तो खुद उस शख्स को होगी और ना ही बिना टेस्ट के कोई डॉक्टर इसका पता लगा पाएगा। सिर्फ टेम्प्रेचर चेक करने वाली मशीन तो इस संक्रमित मरीजों को पकड़ तक नहीं पाएगी।

एसिम्टोमैटिक कोरोना का मरीज कोविड-19 के आम मरीज से ज़्यादा खतरनाक होता है क्योंकि कम से कम उनमें कोरोना के लक्षण नजर आते हैं। दुनियाभर में कोरोना के जो मामले अब तक सामने आए हैं वो सिम्टोमैटिक केसेज थे यानी वो कोरोना से संक्रमित भी थे और उनमें इसके लक्षण भी साफ तौर पर दिखाई दे रहे थे इसलिए उनको पहचानना भी आसान था। वो खुद भी इस बात का ख्याल रखते थे कि उनकी वजह से ये संक्रमण किसी और में ना फैले मगर कोरोना के एसिम्टोमैटिक मामले सामने आने की वजह से ये खतरा ना सिर्फ चीनी अथॉरिटी और वहां के लोगों के लिए बहुत बड़ा हो गया है बल्कि पूरी दुनिया के लिए भी एक बड़ी चुनौती होगी।

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कोरोना का ‘नए खतरे’ से कैसे निपटे दुनिया?

पहला इलाज- सरकारें लॉकडाउन को खत्म करने में जल्दी ना करें। पहले तसल्ली कर लें कि कोरोना के नए मामलों में कमी आ गई है और फिर उसका ऑब्जर्वेशन करने के बाद ही लॉकडाउन खोलें।

दूसरा इलाज- कोरोना से ठीक हुए मरीजों को फौरन समाज में जाने की इजाज़त ना हो और हर दूसरे दिन उनकी जांच की जाए ताकि वो कोरोना के एसिम्टोमैटिक के शिकार ना हो जाएं।

चीनी सरकार का लॉकडाउन हटाना पड़ा महंगा

हुबेई में लॉकडाउन हटाने और जिंदगी सामान्य करने की चीनी सरकार की कोशिश उल्टी पड़ गई और यहां अचानक कोरोना के 1541 एसिम्टोमैटिक मामले सामने आ गए हैं। यानी चीन में लॉकडाउन की मियाद पूरी करने के बाद भी जो नए मामले सामने आ रहे हैं वो ना सिर्फ पहले से भी ज़्यादा खतरनाक और जानलेवा हैं बल्कि इसमें नए पीड़ित मरीजों का पता लगाना कहीं ज्यादा मुश्किल है।

अब सवाल ये है कि आखिर इस नए कोरोना की वापसी कैसे हुई? जबकि पुराना कोरोना अब भी मौजूद है और उससे भी बड़ा सवाल ये कि इस नए कोरोना की शुरुआत भी चीन के उसी हुबेई प्रांत से ही क्यों हुई, जहां से कोरोना का जन्म हुआ था?

चीन को लगा कि हुबेई से अब ये बीमारी खत्म हो चुकी है

दरअसल हुआ ये कि लॉकडाउन के बाद चीन के हुबेई में कोरोना का ये ग्राफ बहुत तेजी से नीचे गिरा। मार्च के महीने में तो यहां कोरोना के सिर्फ इक्के-दुक्के मामले ही सामने आए। इसलिए चीन को लगा कि हुबेई से अब ये बीमारी खत्म हो चुकी है और चूंकि कोई नए मामले सामने नहीं आ रहे थे लिहाजा चीनी सरकार ने हुबेई से लॉकडाउन को हटाना सही समझा। ये इसलिए था ताकि वहां ठप पड़ी उनकी इकोनॉमी दोबारा से चल सके लेकिन यह मामला उल्टा पड़ गया।

दरअसल चीनी सरकार को लगा कि 2 महीने का लॉकडाउन काफी था और उन्होंने अब सब कुछ कंट्रोल कर लिया है। कोरोना अब काबू में है। चीन ने तो यहां तक कह दिया कि 8 अप्रैल को वुहान से भी ये लॉकडाउन हटा लिया जाएगा और वुहान में भी पब्लिक ट्रांसपोर्ट को शुरू करने की कोशिश की जाने लगी।

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डोमेस्टिक और इंटरनेशनल फ्लाइट को दोबारा शुरू करा दिया

दरअसल ज़्यादातर मामलों में हुआ ये कि चीन ने जब हुबेई प्रांत से लॉकडाउन हटाया तो उसने यहां से उड़ान भरने वाली डोमेस्टिक और इंटरनेशनल फ्लाइट को दोबारा शुरू करा दिया। इसका ये मतलब था कि चीन के जो नागरिक दूसरे देशों में फंसे हुए थे और वहां वो कोरोना के शिकार हुए मगर ठीक होने के बाद जब उन्होंने दोबारा अपने मुल्क का रुख किया तब वो इस बात से अनजान थे कि वो इस बार कोरोना एसिम्टोमैटिक के शिकार हो चुके हैं।

हालांकि सारे लोगों को ये बीमारी नहीं थी मगर फिर भी जिन्हें थी वो चीन के लिए खतरा पैदा कर चुके थे। चीन से यहीं गलती हो गई। उसे अंदाज़ा भी नहीं लगा कि जिन लोगों को वो दोबारा अपने मुल्क में आने की इजाजत दे रहा है वो इससे कहीं ज्यादा खतरनाक रूप में कोरोना को वापस उसके मुल्क में ला रहे हैं।

एसिम्टोमैटिक कोरोना के अनजाने में शिकार हो गए

इसके अलावा जिन लोगों को चीन के अस्पतालों ने ठीक किया और जो इस दौरान मुल्क में ही रहे वो भी इस एसिम्टोमैटिक कोरोना के अनजाने में शिकार हो गए मगर ये मामला तब खुला जब हुबेई में लॉकडाउन हटाया गया। इस लॉकडाउन के हटने के बाद ही हुबेई में एसिम्टोमैटिक कोरोना के 1541 मामले सामने आए हैं।। वहीं उनके संपर्क में आए लोग भी कोरोना पॉजिटिव पाए जाने लगे।

इसके साथ ही ये साफ हो गया कि ये वायरस इतनी आसानी से हमारा पीछा छोड़ने वाला नहीं है। अभी तो कई देशों में पहले फेज का कोरोना ही अपने चरम पर नहीं पहुंचा है। महामारी विज्ञान के विशेषज्ञ एंटोनी फ्लैहॉल्ट का मानना है कि ये तो अभी कोरोना का पहला ही चरण है। अभी इसके और फेज बाकी हैं। एक तरफ जहां दुनिया अभी कोरोना के पहले फेज से गुजर रही है वहीं चीन में इसका दूसरा चरण शुरू हो चुका है।

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कोरोना का एक चरण में खत्म होना बचाव के तरीकों पर निर्भर करेगा

हालांकि महामारी विज्ञान के विशेषज्ञ एंटोनी फ्लैहॉल्ट के मुताबिक कोरोना एक चरण में भी खत्म हो सकता है मगर ये बचाव के तरीकों जैसे क्वारनटीन और मौसम पर निर्भर करेगा लेकिन कोरोना के केसेज़ सामने ना आने का मतलब ये कतई नहीं होगा कि ये महामारी खत्म हो गई। ये सिर्फ अल्पविराम जैसा होगा, जैसा चीन और उसके पड़ोसी देशों में हो रहा है।

इस महामारी के कई चरण में फैलने की आशंका इसलिए भी है क्योंकि इससे बचाव के लिए उठाए गए कदम अस्थाई होते हैं औऱ दोबारा ढील मिलते ही ये महामारी फिर से फैलना शुरू हो जाती है। ये तब तक फैलती है जब ये थर्ड इम्यूनिटी तक ना पहुंच जाए। कई बार इसमें कुछ महीने लगते हैं तो कई बार साल भी लग जाते हैं।