छात्रों से बोले PM मोदी, समय की चोरी करता है फोन, दी ये बड़ी सलाह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित ‘परीक्षा पर चर्चा 2020’ में स्कूली छात्रों के सभी सवालों का जवाब दिया। पीएम मोदी ने कहा कि छात्रों को परीक्षा से बिल्कुल नहीं डरना चाहिये

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित ‘परीक्षा पर चर्चा 2020’ में स्कूली छात्रों के सभी सवालों का जवाब दिया। पीएम मोदी ने कहा कि छात्रों को परीक्षा से बिल्कुल नहीं डरना चाहिये, खासकर नाकाम होने का डर तो कतई अपने मन में नहीं आने देना चाहिये।

समय के सदुपयोग से जुड़े एक अन्य सवाल के जवाब में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि फोन समय को बर्बाद करता है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट फोन आपका जितना समय चोरी करता है, उसमें से 10 प्रतिशत कम करके आप अपने मां, बाप, दादा, दादी के साथ बिताएं। तकनीक हमें खींचकर अपने पास ले जाए, इससे हमें बचना चाहिए।

पीएम मोदी ने कहा कि हमारे अंदर यह भावना होनी चाहिए कि मैं तकनीक को अपनी मर्जी से इस्तेमाल करूंगा। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी को दोस्त समझिए, गुलाम मत बनिए और इसके अलावा कुछ टिप्स भी दिए।

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-पीएम मोदी ने कहा नई पीढ़ी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल सही करती है, लेकिन अपनी मातृभाषा की डिक्शनरी को फोन में रखें और रोजाना कुछ वर्ड सीखें।

-प्रधानमंत्री ने बताया कि आज के समय में सोशल नेटवर्किंग सिर्फ फोन में आ गई है, पहले दोस्त को जन्मदिन विश करते हैं, लेकिन अब रात को ही मैसेज किया जाता है। हमें तय करना होगा कि रोजाना कुछ समय के लिए टेक्नोलॉजी फ्री रहना है। कुछ समय अपनों के साथ बिताना जरूरी हैं।

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-घर में एक कमरा ऐसा होना चाहिए जिसमें टेक्नोलॉजी को नो एंट्री हो, उस कमरे में जो भी आएगा बिना टेक्नोलॉजी आएगा।

-स्मार्टफोन से समय निकालकर अपने बड़े-बुजुर्ग से मिलें और उनसे बातचीत करें। अपने लिए दिन में कम से कम 1 या दो घंटे ऐसा रखें, जिसमें आप खुद को टेक्नोलॉजी से दूर रखें और अपने परिवार से मिले, उनसे बातचीत करें।

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प्रधानमंत्री मोदी ने छात्रों से भविष्य में देश और समाज में खुद को नेतृत्व करने की भूमिका के लिये अभी से तैयार करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि आज की किशोर पीढ़ी 2047 में आजादी के सौ साल पूरे होने पर देश में नेतृत्व की भूमिका में होंगे। जब देश आजादी के सौ साल मनायेगा तब अगर आपको टूटी फूटी व्यवस्था मिले तो क्या आप नेतृत्व की जिम्मेदारी का निर्वाह कर पायेंगे, शायद नहीं।