मोदी-शाह की जोड़ी तिकड़ी में हुई तब्दील, नड्डा चुने गए बीजेपी अध्यक्ष

बेहद सरल, सहज, सौम्य और शालीन स्वभाव के नड्डा एक बेहतरीन रणनीतिकार हैं। इनकी यही खूबी इन्हें बीजेपी का अध्यक्ष बनाने पर मजबूर करती है। इनके प्रधानमन्त्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से अच्छे रिश्ते हैं। साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के भी पसंदीदा लोगों में से एक हैं। बीजेपी पार्टी के संविधान के नियम ‘एक व्यक्ति एक पद’ के अनुसार इन्हें अध्यक्ष चुना गया है।

शाश्वत मिश्रा

लखनऊ: ”मैंने अपने करियर में किसी पोस्ट के लिए हाथ-पैर नहीं मारे। जो भी काम मेरे वरिष्ठ नेताओं ने मुझे दिया, मैंने पूरी लगन के साथ किया। मैं अपने प्रचार में भी विश्वास नहीं करता।” यह कथन है देश और दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी यानि भारतीय जनता पार्टी(बीजेपी) के चुने गए नए अध्यक्ष जे.पी. नड्डा का।

बीजेपी पार्टी का संविधान यह कहता

बेहद सरल, सहज, सौम्य और शालीन स्वभाव के नड्डा एक बेहतरीन रणनीतिकार हैं। इनकी यही खूबी इन्हें बीजेपी का अध्यक्ष बनाने पर मजबूर करती है। इनके प्रधानमन्त्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से अच्छे रिश्ते हैं। साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के भी पसंदीदा लोगों में से एक हैं। बीजेपी पार्टी के संविधान के नियम ‘एक व्यक्ति एक पद’ के अनुसार इन्हें अध्यक्ष चुना गया है।

वैसे नड्डा के अध्यक्ष बनने की सुगबुगाहट तभी से तेज हो गयी थी। जब 2019 लोकसभा चुनाव में जीत के बाद इन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली थी। क्योंकि इससे पहले 2014 में जीत के बाद नड्डा को कैबिनेट पुनर्गठन के दौरान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की जिम्मेदारी दी गयी थी। लेकिन इसके बाद जुलाई 2019 में इन्हें बीजेपी का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया।

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जेपी आंदोलन से निकले हैं नड्डा-

जे.पी. नड्डा का पूरा नाम जगत प्रकाश नड्डा है। मूलतः हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में झूंडता तहसील के विजयपुर गाँव के रहने वाले जेपी नड्डा, यहाँ के ब्राहाण परिवार से ताल्लुक रखते हैं। लेकिन इनका जन्म बिहार की राजधानी पटना में 2 दिसम्बर 1960 को हुआ था। इनके पिता का नाम डॉ। नारायण लाल नड्डा और माता का नाम स्व। कृष्णा नड्डा है।

शुरूआती पढाई इनकी सेंट जेवियर स्कूल से हुई। जिसके बाद बीए की पढ़ाई इन्होंने पटना विश्वविद्यालय से पूरी की। इसी बीच इनके अंदर राजनीति पनपने लगी और ये जुड़ गए जेपी आंदोलन से। लगभग 16 बरस में जय प्रकाश नारायण आंदोलन से जुड़ने के बाद इनके खून में राजनीति बहने लगी और ये राजनीति की कक्षा में ककहरा सीखने लगे।

इसके बाद 1982 में इन्हें विद्यार्थी परिषद् का प्रचारक बनाकर हिमाचल भेजा गया। जहाँ ये शिमला यूनिवर्सिटी में एलएलबी की पढ़ाई करने लगे। पढ़ाई के दौरान 1983-84 में ये ”अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद्” के पहले अध्यक्ष बने। ये एबीवीपी की राज्य में पहली जीत थी। जो नड्डा के न्रेतत्व में वामपंथी छात्र संगठन ”स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ़ इंडिया” की हार पर मिली थी। इस जीत के साथ ही शुरू हुआ जे।पी। नड्डा का राजनीतिक सफर। जिसके बाद नड्डा ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 11 दिसम्बर 1991 को इनकी शादी डॉ। मल्लिका नड्डा से हुई। जिनसे इनके दो पुत्र हरीश व गिरीश हैं।

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नड्डा का राजनीतिक तांगा-

-1977-1990 तक करीब 13 साल तक एबीवीपी समेत कई पदों पर रहे।

-1989 में तत्कालीन सरकार के भ्रस्टाचार के खिलाफ ”राष्ट्रीय संघर्ष मोर्चा” बनाकर लड़ाई लड़ी।

-1991 में करीब 31 साल की उम्र में भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने।

-1993 में हिमाचल प्रदेश में पहली बार विधायक बने।

-1994-98 तक हिमाचल प्रदेश विधानसभा पार्टी के नेता रहे।

-1998 में ही उन्हें स्वास्थ्य और संसदीय मामलों का मंत्री बनाया गया।

-2007 में उन्होंने एक बार फिर जीत हासिल की। इस बार उन्हें वन पर्यावरण मंत्री बनाया गया।

-2010 में उन्हें बीजेपी का राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया।

-2012 में नड्डा का करियर ग्राफ एक बार फिर चढ़ा और वे राज्यसभा में आ गए। इस दौरान वो तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गड़करी की टीम में राष्ट्रीय महासचिव और प्रवक्ता रहे।

-2014 में उन्हें बीजेपी संसदीय समिति का सचिव नियुक्त किया गया।

-2014 में कैबिनेट पुनर्गठन के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने उन्हें केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री बनाया।

2019 लोकसभा चुनाव में उत्तर-प्रदेश का प्रभारी नियुक्त किया गया। जहाँ सपा-बसपा गठबंधन के बावजूद वो पार्टी को 62 सीटें दिलाने में सफल रहे। इस चुनाव में बीजेपी को 49.6 फीसदी वोट मिले।

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गज़ब की संगठनात्मक शक्ति-

जेपी नड्डा एक अच्छे रणनीतिकार तो हैं ही, साथ ही साथ वो एक बेहतरीन अगुवा भी हैं और ऐसा उन्होंने साबित भी किया है। हिमाचल प्रदेश में प्रचंड बहुमत की जीत के बाद जब सब उन्हें मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे उस वक़्त उन्होंने जयराम ठाकुर को आगे कर दिया। वो जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, केरल, राजस्थान, महाराष्ट्र और उत्तर-प्रदेश के पार्टी प्रभारी व चुनाव प्रभारी रहे।

मोदी के साथ रहते थे-

जगत प्रकाश नड्डा के प्रधानमन्त्री मोदी से रिश्ते जगजाहिर हैं। दोनों का तालमेल गज़ब का है। लेकिन बहुत ही कम लोगों को ये बात पता होगी कि प्रधानमन्त्री मोदी और नड्डा के रिश्ते उस दौर से हैं जब मोदी खुद हिमाचल प्रदेश के प्रभारी थे। उस वक़्त से दोनों का समीकरण बना हुआ है। ऐसा भी कहा जाता है कि मोदी और नड्डा एक ही साथ रहते थे। इन्हें रहने के लिए अशोक मार्ग स्थित पार्टी कार्यालय का आउट हाउस मिला था।

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पश्चिम बंगाल चुनाव बड़ी चुनौती-

जेपी नड्डा के बीजेपी अध्यक्ष बनने के बाद सबसे बड़ी चुनौती पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस को हराना होगा। जिसके लिए पार्टी को अभी से तैयारी शुरू करना पड़ेगा।