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राष्ट्रपति कोविंद बोले, लोकतंत्र में सत्ता और विपक्ष दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित किया। राष्ट्रपति के अपने संबोधन में कहा कि किसी भी उद्देश्य के लिए संघर्ष करने वाले लोगों को गांधी जी के अहिंसा के मंत्र को सदैव याद रखना चाहिए।

Dharmendra kumar

Dharmendra kumarBy Dharmendra kumar

Published on 25 Jan 2020 2:59 PM GMT

राष्ट्रपति कोविंद बोले, लोकतंत्र में सत्ता और विपक्ष दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण
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नई दिल्ली: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित किया। राष्ट्रपति के अपने संबोधन में कहा कि किसी भी उद्देश्य के लिए संघर्ष करने वाले लोगों को गांधी जी के अहिंसा के मंत्र को सदैव याद रखना चाहिए। राष्ट्रपति का यह सुझाव ऐसे समय में आया है जब संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के विरोध में देश के कई हिस्सों में हिंसक प्रदर्शन देखने को मिले हैं।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि 71वें गणतंत्रदिवस की पूर्व संध्या पर, मैं देश और विदेश में बसे, भारतीयों को, हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। हमारे संविधान ने हम सब को एक स्वाधीन लोकतंत्र के नागरिक के रूप में कुछ अधिकार प्रदान किए हैं, लेकिन संविधान के अंतर्गत ही, हम सब ने यह ज़िम्मेदारी भी ली है कि हम न्याय, स्वतंत्रता और समानता तथा भाईचारे के मूलभूत लोकतांत्रिक आदर्शों के प्रति सदैव प्रतिबद्ध रहें।

राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्र-निर्माण के लिए, महात्मा गांधी के विचार आज भी पूरी तरह से प्रासंगिक हैं। सत्य और अहिंसा का उनका संदेश हमारे आज के समय में और भी अधिक आवश्यक हो गया है। किसी भी उद्देश्य के लिए संघर्ष करने वाले लोगों, विशेष रूप से युवाओं को, गांधीजी के अहिंसा के मंत्र को सदैव याद रखना चाहिए, जो कि मानवता को उनका अमूल्य उपहार है।

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राष्ट्रपति ने देश के विकास के लिए सत्ता-विपक्ष के साथ आने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतन्त्र में सत्ता और प्रतिपक्ष दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। राजनीतिक विचारों की अभिव्यक्ति के साथ-साथ, देश के समग्र विकास और सभी देशवासियों के कल्याण के लिए दोनों को मिलजुलकर आगे बढ़ना चाहिए। विकास पथ पर आगे बढ़ते हुए, हमारा देश और हम सभी देशवासी, विश्व-समुदाय के साथ सहयोग करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि हमारा और पूरी मानवता का भविष्य सुरक्षित रहे और समृद्धिशाली बने।

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उन्होंने कहा कि इस शताब्दी में जन्मे युवा, बढ़-चढ़ कर, राष्ट्रीय विचार-प्रवाह में अपनी भागीदारी निभा रहे हैं। हमारी अगली पीढ़ी हमारे देश के आधारभूत मूल्यों में गहरी आस्था रखती है। हमारे युवाओं के लिए राष्ट्र सदैव सर्वोपरि रहता है। मुझे, इन युवाओं में, एक उभरते हुए नए भारत की झलक दिखाई देती है।

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राष्ट्रपति ने अधिकार के साथ जिम्मेदारियों की भी यादल दिलाई। उन्होंने कहा कि हमारे संविधान ने हम सब को एक स्वाधीन लोकतंत्र के नागरिक के रूप में कुछ अधिकार दिए हैं। लेकिन संविधान के अंतर्गत ही, हम सब ने यह ज़िम्मेदारी भी ली है कि हम न्याय, स्वतंत्रता और समानता तथा भाईचारे के मूलभूत लोकतान्त्रिक आदर्शों के प्रति सदैव प्रतिबद्ध रहें।

उन्होंने कहा कि जन-कल्याण के लिए, सरकार ने कई अभियान चलाए हैं। यह बात विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि नागरिकों ने, स्वेच्छा से उन अभियानों को, लोकप्रिय जन-आंदोलनों का रूप दिया है। जनता की भागीदारी के कारण स्वच्छ भारत अभियान ने बहुत ही कम समय में प्रभावशाली सफलता हासिल की है। भागीदारी की यही भावना अन्य क्षेत्रों में किए जा रहे प्रयासों में भी दिखाई देती है-चाहे रसोई गैस की सबसिडी को छोड़ना हो, या फिर डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना हो।

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राष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की उपलब्धियां गर्व करने योग्य हैं। लक्ष्य को पूरा करते हुए, 8 करोड़ लाभार्थियों को इस योजना में शामिल किया जा चुका है। ऐसा होने से, जरूरतमंद लोगों को अब स्वच्छ ईंधन की सुविधा मिल पा रही है। प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना अर्थात सौभाग्य योजना से लोगों के जीवन में नई रोशनी आई है।प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के माध्यम से लगभग 14 करोड़ से अधिक किसान भाई-बहन प्रति वर्ष 6 हजार रुपए की न्यूनतम आय प्राप्त करने के हकदार बने हैं। इससे हमारे अन्नदाताओं को सम्मानपूर्वक जीवन बिताने में सहायता मिल रही है।

यहां क्लिक कर पढ़ें राष्ट्रपति का पूरा भाषण

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