चव्हाण के बयान पर साधु-संतों में आक्रोश, काशी विश्वनाथ मंदिर का कड़ा फैसला

कांग्रेस नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कोरोना संकट में सरकार से धार्मिक ट्रस्टों में रखे सोने को कब्जे में लेने के बयान पर बवाल खड़ा हो गया है। धर्म गुरुओं और साधु संतो में पृथ्वीराज चव्हाण के इस बयान को लेकर आक्रोश है।

नई दिल्ली: कांग्रेस नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कोरोना संकट में सरकार से धार्मिक ट्रस्टों में रखे सोने को कब्जे में लेने के बयान पर बवाल खड़ा हो गया है। धर्म गुरुओं और साधु संतो में पृथ्वीराज चव्हाण के इस बयान को लेकर आक्रोश है।

इस बीच एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक द्वादश ज्योतिर्लिंग में शामिल श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत परिवार ने बड़ा फैसला लिया है। महंत परिवार ने पृथ्वीराज चव्हाण और उनके परिवार का प्रवेश काशी विश्वनाथ मंदिर में प्रवेश पर रोक लगा दिया है। इसके साथ ही देश के अन्य ज्योतिर्लिंग के पुजारियों से गुजारिश की है कि वह ऐसा ही करें। इस मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत ने पृथ्वीराज चव्हाण को मानसिक रूप से विक्षिप्त भी बता डाला है।

काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉक्टर कुलपति तिवारी ने कहा है कि पृथ्वीराज का वक्तव्य सुनकर मैं हतप्रभ हूं। यह कांग्रेस की सरकार थी जब काशी विश्वनाथ मंदिर में चोरी कराकर इन लोगों ने अधिग्रहण करा लिया।

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डॉक्टर कुलपति तिवारी ने कहा कि 1983 में काशी विश्वनाथ मंदिर में हुई चोरी में कांग्रेस की मुख्य भूमिका रही। उन्होंने कहा कि पृथ्वीराज चव्हाण अवसाद ग्रस्त हैं, वे मानसिक संतुलन खो चुके हैं या पूर्वाग्रह से ग्रसित हैं। मंदिर में भक्तों के चढ़ाए हुए दान, पुण्य और फल सरकार नहीं लेती है।

कुलपति तिवारी ने कहा कि पृथ्वीराज चव्हाण केवल मंदिरों पर ही क्यों बोल रहे हैं. क्या वह चर्च, गुरुद्वारा और मस्जिदों पर बोल सकते हैं? क्योंकि यह वोट बैंक की राजनीति करते हैं और ये बीजेपी की सरकार को बदनाम करने में लगे हुए हैं. इसकी मैं घोर निंदा करता हूं।

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पृथ्वीराज चव्हाण ने दिया था ये बयान

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने 13 मई को ट्वीट के जरिए सोने को कब्जे में लेना का सुझाव सरकार को दिया था। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार राष्ट्र को आर्थिक संकट से उबारने के लिए देशभर के मंदिर ट्रस्टों के पास पड़ा सोना अपने कब्जे में ले ले जिससे सरकार को लगभग 76 लाख करोड़ रुपये की मदद मिलेगी।

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कांग्रेस नेता ने कहा था कि यह सोना राष्ट्र की संपत्ति है और राष्ट्र के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार को सुझाव दिया कि अगर केंद्र सरकार चाहे, तो 1 या 2% ब्याज पर यह सोना मंदिर ट्रस्टों से लिया जा सकता है। चव्हाण ने अंतरराष्ट्रीय संस्था वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल का हवाला दिया और कहा कि देश के मंदिर ट्रस्टों के पास लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थात 75 लाख करोड़ रुपये मूल्य का सोना पड़ा हुआ है।