सांसत में शिवराज, गद्दी छोड़ लटके हैं दिल्ली में, नहीं बरस रही कृपा

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान दो दिनों से दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। इस दौरान उनकी भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, संगठन महामंत्री बीएल संतोष, ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात हो चुकी है।

अंशुमान तिवारी

भोपाल। मध्यप्रदेश में शिवराज मंत्रिमंडल के विस्तार के पांच दिनों बाद भी नए मंत्रियों में विभागों का बंटवारा नहीं हो सका है। नए मंत्रियों के बीच विभागों को बांटने के लिए दिल्ली में दो दिनों से चल रहे मंथन में भी यह गुत्थी अभी तक नहीं सुलझ सकी है। जानकारों का कहना है कि भाजपा के वरिष्ठ मंत्रियों और ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक मंत्रियों के बीच बड़े विभागों को लेकर खींचतान मची हुई है। इसी कारण नए मंत्रियों को विभागों का बंटवारा नहीं हो पा रहा है।

दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं शिवराज

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान दो दिनों से दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। इस दौरान उनकी भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, संगठन महामंत्री बीएल संतोष, ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात हो चुकी है। सभी नेताओं से उन्होंने नए मंत्रियों के विभागों को लेकर चर्चा की है। अपने दिल्ली दौरे के दूसरे दिन सोमवार को शिवराज सिंह चौहान ने पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे से भी मुलाकात की और उनसे विभागों के मुद्दे पर चर्चा की। शिवराज की केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के साथ भी लंबी बैठक हुई। इन सभी मुलाकातों के बावजूद अभी तक विभागों को लेकर पेच फंसा हुआ है। मंत्रियों के नामों को लेकर भी फंसी गुत्थी भी कई दिनों के विचार विमर्श के बाद सुलझ सकी थी।

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दो बार वापसी का कार्यक्रम बदला

जानकारों का कहना है कि विभागों का बंटवारा न हो पाने के कारण मुख्यमंत्री का भोपाल लौटने का कार्यक्रम दो बार बदल चुका है। अब उनके मंगलवार को भोपाल लौटने की संभावना जताई जा रही है। मध्यप्रदेश में मंत्रियों का नाम भी केंद्रीय नेतृत्व के दखल के बाद ही तय हो सका था। सूत्रों का कहना है कि मंत्रियों के विभागों का बंटवारा भी केंद्रीय नेतृत्व के दखल से ही संभव हो सकेगा।

बड़े विभागों के लिए मची है खींचतान

जानकारों का कहना है कि विभागों के बंटवारे में सबसे बड़ा पेंच बड़े विभागों को लेकर फंसा हुआ है। मुख्यमंत्री का कहना है कि मंत्रियों को उनके कद और अनुभव के हिसाब से विभाग दिया जाएगा जबकि कांग्रेस से भाजपा में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक मंत्री बड़े विभागों के लिए डटे हुए हैं। वे कमलनाथ सरकार में मिले विभागों से कमतर पर राजी नहीं हैं। इसी कारण विभागों का बंटवारा नहीं हो पा रहा है। जानकारों का कहना है कि सिंधिया समर्थक मंत्री लोक निर्माण, राजस्व, नगरीय विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास जैसे बड़े विभागों की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर भाजपा के मंत्री भी अपनी वरिष्ठता के हिसाब से बड़े विभाग मांग रहे हैं।

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अप्रिय स्थिति से बचना चाहते हैं शिवराज

इस बीच मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि वे विभागों के बंटवारे में तालमेल और संतुलन बनाए रखना चाहते हैं ताकि आगे चलकर किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति न पैदा हो। दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि सबकुछ अच्छा हो रहा है। विभागों का बंटवारा भी जल्द ही हो जाएगा।

सियासी जानकारों का कहना है कि मंत्रियों का नाम तय करने में भी शिवराज की ज्यादा नहीं चल सकी थी। वैसे ही विभागों को तय करने में भी वे सक्षम नहीं दिखाई दे रहे हैं। विभागों के बंटवारे का काम पूरा करने के लिए भाजपा के प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे भी सक्रिय हैं। उन्होंने इस सिलसिले में ज्योतिरादित्य सिंधिया से मुलाकात की है। दोनों की मुलाकात को महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। जानकारों के मुताबिक दोनों की भेंट के दौरान प्रदेश में 24 सीटों पर होने वाले उपचुनाव और राज्य की राजनीतिक स्थिति पर चर्चा हुई है।

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