SPG: सरकार ने क्यों लिया गांधी परिवार की सुरक्षा में कटौती का फैसला? यहां जानें

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार ने गांधी परिवार की सुरक्षा में कटौती का निर्णय खतरे का आकलन करने के बाद लिया है। गांधी परिवार को किसी तरह का सीधा खतरा नहीं है।

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने गांधी परिवार को तगड़ा झटका दिया है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक़ सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की एसपीजी सुरक्षा वापस लेने का फैसला किया गया है। इसके बदले में उन्हें जेड प्लस सुरक्षा दी जाएगी।

बता दें कि इन सभी के साथ प्रियंका गांधी और परिवार को सुरक्षा कारणों से मिला लोधी इस्टेट का सरकारी बंगला खाली करना पड़ेगा। SPG होने के कारण के कारण सरकारी बंगला मिला था।

मालूम हो कि पीएम नरेंद्र मोदी के अलावा कांग्रेस की चेयरपर्सन सोनिया गांधी, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी को एसपीजी सुरक्षा दी जाती है।

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सुरक्षा में कटौती के पीछे ये है वजह

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार ने गांधी परिवार की सुरक्षा में कटौती का निर्णय खतरे का आकलन करने के बाद लिया है। गांधी परिवार को किसी तरह का सीधा खतरा नहीं है।

बता दे कि राजीव गांधी की 1991 में हत्या के बाद फैसला किया गया कि पूर्व प्रधानमंत्रियों को भी एसपीजी सुरक्षा दी जाएगी। हालांकि, पूर्व प्रधानमंत्रियों के सुरक्षा इंतजामों की समय-समय पर समीक्षा की जाती है और जरूरत के मुताबिक उसे घटाया या बढ़ाया जाता है।

इसी साल अगस्त में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की एसपीजी सुरक्षा भी हटा ली गई थी। एसपीजी सुरक्षा हटाने के साथ ही प्रियंका गांधी को नोटिस भेजकर उनके बंगले को लेकर भी सवाल पूछा गया था। इस पर उन्होंने कहा था कि उन्हेंब बंगला छोड़ने में कोई दिक्कत नहीं है।

डी. राजा ने उठाये सवाल

सीपीआई महासचिव डी राजा ने केंद्र सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाये है। उनका कहना है कि सरकारें आती जाती रहती हैं, लेकिन लोकतंत्र को जिंदा रहना चाहिए।

गृह मंत्रालय को फैसले लेते समय उसके नफा-नुकसान का ध्यान रखना चाहिए। बीजेपी सत्ता में आने के बाद हर संवैधानिक संस्था और व्यवस्था को कमतर करने की कोशिश कर रही है। इससे बीजेपी की राजनीतिक मंशा स्पष्ट हो रही है।

एसपीजी क्या होता है?

विशेष सुरक्षा दल (एसपीजी) देश की सबसे पेशेवर एवं आधुनिकतम सुरक्षा बलों में से एक है। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है। एसपीजी देश के पीएम के साथ भारत दौरे पर आए अति विशिष्ट अतिथि की सुरक्षा का जिम्मा संभालती है।

इसके अलावा गांधी परिवार को भी ये सुरक्षा दी जाती है। विशेष सुरक्षा दल (स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप –जी) को 02 जून, 1988 में भारत की संसद के एक अधिनियम द्वारा बनाया गया था।

इसके जवानों का चयन पुलिस, पैरामिलिट्री फोर्स (बीएसएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी, सीआरपीएफ) से किया जाता है। एसपीजी को देश की सबसे पेशेवर एवं आधुनिकतम सुरक्षा बलों में एक माना जाता है। जिसकी सुरक्षा को अमेरिकी राष्ट्रपति के बराबर माना जाता है।

क्या होते हैं हथियार

इसके कमांडो ऑटोमेटिक गन एफएनएफ -2000 असॉल्ट राइफल से लैस होते हैं। कमांडोज के पास ग्लोक 17 नाम की एक पिस्टल भी होती है।

ये एक लाइट वेट बुलेटप्रूफ जैकेट पहनते हैं। एसपीजी के जवान हाई ग्रेड बुलेटप्रूफ वेस्ट पहने होते हैं, जो लेवल-3 केवलर की होती है। इसका

वजन 2.2 किग्रा होता है और यह 10 मीटर दूर से एके 47 से चलाई गई 7.62 कैलिबर की गोली को भी झेल सकती है।

खास चीजों से होते हैं लैस

साथी कमांडो से बात करने के लिए कान में लगे ईयर प्लग या फिर वॉकी-टॉकी का सहारा लेते हैं। यहां तक की इनके जूते भी काफी अलग होते हैं। ये किसी भी जमीन पर नहीं फिसलते।

ये खास तरह के दस्ताने पहनते हैं। जिससे चोट से उनका बचाव होता है। ये कमांडोज चश्मा भी पहनते हैं, जो उनकी आखों को हमले से बचाते हैं और किसी भी प्रकार का डिस्ट्रैक्शन नहीं होने देता हैं।

एसपीजी सुरक्षा किसे दी जाती है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा एसपीजी अब गांधी परिवार के सदस्यों की सुरक्षा करती है। ये हर जगह, हर समय सुरक्षा में लगे होते हैं।

हालांकि इसका जिम्मा पूर्व प्रधानमंत्रियों और उनके परिवार को भी सुरक्षा मुहैया कराने का होता है लेकिन इसकी समय सीमा तय है।

आमतौर पर पूर्व प्रधानमंत्री को पांच साल तक ये सुरक्षा प्रदान करती है फिर इसकी समीक्षा की जाती है। हाल ही में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और उनकी परिवार को एसपीजी सुरक्षा खत्म करके उन्हें जेड प्लस सुरक्षा दी गई है।

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कैसे काम करती है एसपीजी

एसपीजी के जवानों को वर्ल्ड क्लास ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है। ये वही ट्रेनिंग है जो युनाइटेड स्टेट सीक्रेट सर्विस एजेंट्स को दी जाती है।

हमले की सूरत में सेकंड कार्डन की जिम्मेदारी होती है कि वह पीएम के चारों ओर घेरा बनाकर खड़े जवानों को सिक्यॉरिटी कवर दें ताकि प्रधानमंत्री को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।

एसपीजी के जवानों के साथ पीएम के काफिले में एक दर्जन गाड़ियां होती हैं, जिसमें बीएमडब्ल्यू 7 सीरीज की सिडान, 6 बीएमडब्ल्यू एक्स3 और एक मर्सिडीज बेंज होती है। इसके अलावा मर्सिडीज बेंज ऐंम्बुलेंस, टाटा सफारी जैमर भी इस काफिले में शामिल होती है।

कैसे हुआ गठन

1981 से पहले भारत के प्रधानमंत्री के आवास पर प्रधानमंत्री की सुरक्षा पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) के प्रभारी दिल्ली पुलिस के विशेष सुरक्षा जिले की जिम्मेदारी हुआ करती थी।

अक्टूबर 1981 में, इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) द्वारा, नई दिल्ली में और नई दिल्ली के बाहर प्रधानमंत्री को सुरक्षा प्रदान करने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स (एसटीएफ) का गठन किया गया।

अक्टूबर 1984 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद तय किया गया कि एक विशेष समूह को प्रधानमंत्री की सुरक्षा का दारोमदार संभालना चाहिए। इसके बाद एसपीजी के गठन की प्रक्रिया शुरू हुई।

18 फरवरी 1985 को गृह मंत्रालय ने बीरबल नाथ समिति की स्थापना की। मार्च 1985 में बीरबल नाथ समिति ने एक स्पेशल प्रोटेक्शन यूनिट (एसपीयू) के गठन के लिए सिफारिश पेश की।

30 मार्च 1985, को भारत के राष्ट्रपति ने कैबिनेट सचिवालय के तहत इस यूनिट के लिए 819 पदों का निर्माण किया। इसे नाम दिया गया स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप।

कौन होता है इसका प्रमुख

एसपीजी के प्रमुख का पद तीन साल के निश्चित कार्यकाल के लिए बनाया गया है। एसपीजी फोर्स कैबिनेट सचिवालय के तहत काम करती है। इसका प्रमुख डायरेक्टर रैंक का आईपीएस अफसर होता है। इसका मुख्यालय पीएम हाउस में ही होता है।

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