जानिए कैसे? 27 साल की इस लड़की ने 4 साल में खड़ी कर दी 1 अरब डॉलर की कंपनी

दक्षिणपूर्व एशिया को फोकस कर शुरू ई कॉमर्स कंपनी ‘जिलिंगो’ महज चार साल में यूनिकॉर्न स्टेट्स पाने के करीब पहुंच गई है। इसे मुंबई की रहने वाली 27 साल की अंकिती बोस ने आईआईटी गुवाहाटी से पास आउट ध्रुव कपूर के साथ शुरू किया।

अंकिती बोस की फ़ाइल फोटो

अंकिती बोस की फ़ाइल फोटो

बेंगलुरु: दक्षिणपूर्व एशिया को फोकस कर शुरू ई कॉमर्स कंपनी ‘जिलिंगो’ महज चार साल में यूनिकॉर्न स्टेट्स पाने के करीब पहुंच गई है। इसे मुंबई की रहने वाली 27 साल की अंकिती बोस ने आईआईटी गुवाहाटी से पास आउट ध्रुव कपूर के साथ 4 साल पहले शुरू किया और कंपनी 970 मिलियन डॉलर की हो गई।

बता दें कि एक अरब डॉलर का बिजनेस करने वाली कंपनी को ही यूनिकॉर्न स्टेट्स मिलता है। जिलिंगो की इस सफलता के साथ ही अंकिती हाई वैल्यू स्टार्टअप शुरू करने वाली ऐसी पहली भारतीय महिला को-फाउंडर और सीईओ बन गई हैं, जिसकी कंपनी यूनिकॉर्न स्टेटस के करीब है।

रिपोर्ट के मुताबिक, एक कंपनी में काम कर रही अंकिति बेंगलुरु स्थित घर में आयोजित एक पार्टी के बीच अपने पड़ोसी दोस्त ध्रुव कपूर से बिजनेस को लेकर बात कर रही थीं।

इसी बीच उन्हें ‘जिलिंगो’ का ख्यला आया। 23 साल की अंकिति और 24 के ध्रव को जल्द ही समझ में आ गया कि दोनों का एंबिशन एक है और स्किल के मामले में भी दोनों आगे हैं।

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नौकरी छोड़ शुरू किया स्टार्टअप
चार महीने के अंदर में ही दोनों ने अपनी-अपनी नौकरी छोड़ दी और दोनों ने अपनी-अपनी सेविंग के 30 हजार डॉलर को जोड़कर ‘जिलिंगो’ की स्थापना की। यह एक ऑनलाइन प्लेफॉर्म है, जिसमें साउथ-ईस्ट एशिया के छोटे व्यापारी अपना स्केल बढ़ा सकते हैं।

इसका हेडक्वॉर्टर फिलहाल सिंगापुर में है और इसकी एक टीम बेंगलुरु से भी काम करती है।20 लोगों से शुरू हुई टीम में करीब 100 लोग हैं।खास बात ये है कि इस स्टार्टअप ने अपनी वैल्यू में से 306 मिलियन डॉलर सिर्फ फंडिग से जुटाए थे।

सिंगापुर में है हेडक्वार्टर
जीलिंगो का हेडक्वॉर्टर फिलहाल सिंगापुर में है और इसकी टेक टीम बेंगलुरु से काम करती है। जहां इसके दूसरे को फाउंडर आईआईटी गुवाहाटी से पढ़े ध्रुव कपूर (24 साल) काम देखते हैं।

उनकी टीम में करीब 100 लोग हैं। अब जीलिंगो भारतीय उद्यमी द्वारा चलाई जा रही सफल कंपनियों से एक बन चुकी है। इस स्टार्टअप ने अपनी वैल्यू में से 306 मिलियन डॉलर सिर्फ फंडिग से जुटाए थे।

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पिचबुक ने जारी किया है डेटा
पिचबुक के डेटा के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर देखें तो यूनिकॉर्न स्टेट्स तक अपनी कंपनी को पहुंचाने वाली महिला फाउंडर की संख्या बहुत ही कम है।यूनिकॉर्न स्टेट्स पाने वाली दुनिया की 239 कंपनियों में इनकी संख्या सिर्फ 23 है। अपनी इस सफलता पर अंकिति का कहना है कि 20 लोगों से शुरू कंपनी ने कभी इसकी उम्मीद नहीं की थी।

सेंट जेवियर से पढ़ी हैं अंकिति
अंकिति मुंबई के सेंट जेवियर कॉलेज से इकॉनमिक्स और मैथमेटिक्स में ग्रेजुएट हैं।वे कहती हैं कि बिजनेस के सिलसिले में अलग-अलग कल्चर के लोगों से बात करना होता है।

इसमें बेंगलुरु के टेकीज से लेकर सिंगापुर के फैशन गुरु और इंडोनेशिया के कंजर्वेटिव मुस्लिम व्यापारी भी शामिल हैं। हालांकि, उन्होंने बिजनेस में काफी मदद की है।

अंकिति ने कहा, महिला उद्यमी के तौर पर शुरुआत करना काफी मुस्किल काम होता है।पिछले साल भारत की रैंकिंग 52वें नंबर पर थी और वह ईरान, सऊदी अरब, अल्जीरिया, मिश्र और बांग्लादेश से ही ऊपर था।

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