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जली दिल्ली और SC का इनकार: कैसे होगी सुनवाई, आखिर किस बात का इंतज़ार

एक ओर दिल्ली रो रही है- जल रही है तो वहीं इन हालातों के बीज जहां से उपजे यानी शाहीन बाग़ से प्रदर्शनकारी महिलाओं को हटाने से जुड़ी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टल गयी।

Shivani Awasthi

Shivani AwasthiBy Shivani Awasthi

Published on 26 Feb 2020 7:59 AM GMT

जली दिल्ली और SC का इनकार: कैसे होगी सुनवाई, आखिर किस बात का इंतज़ार
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दिल्ली: नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ हो रहे हिंसक प्रदर्शन में एक ओर दिल्ली सिसक रही हैं, रो रही है और जल रही है तो वहीं दिल्ली के ऐसे हालातों का बीज जिस जगह से उपजा यानी शाहीन बाग़ से प्रदर्शनकारी महिलाओं को हटाने से जुड़ी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज हुई सुनवाई टल गयी। कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक रोड पर प्रदर्शन नहीं किया जा सकता लेकिन फिलहाल इस मामले में सुनवाई का माहौल नहीं है। मामले की सुनवाई होली के बाद होगी।

शाहीनबाग़ प्रदर्शन पर सुनवाई से किया कोर्ट ने इनकार:

दरअसल, दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में टकराव के बाद भी शाहीन बाग में प्रदर्शन जारी है। यहां बीते 70 दिनों से रास्ता बंद है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक सड़क प्रदर्शन के लिए नहीं है। हालंकि दिल्ली में जो हालत हैं, उसको देखते हुए अभी सुनवाई नहीं की जा सकती।

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बता दें कि कोर्ट ने शाहीनबाग़ में मध्यस्थता को लेकर आदेश दिए थे। जिसके बाद वार्ताकार संजय हेगड़े और साधना रामचंद्रन ने सीलबंद लिफाफे में अपनी रिपोर्ट में दाखिल की। कोर्ट ने कहा कि हमने रिपोर्ट देखी हैं लेकिन अभी मामले की सुनवाई टालते हैं, अभी सुनवाई का सही समय नहीं है। अब इस मामले में अब होली के बाद सुनवाई होगी।

डॉक्टरों के बाद अब प्रदर्शनकारियों ने की सुरक्षा की मांग

वरिष्ठ वकील वजाहत हबीबुल्लाह और भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर ने सुप्रीम कोर्ट में एक और याचिका दाखिल की है। इस याचिका में शाहीन बाग में डटे प्रदर्शनकारियों के लिए पर्याप्त सुरक्षा की मांग की गई है।

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वहीं इससे पहले विभिन्न सरकारी और निजी अस्पतालों के डॉक्टरों की एक संस्था ने पुलिस सुरक्षा के लिए मंगलवार देर रात दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया। संस्था उत्तर पूर्वी दिल्ली के मुस्तफाबाद क्षेत्र में सीएए को लेकर की गई हिंसा में घायल लोगों को चिकित्सा सुविधा प्रदान करना चाहती है। संस्था ने याचिका दाखिल कर यह मांग की थी कि हिंसाग्रस्त इलाकों में डॉक्टरों, मेडिकल कर्मचारियों और एंबुलेंस को पुलिस सुरक्षा दी जाए।

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