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शिवाजी महाराज का UP से भी रहा इस तरह का नाता, बहुत कम लोगों जानते हैं ये बात

शिवाजी का शासन इसलिए और महत्वपूर्ण हो जाता है कि उन्होंने फारसी के स्थान पर मराठी एवं संस्कृत को राजकाज की भाषा बनाया। ऐसे महान सपूत से हर कोई खुद को जोड़ना चाहता है।

Chitra Singh

Chitra SinghBy Chitra Singh

Published on 18 Feb 2021 9:28 AM GMT

शिवाजी महाराज का UP से भी रहा इस तरह का नाता, बहुत कम लोगों जानते हैं ये बात
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रामकृष्ण वाजपेयी

छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती 19 फरवरी को देश भर में बहुत धूमधाम से मनायी जाती है। छत्रपती शिवाजी महाराज का पीरियड 1630-1680 ई. के मध्य का बताया जाता है। वह एक महान राजा एवं रणनीतिकार थे जिन्होंने 1674 में पश्चिम भारत में मराठा साम्राज्य की नींव रखी, उनका राज्याभिषेक हुआ, वह छत्रपति बने। उन्होंने कई वर्षों तक औरंगज़ेब के मुगल साम्राज्य से संघर्ष किया।

अनुशासित सेना एवं सुसंगठित प्रशासनिक

शिवाजी महाराज ने अपनी अनुशासित सेना एवं सुसंगठित प्रशासनिक इकाइयों की सहायता से एक योग्य एवं प्रगतिशील प्रशासन दिया। उन्होंने युद्ध के हथियारों और शैली में अनेक नये प्रयोग किये तथा छापामार युद्ध या युद्ध की गुरिल्ला शैली भी उन्हीं की देन है।

उत्तर प्रदेश की सरजमीं पर रहें शिवाजी

शिवाजी का शासन इसलिए और महत्वपूर्ण हो जाता है कि उन्होंने फारसी के स्थान पर मराठी एवं संस्कृत को राजकाज की भाषा बनाया। ऐसे महान सपूत से हर कोई खुद को जोड़ना चाहता है। उत्तर प्रदेश से उनका क्या कोई नाता रहा इस विषय पर जब छानबीन की तो पता चला उत्तर प्रदेश की सरजमीं पर भी वह कुछ समय रहे। आइए जानते हैं शिवाजी महाराज उत्तर प्रदेश में कब और कैसे रहे।

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छत्रपति शिवाजी महाराज म्यूजियम

ये तो आप लोगों के याद होगा कि पिछले दिनों उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने आगरा के मुगल म्यूजियम का नाम बदल दिया था। जिसकी कुछ लोगों ने आलोचना की थी तो अनेक लोगों ने सराहा भी था। ये छत्रपति शिवाजी महाराज म्यूजियम के नाम से अब जाना जाता है। महत्वपूर्ण बात यह थी कि छत्रपति शिवाजी के वशंज और राज्यसभा सांसद संभाजी छत्रपति ने भी योगी सरकार के इस फैसले की तारीफ की थी। संभाजी छत्रपति ने एक ट्वीट में लिखा था कि वह छत्रपति शिवाजी महाराज का वशंज होने के नाते महाराष्ट्र के लोगों की ओर से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का शुक्रिया अदा करते हैं।

फिदाई हुसैन की हवेली में नजरबंद थे शिवाजी

शायद ही आप लोगों को पता हो कि छत्रपति शिवाजी महाराज आगरा की फिदाई हुसैन की हवेली में नजरबंद रहे थे। कई इतिहासकारों और इतिहास संकलन समिति ने भी कोठी मीना बाजार के फिदाई हुसैन की हवेली होने का दावा किया है। घटना इस प्रकार बतायी जाती है कि शिवाजी महाराज अपने दल के साथ 11 मई, 1666 को आगरा पहुंचे थे। उन्होंने आगरा की सीमा पर स्थित मुलक चंद की सराय पर डेरा डाला। सेवला सराय के पास यह भवन था, जो अब खत्म हो चुका है। उस दिन शिवाजी व औरंगजेब की मुलाकात नहीं हो सकी।

राजा जय सिंह

12 मई को शिवाजी मुगल दरबार में गए, मगर यथोचित सम्मान नहीं मिलने से वो नाराजगी जताकर लौट आए। शिवाजी का शिविर राजा जय सिंह के बेटे कुंवर राम सिंह की छावनी के बगल वाले स्थान पर लगाया गया। जयपुर म्यूजियम में रखे आगरा के मानचित्र के अनुसार राम सिंह की छावनी नगर की सीमा के बाहर वर्तमान कोठी मीना बाजार के निकट थी। यह स्थान आज भी अभिलेखों में कटरा सवाई राजा जय सिंह के नाम दर्ज है।

सिद्धी फौलाद खां की निगरानी में हुए नजरबंद

औरंगजेब द्वारा नाराजगी जताए जाने पर कुंवर राम सिंह की छावनी के निकट के शिविर में 12 मई, 1666 को उन्हें नजरबंद कर सिद्धी फौलाद खां की निगरानी में रखा गया था। 16 मई, 1666 को उन्हें रदन्दाज खां के मकान पर ले जाने का आदेश हुआ। उनकी नजरबंदी को एक हजार सैनिक और तोपों की तैनाती कर दी गई। इस पर कुंवर राम सिंह ने शिवाजी की जिम्मेदारी लेते हुए उनके जमानतनामे पर दस्तखत किए।

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कैसे औरंगजेब की कैद से आजाद हुए शिवाजी

20 मई के राजस्थानी पत्र के अनुसार औरंगजेब ने राम सिंह को शिवाजी को अपने घर से दूर रखने को कहा। इसके बाद शिवाजी को राम सिंह के शिविर के निकट स्थित फिदाई हुसैन की हवेली में रखा गया, जो कि शहर के बाहर टीले पर स्थित थी। शिवाजी को बंदी बनाकर रखने वाली फिदाई हुसैन की हवेली राम सिंह की हवेली के निकट टीले पर थी। उन्हें यहां से जामा मस्जिद के निकट स्थित विट्ठलनाथ की हवेली ले जाने का आदेश हुआ, लेकिन इससे पूर्व वो अपने पुत्र के साथ फलों व मिठाई की टोकरी में बैठकर औरंगजेब की कैद से निकल गए।

Chhatrapati Shivaji Maharaj

कोठी तोड़कर अंगेजों ने बनवाया गवर्नर हाउस

फिदाई हुसैन की हवेली यानी कोठी मीना बाजार के टीले पर बना मकान वर्ष 1803 में अंग्रेजों के कब्जे में आया। पुराने जर्जर मकान को तोड़कर वर्ष 1837 में नई कोठी बनाई गई, जिसे गवर्नर हाउस कहा गया। यहां तत्कालीन अंग्रेज गवर्नर का आवास बना, जो कि 1857 तक अंग्रेजों की संपत्ति रहा।

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कोठी मीना बाजार की नीलामी

1857 में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के समय गर्वनर का आवास सैनिक छावनी में वर्तमान कमिश्नर आवास में स्थानांतरित कर दिया गया। कोठी मीना बाजार की नीलामी हुई और इसे राजा जयकिशन दास ने खरीदा। यह संपत्ति आज भी उन्हीं के नाम दर्ज है।

खाफी खां की मुन्तखब-उल-लुबाब किताब

औरंगजेब के दरबारी खाफी खां ने अपनी किताब मुन्तखब-उल-लुबाब में शिवाजी को राजा जयसिंह की हवेली के पास नगर से बाहर एक मकान में ठहराने का जिक्र किया है। इलियट और डाउसन ने इसका संपादन भारत का इतिहास पुस्तक में किया है। लेखक राधेश्याम की किताब'औरंगजेब में शिवाजी को फिदाई हुसैन के निवास पर रखे जाने का उल्लेख किया है।

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