शुरू हो गई ट्रेनिंग: मिशन में आई जबरदस्त तेजी, रूस में की जा रही हैं तैयारियां

महामारी कोरोना वायरस के कारण रूका हुआ गगनयान मिशन फिर से शुरू हो गया है। रूस की स्पेस कंपनी ग्लवकॉसमॉस ने कहा कि इंडियन एयरफोर्स का पायलटों को जीसीटीसी के ट्रेनर सही ट्रेनिंग दे रहे हैं।

शुरू हो गई ट्रेनिंग: मिशन में आई जबरदस्त तेजी, रूस में की जा रही हैं तैयारियां

नई दिल्ली: महामारी कोरोना वायरस के कारण रूका हुआ गगनयान मिशन फिर से शुरू हो गया है। साथ ही अंतरिक्ष उड़ान के लिए रूस में इंडियन एयरफोर्स के 4 जाबांज पायलटों की ट्रेनिंग भी फिर से शुरू हो गई है। बता दें, पायलटों की ट्रेनिंग महामारी के कारण लॉकडाउन होने की वजह से थम गई थी। इस साल की फरवरी के शुरू-शुरू में ये चारों इंडियन एयरफोर्स पायलट अमेरिका के मॉस्को शहर गए थे। इनकी ट्रेनिंग गैगरीन रिसर्च एंड टेस्ट कॉस्मोनॉट ट्रेनिंग सेंटर (जीसीटीसी) में चल रही थी। लेकिन लॉकडाउन के कारण ये ठप हो गई थी। लेकिन अब 12 मई से इनकी ट्रेनिंग ने फिर से रफ्तार पकड़ ली है।

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गैगरीन रिसर्च एंड टेस्ट कॉस्मोनॉट ट्रेनिंग सेंटर

इस पर रूस की स्पेस कंपनी ग्लवकॉसमॉस ने कहा कि इंडियन एयरफोर्स का पायलटों को जीसीटीसी के ट्रेनर सही ट्रेनिंग दे रहे हैं। इनकी शुरूआती ट्रेनिंग में स्पेस ट्रैवल और स्पेसक्राफ्ट पर नियंत्रण की बेसिक क्लासेज चल रही हैं। इसके साथ ही ये पायलट बेसिक रूसी भाषा का भी अध्ययन कर रहे हैं, जिससे आगे की ट्रेनिंग में परेशानी न हो।

स्पेस कंपनी ग्लवकॉसमॉस ने कहा कि भारत से आए सभी पायलट सेहतमंद और सुरक्षित हैं। हमने इनका बेहद तरीके से ख्याल रखा है। मार्च में इन लोगों को कोरोना वायरस के कारण आइसोलेट कर दिया गया था। लेकिन अब ये ठीक हैं और अपनी ट्रेनिंग कर रहे हैं।

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एयरफोर्स से अंतरिक्षयात्री चुनने के लिए कहा

इंडियन एयरफोर्स के इन चारों जांबाजों की लगभग एक साल की ट्रेनिंग होगी। इन्हें रूस में ट्रेनिंग खत्म करने के बाद वापस बेंगलुरू आकर भी ट्रेनिंग करनी होगी।

गगनयान मिशन के जरिए इसरो 3 अंतरिक्षयात्रियों को पृथ्वी से 400 किमी ऊपर अंतरिक्ष में 7 दिन की यात्रा कराएगा। इन अंतरिक्षयात्रियों को 7 दिन के लिए पृथ्वी की लो-ऑर्बिट में चक्कर लगाना होगा। इस मिशन के लिए इसरो ने इंडियन एयरफोर्स से अंतरिक्षयात्री चुनने के लिए कहा था।

ऐसे में दिसंबर 2021 में इसरो 3 भारतीयों को अंतरिक्ष में भेजेगा। उससे पहले 2 अनमैन्ड मिशन होंगे। ये दिसंबर 2020 और जुलाई 2021 में किए जाएंगे। इन दोनों मिशन में गगनयान को बिना किसी यात्री के अंतरिक्ष में भेजा जाएगा।

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मूंग दाल हलवा और वेज पुलाव

फिर इसके बाद दिसंबर 2021 में मानव मिशन भेजा जाएगा। इस पूरे मिशन की लागत 10 हजार करोड़ रुपए है। जानकारी के लिए बता दें कि देश के पहले अंतरिक्षयात्री राकेश शर्मा 2 अप्रैल 1984 में रूस के सोयूज टी-11 में बैठकर अंतरिक्ष यात्रा पर गए थे।

इसके साथ ही भारतीय अंतरिक्षयात्रियों के खाने का मेन्यू भी सामने आया था। जिसमें एग रोल, वेज रोल, इडली, मूंग दाल हलवा और वेज पुलाव शामिल थे। यह खाना मैसूर स्थित डिफेंस फूड रिसर्च इंस्टीट्यूट के द्वारा तैयार किया जा रहा है।

वहीं अंतरिक्ष में खाना गर्म करने के लिए ओवन की व्यवस्था भी डीआरडीओ द्वारा की जा रही है। अंतरिक्ष यात्रियों के लिए पानी और जूस के साथ-साथ लिक्विड फूड की भी व्यवस्था रहेगी। ये सभी एस्ट्रोनॉट्स लगभग 7 दिनों तक पृथ्वी से 450 किलोमीटर ऊपर गगनयान में रहेंगे। ये बहुत ही बड़ा मिशन होगा।

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