UNHRC में भारत की बड़ी जीत, कश्मीर पर समर्थन हासिल करने में पाकिस्तान नाकाम

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में कश्मीर मुद्दे पर चर्चा के दौरान भारत की सचिव कुमम मिनी देवी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में हमारा फैसला भारत का संप्रभु और आंतरिक मामला है।

नई दिल्ली:  दुनिया को जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भारत के  खिलाफ गुमराह करने की पाकिस्तान की कोशिश एक बार फिर से फेल हो गई। 19 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में कश्मीर पर प्रस्ताव पेश करने का आखिरी दिन था, लेकिन पाकिस्तान इसके लिए जरूरी मत नहीं जुटा सका। सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान के कश्मीर पर प्रस्ताव को अधिकतर देशों ने साथ देने से मना कर दिया।

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यूएनएचआरसी में भारत की सचिव ने दिया करारा जवाब

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में कश्मीर मुद्दे पर चर्चा के दौरान भारत की सचिव कुमम मिनी देवी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में हमारा फैसला भारत का संप्रभु और आंतरिक मामला है।

हमारे फैसले को गलत तरीके से पेशकर पाकिस्तान इलाके को लेकर अपनी नीयत छिपा नहीं सकता है। एक बार पीओके और पाकिस्तान के इलाकों के संदर्भ में बात होनी चाहिए।

लोगों का गायब होना, हिरासत में रेप की घटना, हिरासत में हत्या की घटना, प्रताड़ित करना, समाजिक कार्यकर्ता और पत्रकारों के मानवाधिकारों का उल्लंघन वहां आम बात है।

जिनेवा में चल रहा है यूएनएचआरसी का 42वां सत्र

यूएनएचआरसी में इस प्रस्ताव को प्रस्तुत करने के करने के लिए न्यूनतम 16 देशों का साथ चाहिए था। पाकिस्तान और इमरान खान पूरी दुनिया के सामने भले कश्मीर को लेकर गलत तथ्य पेश कर रहे हों, लेकिन दुनिया पाकिस्तान के असलियत को जान गई है, और इसलिए पाकिस्तान को साथ नहीं रहा है। इस समय जिनेवा में यूएनएचआरसी का 42वां सत्र चल रहा है। पाकिस्तान न्यूनतम समर्थन जुटाने में भी नाकाम रहा।

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क्या कहता है नियम

नियम कहता है कि किसी भी देश के प्रस्ताव पर कार्रवाई करने से पहले न्यूनतम समर्थन की जरूरत होती है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने इस्लामाबाद से जिनेवा के लिए रवाना होने से पहले कश्मीर पर प्रस्ताव का वादा किया था।

यूएनएचआरसी में इस्लामी सहयोग संगठन (ओआईसी) के 15 देश हैं। पाकिस्तान को उम्मीद थी कि वह इसके बाद समर्थन जुटा लेगा।  कश्मीर के मुद्दे पर एक संयुक्त बयान के प्रबंधन के बाद भी इस्लामाबाद वोट नहीं जुटा पाया।

पाकिस्तान ने इससे पहले 10 सितंबर को यूएनएचआरसी को कश्मीर की स्थिति पर एक संयुक्त बयान सौंपा था। इसमें उसने 60 देशों के समर्थन की बात कही थी, लेकिन कौन से देश समर्थन कर रहे हैं, इसको वो नहीं बता पाया।

47 सदस्यों वाले यूएनएचआरसी में पाकिस्तान के पास तीन विकल्प थे। प्रस्ताव, बहस या तो विशेष सत्र। प्रस्ताव तो अब इस विकल्प से बाहर ही हो गया।  विशेष सत्र सबसे मजबूत विकल्प हो सकता है, लेकिन उसे भी खारिज किया जाता है।

सूत्रों के मुताबिक, सामान्य सत्र जो 27 सितंबर तक चलेगा, उसके बीच विशेष सत्र आयोजित नहीं किया जा सकता। वहीं बहस के लिए कम से कम 24 देशों के समर्थन की जरूरत होती है। ये दोनों विकल्प अति आवश्यक मामले में ही होते हैं।

सूत्रों ने कहा कि पर मामला आठ सप्ताह बीतने के बाद भी न तो तत्काल जरूरी है और न ही यह गंभीर है क्योंकि भारत ने परिषद और सदस्य राज्यों को सूचित किया है कि स्थिति नियंत्रण में है और आश्वासन दिया कि प्रतिबंधों में ढील दी जाएगी।

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