अभी-अभी मोदी सरकार ने देशहित में लिए कई बड़े फैसले, यहां जानें उसके बारे में

केंद्रीय मंत्रिमंडल (कैबिनेट) ने बुधवार को कई अहम फैसले किए। इसमें नीलांचल स्टील प्लांट का विनिवेश, माइन्स और कोल को लेकर फैसले शामिल हैं। पूर्वोत्तर भारत मोदी सरकार का फोकस रहा है।

Published by Aditya Mishra Published: January 8, 2020 | 3:06 pm
Modified: January 8, 2020 | 3:45 pm

नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्रिमंडल (कैबिनेट) ने बुधवार को कई अहम फैसले किए। इसमें नीलांचल स्टील प्लांट का विनिवेश, माइन्स और कोल को लेकर फैसले शामिल हैं।

पूर्वोत्तर भारत मोदी सरकार का फोकस रहा है। 8 राज्यों में गैस ग्रिड तैयार करने का फैसला हुआ है। रेलवे के लिए इंग्लैंड के साथ एनर्जी को लेकर समझौते को भी कैबिनेट ने बुधवार को मंजूरी दे दी है।

इसके अलावा गुजरात के जामनगर में आयुर्वेद संस्थान को इंस्टीट्यूट ऑफ इम्पोर्टन्स देने का फैसला भी कैबिनेट ने किया है । नीलांचल स्टील प्लांट में विनिवेश का जो फैसला हुआ है, उसके तहत MMTC, NMDC आदि के शेयर के कुछ हिस्से का विनिवेश किया जाएगा। इससे नीलांचल स्टील प्लांट का विस्तार होगा।

कैबिनेट ने आज फ्रांस के साथ मोबिलिटी के फैसले को मंजूरी दी है। इससे छात्रों, स्किल्ड लोगों के आने-जाने की सुविधा बढ़ेगी। हेल्थ के क्षेत्र में मिलिंडा और बिल गेट्स के साथ समझौते को भी मंजूरी दी गई है।

ये भी पढ़ें…बेइमान लोग फैला रहे अफवाह, उद्योगपतियों के खिलाफ नहीं है सरकार-पीएम मोदी

नीलांचल इस्पात की पूरी हिस्सेदारी बेचेगी सरकार

नीलांचल इस्पात में MMTC की हिस्सेदारी 49.08 फीसदी, NMDC की हिस्सेदारी 10.10 फीसदी, मेकॉन और BHEL की हिस्सेदारी 0.68 फीसदी है। कैबिनेट ने निलाचल इस्पात निगम लिमिटेड (Neelachal Ispat Nigam Limited) को बेचने की मंजूरी दे दी है। निलाचल इस्पात में सरकार अपनी पूरी 100 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगी।

इसके अलावा कैबिनेट ने कोल माइनिंग में कमर्शियल माइनिंग का रास्ता साफ कर दिया गया है। इसके लिए MMDR एक्ट में बदलाव करने का फैसला किया गया है। इसके लिए कैबिनेट ने अध्यादेश को मंजूरी दे दी है ।

ये भी पढ़ें…गुजरात दंगाः नानावती-मेहता रिपोर्ट-2 ने PM नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दिया

खनिज कानून संशोधन अध्यादेश 2020 को मंजूरी, 46 खदानों की हो सकेगी नीलामी

केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी ने संवाददाताओं को बताया कि इस अध्यादेश के माध्यम से खनिज विकास एवं नियमन अधिनियम 1957 और कोयला खान विशेष प्रावधान अधिनियम 2015 में संशोधन का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि इसके माध्यम से कोयला एवं खनन क्षेत्र में नए युग का सूत्रपात होगा।

जोशी ने बताया कि भारत में कोयले की मांग काफी अधिक है लेकिन बड़े पैमाने पर इसका आयात किया जाता है। यह अध्यादेश सभी क्षेत्रों के लिए कोयला खनन को खोलने और कोयला खदानों की नीलामी के नियम को आसान करेगा।

अध्या देश से 31 मार्च, 2020 से पहले 46 आयरन ओर एवं अन्यय खदानों की नीलामी का रास्ताक साफ होगा। 46 खानों की खनन पट्टे की अवधि 31 मार्च 2020 को समाप्त हो रही है, नीलामी की अनुमति से उत्पादन कार्य जारी रखते हुए इनका आसानी से हस्तांतरण किया जा सकेगा।

इसके अलावा केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नीलांचल इस्पात निगम में छह सार्वजनिक उपक्रमों की हिस्सेदारी बेचने की को भी मंजूरी प्रदान की है। सरकार ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में 9,265 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हो रही 1,656 किलोमीटर लंबी गैस ग्रिड के निर्माण के लिए 5,559 करोड़ रुपए की वित्त पोषण सुविधा देने को भी मंजूरी दी है।

ये भी पढ़ें…भ्रष्टाचार पर कार्रवाई को कारोबारियों से न जोड़ें: पीएम मोदी