संसद के मानसून सत्र पर संकट, नायडू और बिरला की बैठक में नहीं हो सका फैसला

सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पालन करते हुए लोकसभा और राज्यसभा के सभी सांसदों के बैठने की व्यवस्था को लेकर पैदा हुई मुश्किल का अभी तक समाधान नहीं खोजा जा सका है।

अंशुमान तिवारी

नई दिल्ली। कोरोना महामारी के कारण संसद के मानसून सत्र के आयोजन में दिक्कतें पैदा हो गई हैं। दरअसल सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पालन करते हुए लोकसभा और राज्यसभा के सभी सांसदों के बैठने की व्यवस्था को लेकर पैदा हुई मुश्किल का अभी तक समाधान नहीं खोजा जा सका है। उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की इस बाबत मंगलवार को बैठक भी हुई मगर इस बैठक में भी अंतिम फैसला नहीं लिया जा सका।

विभिन्न विकल्पों पर चर्चा

जानकार सूत्रों का कहना है कि नायडू को और बिरला दोनों ने इस बैठक में मानसून सत्र की बैठक को लेकर उपलब्ध विकल्पों पर चर्चा की। इस बैठक में लोकसभा और राज्यसभा के महासचिव भी मौजूद थे और इन दोनों अधिकारियों ने बैठक के लिए विचाराधीन विभिन्न विकल्पों के बारे में नायडू और बिरला को जानकारी दी। सूत्रों के मुताबिक दोनों महासचिवों ने दोनों सदनों, संसद के सेंट्रल हाल और विज्ञान भवन के प्लेनरी हॉल में बैठने की क्षमता के बारे में बताया।

महासचिवों ने दी विकल्पों की जानकारी

जानकारों के मुताबिक उन्होंने दोनों पीठासीन अधिकारियों को बताया कि राज्यसभा के चेंबर में सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पालन करते हुए लगभग 60 लोग बैठ सकते हैं। सोशल डिस्टेंसिंग के मापदंडों के अनुसार लोकसभा चेंबर और सेंट्रल हाल में 100 सदस्यों को बैठाया जा सकता है।‌

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उन्होंने यह भी बताया गया कि यदि सदस्यों के बैठने की व्यवस्था गैलरी में की जाती है तो भी आवश्यकता से बहुत कम सांसद ही बैठ सकेंगे। उन्होंने बताया कि दोनों सदनों के सांसदों को बिठाना संभव नहीं हो पाएगा।

विज्ञान भवन में भी बैठक संभव नहीं

लोकसभा और राज्यसभा के महासचिवों ने यह भी जानकारी दी कि विज्ञान भवन का प्लेनरी हॉल भी लोकसभा के सभी सदस्यों के लिए पर्याप्त साबित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि सेंट्रल हॉल में दिन के दौरान एसी की सुविधा न होने के कारण भी दिक्कत आएगी।

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दोनों पीठासीन अधिकारियों की इस महत्वपूर्ण बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि सदन में जितने सांसदों को बैठाने की व्यवस्था की जाती है, उतने ही सांसदों को बैठक में हिस्सा लेने की इजाजत दी जाए। इसका एक रास्ता यह निकाला जा सकता है कि उन सांसदों को सदन में बैठने की इजाजत दी जाए जिनसे जुड़ा मामला सदन के पटल पर चर्चा के लिए रखा जाए।

और विकल्प तलाशने को कहा

जानकार सूत्रों का कहना है उपराष्ट्रपति नायडू और लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने वर्चुअल तरीके से सदस्यों की उपस्थिति सुनिश्चित करने का विकल्प भी तलाशने को कहा। जानकारों का कहना है कि मानसून सत्र को लेकर अभी विकल्पों पर विचार चल रहा है और जल्द से जल्द इस बाबत अंतिम फैसला लिए जाने की उम्मीद है।

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कोरोना महामारी को देखते हुए दोनों सदनों की महत्वपूर्ण बैठक में सोशल डिस्पेंसिंग के नियम का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है। इसी कारण सत्र को लेकर मुश्किलें पैदा हुई हैं और जल्द ही इसका समाधान करने की कोशिश की जा रही है।

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