नाराज वकील ने जज को दिया श्राप, कहा- ‘जा तुझे कोरोना वायरस लग जाए’

जान लेवा कोरोना वायरस ने आज पूरी दुनिया में कोहराम मचा रखा है। इस भयावह बीमारी की चपेट में लाखों लोग आ चुके हैं। वहीं इस वायरस की वजह से कई लोगों की…

नई दिल्ली: जान लेवा कोरोना वायरस ने आज पूरी दुनिया में कोहराम मचा रखा है। इस भयावह बीमारी की चपेट में लाखों लोग आ चुके हैं। वहीं इस वायरस की वजह से कई लोगों की जानें भी जा रही हैं। एक तरफ इस बीमारी से जहां पूरी दुनिया सकते में आ चुकी है वहीं कुछ घटनाएं ऐसी भी सामने आ रही हैं जिसे देखकर ऐसा लगता है कि यह वायरस सिर्फ जानलेवा बीमारी ही नहीं बल्कि लोगों के लिए श्राप भी बनता जा रहा है। वहीं एक घटना के बारे में जानकर आपकी हंसी छूट जाएगी। दरअसल अपने पक्ष में फैसला नहीं आने पर एक वकील ने कलकत्ता उच्च न्यायलय के एक न्यायाधीश को श्राप देते हुए कहा कि “जा तुझे कोरोना वायरस हो जाए,” वकील के इस आचरण से नाराज न्यायाधीश ने उसके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की अनुशंसा की है।

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बता दें कि घटना के बाद न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता ने अदालत की गरिमा को बरकरार रखने में विफल रहने तथा “इस गरिमापूर्ण पेशे के सदस्य के हिसाब से” आचरण नहीं करने पर वकील विजय अधिकारी की निंदा की और उन्हें नोटिस भेजे जाने की तारीख के 15 दिनों के अंदर अवमानना नियम के अंतरगत जवाब देने को कहा है। न्यायमूर्ति ने यह निर्देश भी दिया कि ग्रीष्म अवकाश के बाद जब अदालत खुलेगी तो यह मामला उचित खंडपीठ द्वारा सुना जाएगा जिसके पास आपराधिक अवमानना के मामले सुनने का अधिकार होगा।

अदालत में सिर्फ आवश्यक मामलों की ही सुनवाई हो रही थी

दरसअल कोरोना वायरस के कारण कलकत्ता उच्च न्यायालय में 15 मार्च से सिर्फ अति आवश्यक मामलों की ही सुनवाई हो रही थी। इस दौरान जितने भी मामले सामने आये थे सबकी सुनवाई सिर्फ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हो रही है।

दरससल एक अधिकारी ने कर्ज अदा न करने पर एक राष्ट्रीयकृत बैंक द्वारा उसके मुवक्किल की बस नीलामी पर रोक लगाने की याचिका न्यायमूर्ति दत्ता की अदालत में दी थी। इस बस के 15 जनवरी को जब्त किये जाने की जानकारी के बाद अदालत ने इस पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। जब जज ने अपना आदेश देना शुरू किया तो नाराज अधिकारी बार-बार उन्हें टोक रहे थे।

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न्यायमूर्ति ने अपने आदेश में कहा कि अधिकारी को बार-बार संयमित आचरण खोने के लिये चेतावनी दी गई लेकिन उन्होंने इन पर ध्यान नहीं दिया, उन्हें कहते सुना गया कि मेरा भविष्य वह अंधकारमय बना देंगे और इसलिये उन्होंने मुझे श्राप दिया कि मुझे कोरोना वायरस संक्रमण लग जाए।

उन्होंने कहा, ‘अधिकारी को स्पष्ट रूप से बता दिया गया कि न तोमुझे अपने भविष्य के अंधकारमय होने का डर है न ही मैं संक्रमण से डरता हूं लेकिन अदालत की गरिमा मेरे दिमाग में सर्वोच्च है और इसे बरकरार रखने के लिये उनकेखिलाफ अवमानना की कार्रवाई का निर्देश दिया जा सकता है।’

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