तैयार हुआ एक और शाहीनबाग: यहां हजारों महिलाएं बैठी धरने पर

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन जारी है। देश के अलग-अलग हिस्सों में सीएए और एनआरसी के खिलाफ जमकर प्रदर्शन देखने को मिल रहा है।

तैयार हुआ एक और शाहीनबाग: यहां पर हजारों की संख्या में महिलाएं बैठीं धरने पर

तैयार हुआ एक और शाहीनबाग: यहां पर हजारों की संख्या में महिलाएं बैठीं धरने पर

नई दिल्ली: नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन जारी है। देश के अलग-अलग हिस्सों में सीएए और एनआरसी के खिलाफ जमकर प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। वहीं तमिलनाडु में भी इस कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है, लोगों में सीएए और एनआरसी के खिलाफ गुस्सा देखने को मिल रहा है। तमिलनाडु के 6 से ज्यादा शहरों में सीएए के खिलाफ महिलाएं सड़कों पर उतरी हैं और विरोध प्रदर्शन कर रही हैं।

पुलिस ने किया प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज

चेन्नई में अब हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। चेन्नई के वाशरमैनपेट में पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया। इसके अलावा पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में भी लिया गया था। हालांकि बाद में प्रदर्शनकारियों को रिहा कर दिया गया था।

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भिड़ंत के दौरान चार पुलिसकर्मी घायल

मामले में चेन्नई पुलिस ने जानकारी दी कि प्रदर्शनकारियों से भिड़ंत के दौरान चार पुलिसकर्मी घायल हो गए। इन पुलिसकर्मियों में एक महिला डिप्टी कमिश्नर, दो महिला अधिकारी और एक सब इंस्पेक्टर शामिल हैं। बताया जा रहा है कि प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों पर पथराव किया था, जिस कारण चारच पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं।

उधर प्रदर्शनकारियों का भी कहना है कि उनमें से भी कुछ लोग घायल हुए हैं। बवाल को बढ़ता देख पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। बाद में प्रदर्शनकारियों ने उनकी रिहाई के लिए नारेबाजी शुरु कर दी। बाद में स्थिति पर काबू पाया गया। हालांकि हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को बाद में रिहा कर दिया गया था।

जबरन हटाने के प्रयास में भड़का मामला

दरअसल, ये मामला तब और भड़क गया जब पुलिस ने प्रदर्शन वाली जगह से कुछ लोगों को जबरन हटाने का प्रयास किया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच भिड़ंत हो गई। जिसके बाद प्रदर्शनकारियों पर पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। हालांकि इसके बावजूद भी लोग वहां से नहीं हटे। जिसके बाद पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में ले लिया, जिन्हें बाद में रिहा कर दिया गया।

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नहीं हुई किसी की मौत- पुलिस

वहीं चेन्नई पुलिस ने ये भी साफ किया है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई भिड़ंत में किसी भी व्यक्ति की जान को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। दरअसल, ये दावा किया जा रहा था कि प्रदर्शन के दौरान एक बुजुर्ग शख्स की शुक्रवार रात मौत हो गई। इस खबर का चेन्नई पुलिस ने खंडन किया है। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन और बुजुर्ग शख्स की मौत के बीच कोई संबंध नहीं है।

एमके स्टालिन ने की लाठीचार्ज की निंदा

वहीं डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन ने प्रदर्शनकारियों पर पुलिस द्वारा की गई लाठीचार्ज की निंदा की है। डीएमके ने 14 फरवरी की रात को ब्लैक नाइट करार दिया है। उन्होंने एक बयान जारी करते हुए कहा कि, सरकार ने रणनीति के तहत शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों पर हमला किया है। उन्होंने सभी प्रदर्शनकारियों पर दर्ज केस वापस लिए जाने की मांग की है।

महिलाओं ने सरकार के खिलाफ की नारेबाजी

वहीं पुलिस के साथ हुई झड़प के बाद प्रदर्शन कर रही महिलाएं यहां से हट गईं, लेकिन थोड़ी देर बाद यहां पर हजारों की संख्या में लोगों भी भीड़ उमड़ पड़ी। शुक्रवार शाम महिलाओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। महिलाएं नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ लगातार नारेबाजी करती रहीं। कुछ महिलाओं ने लाठीचार्ज के बाद बताया कि किस तरह से पुलिस ने कार्रवाई की।

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यहां भी CAA के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन

बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ न केवल चेन्नई में बल्कि कोयंबटूर और मदुरै में भी विरोध प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन कर रही महिलाओं की मांग है कि केंद्र सरकार इस कानून को वापस ले ले। इन विरोध प्रदर्शनों में लगातार केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ नारेबाजी की जा रही है। इसके अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ भी नारेबाजी की जा रही है। तमिलनाडु में इस कानून को लेकर हंगामा मचा हुआ है।

शाहीनबाग की तर्ज पर हो रहा प्रदर्शन

यहां पर महिलाएं शाहीन बाग की ही तर्ज पर नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रही हैं। दिल्ली के शाहीन बाग इलाके में हो रहा विरोध प्रदर्शन अब देशभर के विरोध प्रदर्शनों का प्रतीक बन चुका है। अलग-अलग जगह विरोध प्रदर्शन में बैठी महिलाओं ने केंद्र सरकार से इस कानून को वापस लेने की मांग है। वहीं दूसरी तरफ केंद्र सरकार साफ कर चुकी है कि इस कानून को वापस नहीं लिया जाएगा।

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