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दाल का दूल्हा : यूपी से गुजरात तक है इसके चर्चे, हेल्थ के लिए है पौष्टिक आहार

यह प्रोटीन, आयरन और कैल्शियम के साथ फाइबर से भरी हुई होती है। बच्चों के लिए तो यह एक बेहतरीन विकल्प होता है। बच्चों की वजह से ही शायद इसके कई नाम पड़े हुए हैं जो उन्हें खूब आकर्षित करते हैं।

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sumanBy suman

Published on 6 March 2021 5:59 AM GMT

दाल का दूल्हा : यूपी से गुजरात तक है इसके चर्चे, हेल्थ के लिए है पौष्टिक आहार
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यही इस डिश का जादू है। दाल में कुछ सब्जियां और मसाले भी लोग अपने स्वाद के हिसाब से डालते हैं। यह एक रेग्यूलर डिश नहीं है लेकिन, अक्सर ही भारतीय घरों में पकती रहती है।
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लखनऊ : सर्दियों के मौसम में आपने बहुत सारे खानों का स्वाद लिया होगा। लेकिन अब जैसे जैसे सर्दिया जा रही है, जुबान का भी स्वाद बदलने लगा है। ऐसे में एक डिश है जो आपके स्वाद को बढ़ाएगा साथ ही इसका नाम भी रोमांच पैदा करने वाला है। जी हां हम पुराने लेकिन जायकेदार खाने की बात कर रहे है। जिसे कई नाम से पुकारते है। कहीं इसे दाल का दूल्हा तो कहीं पर इसे लोग दाल की दुल्हन ही मान लेते हैं। दाल-पिठौरी के नाम से भी जानते है। गुजरात में इसे दाल-ढोकली बोलते हैं। तो इसे दाल की तितली भी कहा जाता है। एक बात तो तय है कि यह 'दूल्हा' पूरे देश में मशहूर है।

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सिंपल डिश

दाल का दुल्हा साधारण सी दाल की ग्रेवी और उसमें पड़ी हुई आटे की 'तितलियां', यही इस डिश का जादू है। दाल में कुछ सब्जियां और मसाले भी लोग अपने स्वाद के हिसाब से डालते हैं। यह एक रेग्यूलर डिश नहीं है लेकिन, अक्सर ही भारतीय घरों में पकती रहती है।

DAAL

इस राज्य से हुई शुरू

दाल के दूल्हे यानी दाल-ढोकली का ऑरिजिन गुजरात को मानते है। यह शुद्ध रूप से एक भारतीय भोजन है। कई लोगों का यह भी कहना है कि यह राजस्थान में सबसे पहले बनी थी। जो भी हो इसे सभी राज्यों ने अपने-अपने वर्जन के साथ अपना लिया है। यूपी-बिहार में भी घरों में इसे खूब खाया जाता है।आप सबमें से भी बहुत से लोगों ने इसका स्वाद चखा ही होगा।

हेल्दी डिश

इसे खाना पेट के लिए तो हल्का होता ही है लेकिन इसके अलावा भी इसमें बहुत सारे पौष्टिक तत्व पाए जाते हैं। यह प्रोटीन, आयरन और कैल्शियम के साथ फाइबर से भरी हुई होती है। बच्चों के लिए तो यह एक बेहतरीन विकल्प होता है। बच्चों की वजह से ही शायद इसके कई नाम पड़े हुए हैं जो उन्हें खूब आकर्षित करते हैं।

DAAL

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विधि

इसे बनाने का अपना-अपना तरीका है। बिहार या पूर्वांचल के इलाके में इसे अरहर, मसूर और मूंग की दाल में बनाते हैं। दाल उबालने के साथ आटे को गूंथ कर उसे रोटी जैसा बनाते हैं। इसके बाद कटोरी से छोटे-छोटे गोल आकार में इसे काट लिया जाता है। इसके बाद तीन तरफ से पकड़कर इसे बीच में मिला लेते हैं। फिर ये तितलियों की तरह दिखने लगती है जिसे दाल में डाल देते हैं कुछ लोग दाल में इसके साथ ही सब्जियां आदि भी डाल कर उबाल लेते हैं जिससे उसकी पौष्टिकता और स्वाद कई गुना बढ़ जाता है ऑफिस जाने वाले लोगों के लिए यह एक बेहतरीन ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर का विकल्प है तो आप कब बना रहे हैं दाल का दुल्हा।

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