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जानिए क्यों लिया था सृष्टि के पालनकर्ता भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार

भगवान विष्णु को संसार का पालनहार कहा जाता है। विष्णुपुराण के अनुसार जब दुनिया खतरे में होती है तो बुरी शक्तियों से संसार को बचाने के लिए भगवान विष्णु पृथ्वी पर अवतार लेते हैं। 12 नवम्बर को कार्तिक पूर्णिमा है।

suman
Published on: 8 Nov 2019 5:57 PM GMT
जानिए क्यों लिया था सृष्टि के पालनकर्ता भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार
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जयपुर: भगवान विष्णु को संसार का पालनहार कहा जाता है। विष्णुपुराण के अनुसार जब दुनिया खतरे में होती है तो बुरी शक्तियों से संसार को बचाने के लिए भगवान विष्णु पृथ्वी पर अवतार लेते हैं। 12 नवम्बर को कार्तिक पूर्णिमा है। इस पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इस दिन गुरु पर्व भी है, इसलिए इस दिन की धार्मिक महत्ता और भी बढ़ जाती है. पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु ने मतस्य अवतार लिया था. उनके दस अवतार हैं और भगवान विष्णु का प्रथम अवतार मतस्य अवतार माना जाता है। आखिर क्यों भगवान विष्णु ने ये अवतार लिया था।

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मत्स्य अवतार भगवान विष्णु का पहला अवतार है। इस अवतार में विष्णु जी मछली बनकर प्रकट हुए थे। मान्यता के अनुसार एक राक्षस ने जब वेदों को चुराकर समुद्र की गहराई में छुपा दिया था, तब भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार में आकर वेदों को पाया और उन्हें फिर स्थापित किया।

मत्स्य अवतार, इसके संबंध एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा है। एक समय में शंखासुर नामक राक्ष शंखासुर स ने त्रिलोक पर अपना अधिकार जमा लिया था, जिसके बाद डरे हुए देवतागण भगवान श्री हरी के पास पहुंचे और उनसे मदद मांगी। देवताओं की परेशानी सुनने के बाद भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लेने का निर्णय लिया।

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शंखासुर को पता चल चुका था कि देवतागण ने भगवान विष्णु से मदद मांगी हैं, ऐसे में देवताओं के शक्ति के स्रोत वेद मंत्रों के हरण का प्रयास संखासु करने लगा। शंखासुर ने खुद को बचाने के लिए जल में प्रवेश किया, लेकिन भगवान विष्णु के तेज से वो बच नहीं सका और भगवान श्री हरी ने अपने दिव्य नेत्रों से संखासुर का पता लगा लिया तथा मत्स्य अवतार धारण कर शंखासुर का वध कर दिया और वेद मंत्रो की रक्षा कर देवताओं को उनका वैभव लौटा दिया।

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एक अन्य कथानुसार, एक बार सत्यव्रत नाम के राजा हुआ करते थे। एक दिन वो कृतमाला नदी में तर्पण के लिए गए। जब वो तर्पण कर रहे थे तो उनके हाथों में एक छोटी सी मछली आ गई। सत्यव्रत ने मछली कि मदद के लिए जैसे ही उसे नदी में डाला तो मछली ने कहा कि राजा आप कृपया ऐसा न करें। मुझे नदी में वापस न भेजें अन्यथा जल के बड़े जीव-जंतु मुझे खा जाएंगे। इतना सुनते ही राजा ने मछली को फिर दोबारा जल से बाहर निकाल लिया। मछली को अपने कमंडल में रख वो उसे अपने आश्रम ले गए।

रात बीती ही थी कि तड़के उन्होंने देखा कि मछली का आकार बढ़ गया है। तब राजा ने उसे कमंडल से निकालकर किसी बड़े मटके में डाल दिया। अब मटके में भी मछली का आकार बढ़ गया तो राजा ने उसे तालाब में डाल दिया। लेकिन राजा एक बात तो समझ गए थे कि ये कोई साधारण मछली नहीं है।और उन्होंने उसे वापस नदी मे डाल दिया।

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