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आखिर क्या है चीन के कड़े प्रतिबंधों का सबब, जरूरी है वुहान लैब की जांच

न की इन चतुर और कुटिल चालों से सावधान रहने और सावधान करने का समय है। आगे चीन को यह बताने की भी ज़रूरत मुँह बाये खड़ी हैं कि किसी समाज या देश के विध्वंस करके अपने निर्माण का तरीक़ा ठीक नहीं। इसका ख़ामियाज़ा भुगतना पडेगा।

राम केवी
Published on: 21 April 2020 8:38 AM GMT
आखिर क्या है चीन के कड़े प्रतिबंधों का सबब, जरूरी है वुहान लैब की जांच
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योगेश मिश्र

आज पूरी दुनिया कोरोना वायरस से बुरी तरह परेशान है। कोई रास्ता कोरोना से निपटने का मिल ही नहीं पा रहा है। हर रोज़ कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। हर रोज़ लगता है कि कोरोना को लेकर किए गए प्रयास निरर्थक हो गए हैं। हो रहे हैं। हर रोज़ लगता है कि हम नई और बड़ी अंधेरी सुरंग में प्रवेश करते जा रहे हैं। हर रोज़ लगता है कि लॉकडाउन फिर बढ़ाये बिना काम चलने वाला नहीं है। हर रोज़ यह भी लगता है कि आख़िर लॉकडाउन बढ़ायें भी तो कब तक।

अभी तक हम लोग ही नहीं, दुनिया का कोई भी देश कोरोना की कोई दवा या टीका नहीं निकाल सका है। लेकिन दुख का विषय है कि कोरोना को लेकर जब दुनिया के पैमाने पर वैज्ञानिक अध्ययन और आविष्कार में जुटे हैं तो फिर चीन अपनी शरारत से बाज़ नहीं आ है। उसने इस वायरस की उत्पत्ति के ऊपर किए जा रहे अध्ययन व शोध पर तमाम तरीके के प्रतिबंध लाद दिए हैं। नई नीति बना दी है। नई नीति के अंतर्गत सभी शैक्षणिक पेपर प्रकाशित करने से पहले सरकार की अनुमति लेनी होगी। पुलिस से जाँच करानी पड़ेगी । चीन के शैक्षणिक विज्ञान और तकनीकी विभाग का भी कहना है कि वायरस की उत्पत्ति के बारे में किए जा रहे किसी भी रिसर्च पेपर को अब कड़े तरीके से देखा जाएगा। कोई भी पेपर तीन स्तरों से गुजर कर प्रकाशन के स्तर तक पहुंचेगा।

चीन नहीं चाहता कोरोना पर कोई रिसर्च या अध्ययन

दरअसल, कोरोना वायरस के संबंध में वुहान व चीन के अन्य विश्वविद्यालयों में तमाम तरीके केअध्ययन किए जा रहे हैं। कई अध्ययनों के नतीजे ऐसे हैं जो चीन के हितों को ही नुकसान पहुंचाने वाले हैं। चीन के ही शोध से यह खुलासा हुआ कि वहां से इस वायरस का संक्रमण मानव से मानव में हुआ और बाद में पूरी दुनिया इस वायरस की चपेट में आ गई। चीन ही नहीं पश्चिम के कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि यह चमगादड़ों के ज़रिये मानव में फैला।

vuhan lab

इस वायरस की उत्पत्ति को लेकर चीन दुनियाभर के निशाने पर है। चीन की सरकार और अधिकारी इस बात की कोशिश कर रहे हैं कि ऐसा परिदृश्य पैदा हो सके जिससे पता लगे कि इस महामारी की उत्पत्ति चीन से नहीं हुई। शोधकर्ताओं के मुताबिक चीन की सरकार अब यह नहीं चाहती कि बीमारी की उत्पत्ति के बारे में कोई भी स्टडी पूरी की जाए।

चीन की इस लैब में हैं 1500 से ज्यादा घातक वायरस

क्योंकि अमेरिका, फ़्रांस और आस्ट्रेलिया सहित कई देशों ने इसे लेकर चीन पर हमला बोला है।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तो इसे चीनी वायरस ही कहते हैं। दूसरी ओर चीनी सरकार सरकारअमेरिकी खुफिया एजेंसियों पर इस वायरस को चीन में फैलाने का आरोप लगाती रही है। कई देशोंका कहना है कि चीन ने इस वायरस को लेकर पूरी दुनिया को अंधेरे में रखा। यही कारण है कि स्थितियां नियंत्रण से बाहर हो गईं। शायद ही आज कोई इस बात से अनजान हो कि कोराना की शुरुआत चीन के वुहान प्रांत की लैब से हुई, यह चीन की देन है। यह जानकर आपको हैरत होगी कि वुहान इंस्टीट्यूट आफ वायरोलॉजी के लैब में पंद्रह सौ से ज्यादा घातक वायरस मौजूद हैं।

ब्रिटिश मीडिया समूह ‘द मेल’की एक रिपोर्ट में वुहान लैब की दुर्लभ अंदरूनी तस्वीरें उजागर हुई हैं ।ये तस्वीरें लैब से एक भयावह रिसाव की ओर इशारा करती हैं । तस्वीरों में वायरस के पंद्रह सौ अलग-अलग प्रकारों को संग्रहित करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले रेफ्रिजरेटर में से एक के दरवाजे पर टूटी हुई सील दिखाई देती है। इसमें बैट कोरोना वायरस भी शामिल है।

ट्रंप ने वुहान को अनुदान रोका

रेफ्रिजरेटर की टूटी सील की फोटो ‘चाइना डेली’अखबार ने 2018 में पहली बार जारी की थीं।पिछले महीने टि्वटर पर रेफ्रिजरेटर की टूटी सील के फोटो उजागर हुए थे, लेकिन बाद में इसे डिलीट कर दिया गया। इस पर किसी ने टिप्पणी भी की थी कि मैंने अपने रसोई घर में रखे रेफ्रिजरेटर पर इससे बेहतर सील लगा रखी है। इसी अखबार ने पिछले हफ्ते यह भी खुलासा किया था कि वुहान में चमगादड़ों पर कोरोना वायरस के प्रयोगों को अंजाम दिया गया। इस संस्थान को अमेरिका से अनुदान भी मिलता रहा है।

चीन को लेकर बढ़ती शिकायतों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वुहान के इस संस्थान को दिए जानेवाले अनुदान पर रोक लगा दी थी। उन्होंने यह भी कहा था कि हम पूरे मामले की जांच पड़ताल कररहे हैं। यदि इसमें चीन की कोई गलती उजागर होती है तो उसे गंभीर नतीजे भुगतने होंगे।

सवाल ही नहीं उठता कि यह वायरस लैब से आया है

हालाँकि वुहान इंस्टीट्यूट आफ वायरोलॉजी लैब के निदेशक युआन झिमिंग ने दुनिया में कोरोना का संक्रमण फैलाने के आरोपों को ख़ारिज करते हुए सरकारी सीजीटीएन टीवी चैनल को दिए गए एकसाक्षात्कार में कहा कि यह सवाल ही नहीं उठता कि यह वायरस लैब से आया है। यह वायरस मानवनिर्मित नहीं हो सकता। कोई साक्ष्य नहीं है जो यह साबित कर सकें कि यह वायरस कृत्रिम है।

मोटी कमाई में जुटा चीन

दुनिया में कोरोना वायरस फैलाने के आरोपों में घिरा चीन अब इस महामारी के जरिए मोटी कमाई करने में जुटा है। कोरोना से बचाव के लिए कारगर मानी जाने वाली दवाओं के कच्चे माल के बदलेचीन मनमानी कीमत वसूल रहा है। चीन मौके का फायदा उठाकर किस तरह अपनी अर्थव्यवस्था कोमजबूत करने में जुटा है, यह इसी से समझा जा सकता है कि उसने कच्चे माल की कीमतों चार सेपांच गुना तक की बढ़ोतरी कर दी है। दरअसल, इन दवाओं का कच्चा माल चीन से मंगाना मजबूरी है। चीन इस वैश्विक महामारी से लड़रही दुनिया की मजबूरियों का फायदा उठाने की कोशिश में जुटा है।

चीन की कुटिल चालों से सावधान रहने का वक्त

फरवरी-मार्च, २०२० तक हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन नामक साल्ट 7800 रुपए प्रति किलो था , जो इससमय 55000 रुपए प्रति किलो तक मिल रहा है। इसी तरह एजिथ्रोमाइसीन की कीमत साढ़े छह हजार रुपए से बढ़कर करीब 15000 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है।

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इवेर मेक्टिन की कीमत चौदह सौ से बढ़कर 60000 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है। चीन की इन चतुर और कुटिल चालों से सावधान रहने और सावधान करने का समय है। आगे चीन को यह बताने की भी ज़रूरत मुँह बाये खड़ी हैं कि किसी समाज या देश के विध्वंस करके अपने निर्माण का तरीक़ा ठीक नहीं। इसका ख़ामियाज़ा भुगतना पडेगा। चीन के वुहान स्थित उस प्रयोगशाला का दुनिया के कई देशों के सदस्योंके प्रतिनिधियों के साथ एक बार दौरा करके पड़ताल किया जाना ज़रूरी है ताकि सच का पता लगसके। यह परमाणु हथियार से ज़्यादा घातक है।

( लेखक न्यूज़ट्रैक/अपना भारत के संपादक हैं)

राम केवी

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