सुशांत व TRP केस की जांच कर रही CBI के खिलाफ उद्धव सरकार ने उठाया बड़ा कदम

एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत, यूपी का हाथरस केस के अलावा सीबीआई को टीपीआरपी घोटाले की जांच भी सौंपी गई है।सीबीआई लगातार इस मामले में जांच की आगे

Uddhav Thackeray

महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे की फोटो(सोशल मीडिया)

मुंबई: शिवसेना नेता और सामना अखबार के संपादक संजय राउत ने सीबीआई पर जोरदार हमला बोला है। राउत ने कहा कि सीबीआई छोटे-छोटे मामलों में भी घुसने लगी है।

सीबीआई का अपना एक वजूद है। महाराष्ट्र जैसे राज्य में अगर कोई राष्ट्रीय कारण हैं तो उन्हें जांच करने का अधिकार है।

शिवसेना नेता ने आगे कहा कि मुंबई या महाराष्ट्र पुलिस ने किसी विषय पर जांच शुरू की, किसी और राज्य में एफआईआर लिखी जाती है और वहां से केस सीबीआई को जाता है फिर सीबीआई महाराष्ट्र में आ जाती है। अब ये नहीं चलेगा। महाराष्ट्र और मुंबई पुलिस का अपना एक अधिकार है जो संविधान ने दिया है।

Sanjay Raut
शिवसेना नेता संजय राउत की फोटो(सोशल मीडिया)

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महाराष्ट्र सरकार ने राज्य मामलों की जांच की आम सहमति सीबीआई से वापस ली

बता दें कि महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार ने राज्य मामलों की जांच के लिए केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई को दी गई अपनी आम सहमति को वापस ले लिया है।

इसका अर्थ ये है कि अब किसी भी केस की जांच के लिए सीबीआई को पहले राज्य सरकार से परमिशन लेनी पड़ेगी। शिवसेना नेता संजय राउत ने सरकार के इस फैसले को शी ठहराया है।

उन्होंने ये भी कहा कि राज्य के मामलों में पहले से ही हमारी पुलिस द्वारा जांच की जा रही है, इसमें हस्तक्षेप के कारण हमें यह निर्णय लेना पड़ा।

शिवसेना नेता ने बीजेपी के वरिष्ठ नेता एकनाथ खड़से को अपनी पार्टी छोड़कर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) में शामिल होने को लेकर भी जोरदार हमला बोला।

उन्होंने कहा, ‘एकनाथ खड़से अगर अपने जीवन के इस चरण में, 40 वर्षों तक बीजेपी की सेवा करने के बाद अब आंखों में आंसू लिए राकांपा में शामिल हो रहे हैं तो इस फैसले के पीछे एक बहुत बड़ा कारण होगा। उनकी कुंडली जम गई होगी।

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CBI
सीबीआई के अफसरों की फोटो(सोशल मीडिया)

यूपी में टीआरपी केस में एफआईआर

यहां ये भी बता दें कि सीबीआई ने उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा मामला दर्ज किए जाने के आधार पर मंगलवार को एक एफआईआर लिखी थी।

ये एफआईआर एक विज्ञापन कंपनी के प्रमोटर की शिकायत पर लखनऊ के हजरतगंज पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी। जिसे बाद में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सीबीआई को सौंप दिया गया था। ये पूरा मामला टीआरपी में हेराफेरी से जुड़ा हुआ है।

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