सोनिया गांधी का हमला: खजाने का ताला खोले सरकार, जरूरतमंदों को दे राहत

कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रवासी मजदूरों की समस्या को लेकर एक बार फिर से केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है। सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार से प्रवासी मजदूरों के लिए खजाना खोलने की गुहार लगाई है।

नई दिल्ली: कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रवासी मजदूरों की समस्या को लेकर एक बार फिर से केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है। सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार से प्रवासी मजदूरों के लिए खजाना खोलने की गुहार लगाई है। इसके अलावा कांग्रेस की अंतिरम अध्यक्ष ने केंद्र से मांग की है कि सरकार की तरफ से हर परिवार को 6 महीने तक 7500 रुपये प्रति माह दिए जाएं। इसके अलावा उन्होंने प्रवासी मजदूरों को सुरक्षित घर पहुंचाने का अनुरोध किया।

मजदूरों की सिसकियां सभी ने सुनी लेकिन सरकार ने नहीं

सोनिया गांधी ने कहा कोरोना वायरस के चलते पूरा देश पिछले दो महीने से गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। देश की आजादी के बाद पहली बार दर्द का ऐसा मंजर देखने को मिला। जहां मजदूर नंगे पांव भूखे-प्यासे हजारों किलोमीटर पैदल चलकर अपने घर जाने को मजबूर हुए। उन सभी की सिसकियां देश के सभी लोगों ने सुनी लेकिन शायद सरकार ने नहीं।

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इस पीड़ा का सरकार को अंदाजा नहीं

स्पीकअप इंडिया कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि करोड़ों रोजगार चले गए, लाखों धंधे बंद हो गए, किसान को फसल बेचने के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ी हैं। इस पीड़ा को पूरे देश ने झेला, लेकिन शायद सरकार को इसका अंदाजा नहीं हुआ। पहले दिन से ही सभी कांग्रेसियों, अर्थशास्त्रियों और समाज के हर तबके ने कहा कि यह समय आगे बढ़कर घाव पर मरहम लगाने का है।

भारत की आवाज बुलंद करने के लिए चलाना है यह अभियान

उन्होंने कहा कि ये वक्त मजदूर हो या किसान, उद्योग हो या फिर छोटा दुकानदार, सरकार को सबकी मदद करने का है। लेकिन न जाने क्यों केंद्र सरकार यह बात को समझने से लगातार इनकार कर रही है। इसलिए सभी कांग्रेस के साथियों ने फैसला किया है कि भारत की आवाज बुलंद करने के लिए यह सामाजिक अभियान चलाना है। उन्होंने केंद्र से आग्रह किया कि खजाने का ताला खोलिए और जरूरतमंदों को राहत दीजिए।

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सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार से की ये मांग

सोनिया गांधी ने मांग की कि सभी परिवार को 6 महीने के लिए 7,500 रुपए कैश का भुगतान करें। उसमें से दस हजार रुपए तुरंत दें। इसके साथ ही मजदूरों के मुफ्त और सुरक्षित यात्रा की व्यवस्था कर उन्हें घर पहुंचाया जाए और उनकी रोजी-रोटी और राशन की व्यवस्था करें। इसके अलावा उन्होंने मजदूरों के लिए मनरेगा में 200 दिन का काम सुनिश्चित करने की मांग की ताकि उन्हें गांव में ही रोजगार मिल सके।

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