कर्नाटक में फिर गहराया सियासी संकट! कुमारस्वामी से मिले BJP विधायक

कर्नाटक में बीजेपी के दो विधायकों ने पूर्व मुख्यमंत्री कुमारस्वामी से मुलाकात की है। इसके बाद प्रदेश में एक बार फिर राजनीतिक संकट गहराता दिखाई दे रहा है। बीजेपी विधायक उमेश कट्टी और गोलहट्टी शेखर ने कुमारस्वामी से मुलाकात की।

नई दिल्ली: कर्नाटक में बीजेपी के दो विधायकों ने पूर्व मुख्यमंत्री कुमारस्वामी से मुलाकात की है। इसके बाद प्रदेश में एक बार फिर राजनीतिक संकट गहराता दिखाई दे रहा है। बीजेपी विधायक उमेश कट्टी और गोलहट्टी शेखर ने कुमारस्वामी से मुलाकात की। इसके बाद बुधवार को दोनों विधायक कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से मुलाकात करना चाहते थे, लेकिन उन्हें इसके लिए समय नहीं दिया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी के उमेश कट्टी और गोलहट्टी शेखर ने कुमारस्वामी से मुलाकात के दौरान कर्नाटक के मौजूदा राजनीतिक हालात और छाए हुए सियासी संकट पर चर्चा की।

कुछ दिनों पहले कर्नाटक में कैबिनेट का विस्तार किया गया था, जिसमें दलबदलू नेताओं को मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया था। बीजेपी के पुराने नेताओं को इसमें जगह नहीं मिल सकी थी, जिसकी वजह से अब वे बगावत करते दिखाई दे रहे हैं।

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गौरतलब है कि कांग्रेस और जद(एस) छोड़कर बीजेपी में शामिल होने वाले और पार्टी के टिकट पर विधानसभा उपचुनाव जीतने वाले दस विधायकों को बीएस युदियुरप्पा ने अपने कैबिनेट विस्तार में मंत्रिमंडल में जगह दी थी। एसटी सोमशेखर (यशवंतपुर), जरकीहोली रमेश लक्ष्मण राव (गोकक), आनंद सिंह (विजयनगर), डॉ. के सुधाकर (चिक्कबल्लापुर), एचए वासवराज, अरावली हेब्बर शिवारम (येलापुर), बीसी पाटिल (हिरेकरपुर), के गोपालैया (महालक्ष्मी लेआउट), नारायण गौड़ा (कृष्णाराजापेट) और श्रीमंत बालासाहिब पाटिल (कागवाड) ने कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली थी।

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कर्नाटक सरकार में मंत्री पद न मिलने से बीजेपी के ही विधायकों ने मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कहा जा रहा है कि बीजेपी सरकार में कांग्रेस से आए बागियों को मंत्री बनाने पर पार्टी के अंदर असंतोष पैदा होता नजर आ रहा है। एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि बीजेपी के विधायकों की उनकी सालों की सेवा की अनदेखी की गई और उनकी कीमत पर कांग्रेस के बागियों को मंत्री पद से नवाजा गया।

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बता दें कि पिछले साल कांग्रेस के 13 और जेडी (एस) के चार विधायकों यानी कुल 17 विधायकों ने अपनी-अपनी पार्टी छोड़कर बीजेपी का दामन थामा था। इसी के चलते कर्नाटक में कुमारस्वामी और कांग्रेस की गठबंधन की सरकार गिर गई थी और बीजेपी की सरकार बन गई थी।