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राजस्थान सियासी संकट: एक तीर से दो शिकार करना चाहती है BJP! ये है पूरा मामला

राजस्थान की राजनीति बड़ा उतार चढ़ाव देखने को मिल रहा है। अब इस बीच राजस्थान में बीते कई दिनों से चल रहे सियासी संकट के बीच सूबे की कद्दावर बीजेपी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की रहस्यमयी चुप्पी चर्चा का विषय बन गई है।

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NewstrackBy Newstrack

Published on 16 July 2020 6:47 PM GMT

राजस्थान सियासी संकट: एक तीर से दो शिकार करना चाहती है BJP! ये है पूरा मामला
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जयपुर: राजस्थान की राजनीति बड़ा उतार चढ़ाव देखने को मिल रहा है। अब इस बीच राजस्थान में बीते कई दिनों से चल रहे सियासी संकट के बीच सूबे की कद्दावर बीजेपी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की रहस्यमयी चुप्पी चर्चा का विषय बन गई है। राजधानी में इतनी जबर्दस्त राजनीतिक गहमागहमी के बावजूद वे अभी तक धौलपुर से जयपुर नहीं आई हैं।

इस बीच राजस्थान में बीजेपी के सहयोगी दल राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (रालोपा) के सांसद हनुमान बेनीवाल ने वसुंधरा पर बड़ा आरोप लगाया है। उनका कहना है कि वसुंधरा गहलोत सरकार को बचाने में जुटी हुई हैं। इसके लिए उन्होंने राजस्थान कांग्रेस में अपने करीबी विधायकों को फोन तक किया है।

बेनीवाल का कहना है कि प्रदेश व देश की जनता वसुंधरा राजे और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बीच आंतरिक गठजोड़ की कहानी को समझ चुकी है। बेनीपाल के ट्वीट करने के बाद गहलोत वसुंधरा ट्विटर पर टॉप ट्रेंड में आ गया है।

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अब कहा जा रहा है कि बीजेपी का आलाकमान इस मामले पर संज्ञान लेता है, तो वसुंधरा राजे पार्टी में किनारे लगाई जा सकती हैं। जयपुर में बीजेपी की वरिष्ठ नेताओं की मीटिंग थी जिसमें वसुंधरा राजे ने शांमिल होने से इंकार कर दिया था। इसके बाद से ही उनकी चुप्पी पर सवाल खड़ हो रहे थे। सियासी गलियारे में पहले से ही चर्चा है कि वर्तमान नेतृत्व से वंसुधरा राजे की नहीं बनती है। लेकिन राजे ने इस बात से कई बार इंकार किया है।

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अब इस बीच खबर है कि सचिन पायलट की सदस्यता रद्द कर दी जाती है, तो गहलोत सरकार विधानसभा में आसानी से बहुमत हासिल कर लेगी। हालांकि सचिन पायलट सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हैं और फ्लोर टेस्ट की नौबत आई तो कांग्रेस की सरकार संकट में फंस सकती है।

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इसके साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि नौबत आए तो कांग्रेस और बीजेपी दोनों तरफ़ से विधायक गहलोत सरकार को बचाएंगे। ऐसे में बीजेपी का केन्द्रीय नेतृत्व एक तीर से दो शिकार करेगा। इस बहाने के वसुंधरा राजे को किनारे लगाने का मौका मिल जाएगा।

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