इन नेताओं ने राजनीति में अपना खुद कराया डिमोशन, नाम जान दंग रह जाएंगे

राजनीति एक ऐसी सीढ़ी है जिस पर दिन पर दिन इससे जुड़े लोग बढ़ने का ही प्रयास करते हैं। पर एक सत्य यह भी है कि कुछ नेता राजनीति की उंचाईयां छूने के बाद भी इससे जुड़े रहने के लिए हर तरह का समझौता करने को तैयार रहते हैं।

श्रीधर अग्निहोत्री
लखनऊ: राजनीति एक ऐसी सीढ़ी है जिस पर दिन पर दिन इससे जुड़े लोग बढ़ने का ही प्रयास करते हैं। पर एक सत्य यह भी है कि कुछ नेता राजनीति की उंचाईयां छूने के बाद भी इससे जुड़े रहने के लिए हर तरह का समझौता करने को तैयार रहते हैं। ऐसा समय समय पर कई प्रदेशों में देखने को मिला है जब कई राजनेता मुख्यमंत्री पद पर आसीन होने के बाद भी किसी अन्य मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री बनते रहे हैं। आईए आज आपको ऐसे ही नेताओं के बारे में बताते हैं।

अशोक शंकरराव चव्हाण

हाल ही में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके अशोक शंकरराव चव्हाण वहां की गठबंधन सरकार के मुखिया उद्वव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार में कैबिनेट मंत्री बने है। अशोक शंकरराव चव्हाण महाराष्ट्र में कांग्रेस की पूर्ण बहुमत की सरकार का नेतृत्व कर चुके हैं। वे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके शंकरराव चव्हाण के पुत्र हैं। अशोक शंकरराव चव्हाण महाराष्ट्र में दो बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं। वे ऐसे पहले मुख्यमंत्री नहीं हैं जो मुख्यमंत्री से मंत्री बने हैं।

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रामनरेश यादव

देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में ऐसा ही कुछ हुआ था। 1977 में प्रदेश में बनी पहली गैर कांग्रेसी सरकार के मुखिया रामनरेश यादव बने थे। राजनीति उठापटक के चलते उन्हें पद से हटाकर बनारसीदास गुप्ता को मुख्यमंत्री बनाया गया। बनारसीदास गुप्ता की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री रह चुके रामनरेश यादव को उपमुख्यमंत्री बनाया गया।

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बाबूलाल गौर

इसी तरह यूपी के पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश में उमा भारती के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद बाबू लाल गौर को मुख्यमंत्री बनाया गया। मध्यप्रदेश में भी यूपी जैसा इतिहास दोहराया गया। शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्री बनने के बाद मुख्यमंत्री रह चुके बाबूलाल गौर उन्हीं की कैबिनेट में गृह विभाग के मंत्री बने।

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राजिंदर भट्ठल

ऐसा ही राजनीतिक घटनाक्रम पंजाब में भी देखने को मिला जहां मुख्यमंत्री रह चुकी राजिन्दर कौर भट्ठल बाद में उपमुख्यमंत्री बनीं। राजिंदर भट्ठल पंजाब की लेहरा विधानसभा सीट से 1992 से 2017 तक विधायक रहीं। इसके अलावा वे राज्य की पहली और एकमात्र महिला मुख्यमंत्री रहीं। वे 2017 में विधानसभा चुनाव हार गई थीं। उन्हें शिरोमणि अकाली दल के परमिंदर सिंह ने हराया था।

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पन्नीरसेल्वम

इसी तरह तामिलनाडु में मुख्यमंत्री रहे पन्नीरसेल्वम को ही वहां की छह बार मुख्यमंत्री रही जयललिता का उत्तराधिकारी माना जाता है। जयललिता के जेल जाने या फिर अन्य कारणों के चलते जयललिता उन्हे मुख्यमंत्री बनाती थीं और बाद में जयललिता के पुनरूसत्तारूढ़ होते ही पन्नीरसेल्वम मंत्री पद पर आसीन हो जाते थे।

सुरेश मेहता

सुरेश मेहता 1995 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल के इस्तीफे के बाद मुख्यमंत्री बनाए गए। राजनीतिक उठापटक के बाद 1998 में जब भाजपा की सत्ता वापसी हुई तो केशुभाई पटेल गुजरात के मुख्यमंत्री बने और सुरेश मेहता की सरकार में उन्हे कैबिनेट मंत्री बनाया गया।