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कोरोना के इलाज में भूलकर भी ना लें ये दवा, जा सकती है जान

पूरी दुनिया इस समय कोरोना वायरस की दवा बनाने में जुटी हुई है। इस बीच एक नए शोध के अनुसार HCQ के साथ एजिथ्रोमाइसिन दवा नहीं लेनी चाहिए, क्योंकि इससे दिल संबंधी समस्या पैदा हो सकती है।

Aditya Mishra

Aditya MishraBy Aditya Mishra

Published on 13 Jun 2020 5:24 AM GMT

कोरोना के इलाज में भूलकर भी ना लें ये दवा, जा सकती है जान
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नई दिल्ली: पूरी दुनिया इस समय कोरोना वायरस की दवा बनाने में जुटी हुई है। इस बीच एक नए शोध के अनुसार HCQ के साथ एजिथ्रोमाइसिन दवा नहीं लेनी चाहिए, क्योंकि इससे दिल संबंधी समस्या पैदा हो सकती है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय कोरोना के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली दवा एजिथ्रोमाइसिन के उपयोग के प्रोटोकॉल में थोड़ा बदलाव कर सकती है।

अभी तक तो इस दवा का इस्तेमाल हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (HCQ) के साथ किया जाता है।इस वक्त कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों को ये दवा खिलाई जा रही है।

नाम न छापने की शर्त पर आईसीएमआर के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि HCQ के साथ एजिथ्रोमाइसिन दवा नहीं लेना चाहिए, क्योंकि इससे दिल संबंधी समस्या पैदा हो सकती है। इसके बजाय DoxyDoxycycline या amoxycyclin और Clavulunic Acid का इस्तेमाल किया जा सकता है।

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एंटी वायरल दवाएं ज्यादा कारगर नहीं

इलाज की पॉलिसी में धीरे-धीरे बदलाव हुआ है। पहले एजिथ्रोमाइसिन और एचसीक्यू दिया जाता था। अब हम अध्ययन के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि एजिथ्रोमाइसिन की जरूरत नहीं है।

एम्स के डिपार्टमेंट ऑफ मेडिसिन के प्रमुख और क्लिनिक्ल रिसर्च पर बने नेशनल टास्क फोर्स के सदस्य डॉ नवीत विग ने बताया कि" कोरोना से संक्रमित हल्के मरीज हों या फिर गंभीर मरीज, सबसे बड़ा पहलू oxygenation है, कोरोना वायरस के इलाज में एंटी वायरल दवाएं ज्यादा असरदार साबित नहीं हो रही हैं।

उन्होंने ये भी बताया कि "एजिथ्रोमाइसिन और एचसीक्यू का मेल केस टू केस पर निर्भर करता है। दिशानिर्देशों से सिर्फ गाइड किया जा सकता है। एंटी वायरल सिर्फ प्राथमिक अवस्था में काम करते हैं। इसके बाद Anti inflammatories की जरूरत पड़ती है।

साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि मरीजों को पहले एजिथ्रोमाइसिन भी दी जाती थी क्योंकि कई बार ये आशंका होती थी कि कोविड-19 से संक्रमित होने के बाद उसे बैक्टीरिया संक्रमण भी हो सकता है।

एम्स में नये नियम लागू

दिल्ली स्थित एम्स ने इस नये नियम का पालन भी शुरू कर दिया है। सूत्रों से मिली जानकारी के जून 10 को जारी ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल में एजिथ्रोमाइसिन का HCQ के साथ उपयोग करने का कोई उल्लेख नहीं है। इससे पहले आईसीएमआर ने सिफारिश की थी कि कोरोना के इलाज के लिए HCQ के साथ एजिथ्रोमाइसिन दी जा सकती है।

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किन –बीमारियों में लेते हैं एजिथ्रोमाइसिन

यहां आपको बता दें कि एजिथ्रोमाइसिन एक प्रकार की एंटी बॉयोटिक दवा है जो कि बैक्टीरिया के विकास को रोकता है।

इसका इस्तेमाल कई प्रकार के बैक्टीरिया जनित रोगों के इलाज में किया जाता है। जैसे कि न्यूमोनिया, ब्रोंकाइटिस, कान, गला, फेफड़े का संक्रमण और सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज। इन सभी बीमारियों में ये दवा ली जाती है।

कोरोना के उपचार में क्या है इस दवा का रोल

मालूम हो कि मार्च में फ्रांस में किए गए एक स्टडी से पता चला था कि इन दोनों दवाइयों का एक साथ इस्तेमाल वायरल लोड को कम करने में मददगार है। एजिथ्रोमाइसिन और एचसीक्यू के साथ-साथ इस्तेमाल को लेकर मरीज पर इसके असर को लेकर कई रिसर्च किए गए हैं।

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