Top

चीन की चुप्पी: सीमा पर मारे गए कितने चीनी सैनिक, क्यों नहीं बता रहे जिनपिंग

भारत की तरह से शहीद सैनिकों की पूरी लिस्ट जारी की गयी लेकिन चीन अपने सैनिकों को लेकर खामोश रहा। सवाल ये है कि चीन ने इस मामले में चुप्पी क्यों साधे रखी?

Shivani Awasthi

Shivani AwasthiBy Shivani Awasthi

Published on 18 Jun 2020 5:18 PM GMT

चीन की चुप्पी: सीमा पर मारे गए कितने चीनी सैनिक, क्यों नहीं बता रहे जिनपिंग
X
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print

लखनऊ: LAC के पास गलवान वैली में भारत और चीन की सेना के बीच हुई झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए लेकिन चीन के कितने सैनिक मारे गए, इसका सही आंकड़ा अभी तक जारी नहीं हुआ है। चीन की ओर से अब तक सीमा पर तैनात जवानों में शहीद हुए सैनिकों की संख्या नहीं बताई गयी है। चीन की मीडिया भी इस पर कोई टिप्पणी नहीं दे रही है।

सीमा विवाद में भारत के 20 जवान शहीद, चीनी सैनिकों का आंकड़ा जारी नही

सोमवार को जब दोनों देशों के बीच विवाद हुआ तो पहले भारतीय सेना के एक अधिकारी और दो जवानों के शहीद होने की जानकारी मिली। वहीं शाम तक 20 सैनिकों के शहीद होने की पुष्टि की गयी, हालाँकि मरने वाले चीनी सैनिकों की सही गिनती नहीं बताई गयी। भारत की मीडिया में 35 से 43 चीनी सैनिकों के हताहत होने की खबरे आई लेकिन पुष्टि नहीं हुई।

चीनी मीडिया भी मारे गए सैनिकों पर चुप

ताज्जुब की बात तो ये हैं कि जब इस झड़प को भारतीय मीडिया ने प्रमुखता से कवरेज दी तो चीनी मीडिया चीन और अफ्रीका के बीच हुए समिट पर फोकस कर रहा था। भारत की तरह से शहीद सैनिकों की पूरी लिस्ट जारी की गयी लेकिन चीन अपने सैनिकों को लेकर खामोश रहा। सवाल ये है कि चीन ने इस मामले में चुप्पी क्यों साधे रखी?

ये भी पढ़ेंः चीन के खिलाफ देश में आक्रोश: अब इस चीनी एप की जगह गूगल मीट से होगी चर्चा

जिनपिंग सरकार ने छीपा रही कमजोरी

कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि जिनपिंग सरकार ने अपनी कमजोरी छिपाने के ऐसा किया गया। यानी अगर उनके ज्यादा सैनिक मारे गए हैं तो वह इस नुकसान को कबूल नहीं करना चाहते। हालाँकि पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के वेस्टर्न थियेटर कमांड के प्रवक्ता सीनियर कर्नल झांग शुली ने गलवान घाटी में हुए संघर्ष में दोनों पक्षों के नुकसान की बात कहीं लेकिन उन्हें कितना नुकसान हुआ और कितने सैनिक मारे गए ये नहीं कबूला।

राष्ट्रपति जिनपिंग की इजाजत के बिना, नहीं जारी होंगे मृतक सैनिकों के आंकड़े

राष्ट्रपति जिनपिंग खुद अपने देश की मिलिट्री को कमांड करते हैं, ऐसे में चीनी सैनिकों को लेकर कोई भी आंकड़ा जारी करने से पहले या चीनी मीडिया द्वारा सेना संबंधित डाटा देने से पहले जिनपिंग से इजाजत लेनी होगी। इसीलिए माना जा रहा है कि चीनी राष्ट्रपति की मर्जी से आंकड़े उजागर नहीं किए जा रहे।

ये भी पढ़ेंः चीन के राष्ट्रपति की निकाली शव यात्रा, जलाया पुतला

अमेरिकी विदेश मंत्री संग बैठक हो सकती है चुप्पी की वजह

इसके अलावा चीन के वरिष्ठ राजनयिक यांग जिएची और अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो की हाल में ही बैठक होने वाली है। मन जा रहा है कि चीन इस बैठक में भारत-चीन विवाद मुद्दा न उठे, इसे लेकर भी चुप है।

1962 की जंग में मारे गए थे 2000 लोग, ये भी एक वजह

बता दें कि जिस गलवान घाटी में भारत चीन के बीच विवाद हुआ है, वहां इसके पहले साल 1962 में भी दोनों देशों के बीच संघर्ष हो चुका है। उस दौरान करीब 2 हजार लोगों की मौत हुई थी। इसलिए चीन इसे संवेदनशील मामला मानते हुए सावधानी बरत रहा है।

ये भी पढ़ेंः भारत से पंगा चीन को पड़ा भारी: उठाये ऐसे कदम, चारों तरफ से घिरा

भारत से जंग नहीं चाहता चीन, इसलिए चुप

एक रिपोर्ट के मुताबिक कहा जा रहा है कि चीन की चुप्पी की वजह ये भी है कि वह भारत के साथ जंग नहीं चाहता। इसकी वजह ये नहीं कि वह जंग से डरता है, बल्कि भारत से रिश्ते खराब होने से पाकिस्तान-चीन के सम्बन्ध भी प्रभावित होंगे तो वहीं डोनाल्ड ट्रंप की हिंद-प्रशांत की रणनीति पर भी असर डालेगा।

india vs china

चीन के आर्थिक विकास को भी झटका लग सकता है। वहीं अगर जंग हुई तो 1962 के जैसा ही माहौल होगा, वैश्विक ताकते मदद के लिए आगे नहीं आएँगी।

देश दुनिया की और खबरों को तेजी से जानने के लिए बनें रहें न्यूजट्रैक के साथ। हमें फेसबुक पर फॉलों करने के लिए @newstrack और ट्विटर पर फॉलो करने के लिए @newstrackmedia पर क्लिक करें।

Shivani Awasthi

Shivani Awasthi

Next Story