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सीमा पर तनाव: एक ओर बातचीत का नाटक, दूसरी ओर चीन का ये खतरनाक खेल

लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन मुख में राम, बगल में छुरी वाली कहावत को चरितार्थ करता दिख रहा है। गत पांच मई को लद्दाख की गलवान घाटी में अपने सैनिकों की तैनाती के बाद चीन लगातार शातिर चालें चल रहा है।

Dharmendra kumar

Dharmendra kumarBy Dharmendra kumar

Published on 17 Jun 2020 6:30 PM GMT

सीमा पर तनाव: एक ओर बातचीत का नाटक, दूसरी ओर चीन का ये खतरनाक खेल
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अंशुमान तिवारी

नई दिल्ली: लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन मुख में राम, बगल में छुरी वाली कहावत को चरितार्थ करता दिख रहा है। गत पांच मई को लद्दाख की गलवान घाटी में अपने सैनिकों की तैनाती के बाद चीन लगातार शातिर चालें चल रहा है। एक ओर वह इस इलाके में विवाद के समाधान के लिए बातचीत का नाटक कर रहा है तो दूसरी ओर भीतर ही भीतर पूरी तरह एक्शन मोड में भी दिख रहा है। भारत के साथ हिंसक झड़प के बाद चीन की सेना और विदेश मंत्रालय के बीच दिख रहा तालमेल इस बात का संकेत माना जा रहा है कि चीन ने काफी सोची समझी साजिश के तहत इस घटना को अंजाम दिया है।

गलवान क्षेत्र को बताया चीन का हिस्सा

चीन की सेना की ओर से मंगलवार को इस पूरे इलाके को अपना हिस्सा बताया गया और बुधवार को चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में गलवान घाटी को हमेशा से चीन का हिस्सा बताया गया। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झांग लिजियन ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि गलवान क्षेत्र हमेशा से चीन के नियंत्रण में रहा है। उनका कहना था कि भारतीय सैनिक इस इलाके में आते-जाते रहे हैं और उन्होंने हमारे सीमा संबंधी नियमों का घोर उल्लंघन किया है।

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उन्होंने पूरे इलाके पर दावा करते हुए कहा कि इसके बाद अब विवाद की कोई गुंजाइश नहीं रह जाती है। लिजियन से पहले चीन के वेस्टर्न वार जोन के प्रवक्ता सीनियर कर्नल झांग शूइली ने भी ऐसा ही दावा किया था। उनका भी कहना था कि गलवान घाटी का पूरा इलाका हमेशा से चीन के नियंत्रण में ही रहा है।

पूरी तैयारी के साथ चीन की घुसपैठ

चीन की सेना की ओर से जारी बयान के बाद विदेश मंत्रालय की ओर से भी वैसी राय दिए जाने से पता चलता है कि चीन ने पूरी तैयारी के साथ इस बार गलवान घाटी इलाके में घुसपैठ की है। सेना और विदेश मंत्रालय दोनों की ओर से जारी बयान में भारत के साथ सीमा विवाद को बातचीत के जरिए सुलझा लेने का दावा तो जरूर किया गया है मगर चीन इस मामले में शातिर चालें चलकर भारत को मात देने की साजिश में भी जुटा हुआ है।

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जानकारों का कहना है कि चीन के बयानों को गौर से देखने की जरूरत है। एक ओर वह इस पूरे इलाके को अपना हिस्सा भी बता रहा है और दूसरी ओर खुद को पीड़ित बताते हुए सारा दोष भारत पर मढ़ने की कोशिश भी कर रहा है।

दुनिया का ध्यान भटकाने की कोशिश

जानकारों का कहना है कि कोरोना वायरस को लेकर दुनिया में चौतरफा घिरा चीन भारत के साथ सीमा विवाद के जरिए पूरी दुनिया का ध्यान भटकाने की कोशिश में जुटा हुआ है। वह दुनिया के सामने सीमा विवाद को बातचीत के जरिए शांति से सुलझाने का दिखावा कर रहा है, तो दूसरी तरफ भारत के साथ हिंसक झड़प में भारत को ही बदनाम करने की साजिश भी रच रहा है। जानकारों का कहना है कि चीन इस खूनी संघर्ष के लिए लगातार भारत का दोषी ठहरा रहा है जबकि हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।

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भारत पर लगाए झूठे आरोप

चीन की ओर से भारत को बदनाम करने की साजिश पहले ही रची गई थी और सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने भारत पर झूठे आरोप लगाकर उसे बदनाम करने की कोशिश की थी। इसके बाद चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भारत के खिलाफ जहर उगलकर रही सही कसर भी पूरी कर दी। चीन के विदेश मंत्रालय का कहना है कि हमने भारत से कहा है कि वह अपने सैनिकों को अनुशासित करे और उन्हें सीमा पर उकसाने वाली कार्रवाई करने से तत्काल रोके। चीन की ओर से दुनिया को दिखाने के लिए इस तरह का बयान जारी किया जा रहा है जबकि सच्चाई यह है कि उकसाने वाली कार्रवाई चीन की ओर से ही की गई है।

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चीन कर रहा उकसाने वाली कार्रवाई

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के दावों के विपरीत सच्चाई यह है कि चीन पूरी तैयारी के साथ गलवान घाटी में अपने सैनिकों के साथ उतरा है और उसके सैनिक लगातार वास्तविक नियंत्रण रेखा का उल्लंघन कर रहे हैं। चीनी सैनिकों की ओर से लगातार उकसाने वाली कार्रवाई की जा रही है जबकि भारत इस मामले को बातचीत के जरिए सुलझाने पर जोर देता रहा है। चीन के दोहरे रवैये से समझा जा सकता है कि वह मुख में राम, बगल में छुरी वाली कहावत को पूरी तरह चरितार्थ कर रहा है।

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