राम मंदिर:‘‘याचना नहीं अब रण होगा, संघर्ष बड़ा भीषण होगा’’

महंत अवैद्य नाथ के नेतृत्व में ही राममंदिर निर्माण के संकल्प के साथ ही अयोध्या के सरयू तट से षुरू हुई एक धर्म यात्रा सत्ता के केन्द्र लखनऊ तक पहुंची। इसके बाद यहीं से आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली।

Published by Rahul Joy Published: August 3, 2020 | 4:19 pm

श्रीधर अग्निहोत्री

लखनऊ। आज जब लाखों हिन्दुओं की आस्था को केन्द्र राममंदिर का शिलान्यास होने जा रहा है। तो इसके पीछे जहां पूरे देश के सनातन धर्मावलम्बियों की आस्था ने इसका मार्ग प्रशस्त किया तो वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश में महंत अवैद्यनाथ ने सांसद रहते हुए इस आंदोलन का नेतृत्व करने में अपनी बखूबी भूमिका निर्वहन किया।

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सांसद के तौर पर हिंदुत्व की अलख जलाई

गोरखधाम मंदिर के पीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ जी का जन्म 28 मई 1921 के जन्म ग्राम काण्डी, जिला पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड में राय सिंह बिष्ट के घर हुआ था। पीठाधीष्वर के साथ ही एक सांसद के तौर पर श्री अवैद्यनाथ जी ने हिन्दू धर्म की आध्यात्मिक साधना के साथ हिन्दू जनजागरण को आगे बढाने तथा अयोध्या आंदोलन में अपनी महती भूमिका निभाई है। 21 जुलाई 1984 को अयोध्या के वाल्मीकि भवन में महंत अवेद्यनाथ की देखरेख में श्रीराम जन्म भूमि आंदोलन की पूर्वी यूपी से बही हवा पूरे प्रदेश से होते हुए अन्य राज्यों तक पहुची।

नई दिल्ली के वोट क्लब में करवाया विराट हिन्दू सम्मलेन

महंत अवैद्य नाथ के नेतृत्व में ही राममंदिर निर्माण के संकल्प के साथ ही अयोध्या के सरयू तट से षुरू हुई एक धर्म यात्रा सत्ता के केन्द्र लखनऊ तक पहुंची। इसके बाद यहीं से आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। समाज में अस्पृश्यता और ऊंच-नीच की भावनाओं के खिलाफ अवैद्यनाथ ने आंदोलन खड़ा किया था। 21 जुलाई 1984 को जब राम जन्मभूमि यज्ञ समिति का गठन किया गया तो महंत अवैद्यनाथ को इसका अध्यक्ष चुना गया था।

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रोष में आकर कहा याचना नहीं अब रण होगा.संधर्ष बड़ा भीषण होगा

तय कार्यक्रम के अनुसार एक विराट हिन्दू सम्मेलन का आयोजन 22 सितंबर 1989 को नई दिल्ली के वोट क्लब में किया गया। जहां पर इस बात का फैसला हुआ कि अयोध्या के रामजन्म भूमि पर मंदिर निर्माण के लिए 9 नवंबर 1989 को शिलान्यास किया जाएगा। इसके अलावा 1989 में जब लोकसभा का चुनाव हुआ तो एक प्रत्याशी के तौर राममदिर निर्माण को लेकर जनसभाओं में महंत अवेद्यनाथ हिन्दुत्व की बात करते रहे। पहली बार 21 नवंबर 1990 को महंत अवेद्यनाथ ने रोष में आकर मंच से कहा कि याचना नहीं अब रण होगा. संधर्ष बड़ा भीषण होगा।

लोकसभा चुनाव में मंदिर और रोटी को बताया अपना चुनावी मुद्दा

लोकसभा चुनाव में श्रीराम जन्म भूमि और रोटी को ही महंम अवैद्यनाथ ने अपना मुद्दा बताया। 29 जुलाई 1992 को महंत अवैद्यनाथ ने लोकसभा में कहा कि पूर्वाग्रह की वजह से रामजन्म भूमि मुद्दा हल नहीं हो पा रहा है। वह नरसिम्हा राव सरकार को बराबर चेतावनी देते रहते थें। जब 30 अक्टूबर 1992 को दिल्ली में पांचवीं बार धर्म संसद का आयोजन किया गया तो उन्होंने एक बार फिर कांग्रेस सरकार को चेताते हुए तीन महीने का समय दिया पर सरकार के न चेतने का परिणाम यह रहा कि 6 दिसम्बर को बाबरी ढांचा विध्वसं हो गया।

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