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देश के ये शहर कोरोना से बचने में निकले आगे, जानें क्या हैं खासियत

देश में जिन स्थानों की कोरोना के उपायों को लेकर ख़ास चर्चा हो राही है। उनमें UP के आगरा, राजस्थान के भीलवाड़ा, और केरल के पथनमथिट्टा की विशेष चर्चा हो रही है।

Aradhya Tripathi

Aradhya TripathiBy Aradhya Tripathi

Published on 15 April 2020 7:28 AM GMT

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पूरा देश इस समय कोरोना वायरस की वैश्विक महामारी से जूझ रहा है। ऐसे में देश को इस वायरस से निजात दिलाने के लिए केन्द्र सरकार के साथ साथ देश के सभी राज्यों की सरकारे निरंतर प्रयास कर रहीं हैं। जिसके चलते राज्य सरकारों द्वारा अपने अपने राज्य में अलग अलग तरीकों को व उपायों को अपनाया जा रहा है। ऐसे में देश में कुछ ऐसे भी स्थान हैं जिनके द्वारा अपनाए गए उपायों को काफी सराहा जा रहा है। यहां हम आपको बताते हैं कि कौन से हैं वो स्थान और क्या हैं उनके द्वारा अपनाए गए खास उपाय।

आगरा, भीलवाड़ा और पथनमथिट्टा मॉडल की चर्चा

देश में जिन स्थानों की कोरोना के उपायों को अपनाने को लेकर ख़ास चर्चा हो राही है। उनमें उत्तर प्रदेश के आगरा, राजस्थान के भीलवाड़ा, और केरल के पथनमथिट्टा की विशेष चर्चा हो रही है। इन स्थानों द्वारा अपनाए गए उपायों को अब स्थान विशेष, यथा- आगरा मॉडल, भीलवाड़ा मॉडल तथा पथनमथिट्टा मॉडल के नाम से जाना जाने लगा है। यद्यपि स्वास्थ्य नीति के विशेषज्ञों का मानना है कि सब जगह एक-सी बात नहीं हो सकती। अब एक एक कर जानते हैं कि क्या खास किया है इन मॉडलों ने जो ये चर्चा का विषय बन गए हैं।

शुरूआती समय में कोरोना का हॉटस्पॉट भीलवाड़ा

राजस्थान का भीलवाड़ा वो स्थान है जो शुरुआत में कोरोना का एक हॉटस्पॉट होता था। लेकिन सख्त कंटेनमेंट रणनीति के कारण अब यह भीलवाड़ा मॉडल के रूप में प्रसिद्ध हो गया है। जिला कलेक्टर कार्यालय की 26 मार्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भीलवाड़ा में पहला पॉजिटिव केस 19 मार्च को एक निजी हॉस्पिटल के डॉक्टर का सामने आया। 19 से लेकर 26 मार्च तक उस अस्पताल में पॉजिटिव केसों की संख्या बढ़कर 17 हो गई। जिनमें सभी अस्पताल कर्मी तथा अन्य रोगी थे।

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राजस्थान सरकार के लिए यह एक संकट की स्थिति बन गई, क्योंकि जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने से पहले उक्त डॉक्टर का अपने नर्सिंग स्टाफ, अन्य रोगियों समेत अन्य बहुत सारे लोगों से संपर्क हुआ। इस संकट से निपटने के लिए सीआरपीसी की धारा 144 लागू कर शहर को पूरी तरह से आइसोलेट कर दिया गया। पहले चरण में तो जरूरी सेवाओं को बहाल रखा गया लेकिन दूसरे चरण में शहर में संपूर्ण शटडाउन किया गया।

सरकार ने शीघ्र युद्धस्तर पर किया काम

जिसके बाद पूरे जिले की सीमाएं सील कर दी गईं और सभी प्रवेश और निकास मार्गों पर चेकपोस्ट लगा दिये गये। ट्रेन, बस और कारों का आवागमन रोक दिया गया। पड़ोसी जिलों के कलेक्टरों को भी अपनी सीमाएं सील करने को कहा गया। आमतौर पर एपिसेंटर से तीन किलोमीटर का दायरा कंटेनमेंट जोन तथा 7 किलोमीटर का क्षेत्र बफर जोन होता है। कंटेनमेंट तथा बफर जोन में आवागमन पूरी तरह बंद कर कोविड-19 केसों की कलस्टर मैपिंग की गई। छह क्षेत्रों की पहचान कर संदिग्ध केसों की लगातार जांच के लिए विशेष टीमें तैनात की गईं।

कंटेनमेंट और बफर जोन, सभी एंबुलेंसों तथा पुलिस वाहनों, जांच व क्वारंटाइन केंद्रों, कलेक्टोरेट, पुलिस लाइन तथा अन्य दफ्तरों को रोजाना आधार पर विसंक्रमित किया गया। इसके अतिरिक्त भीलवाड़ा में 3,072 टीमों को लगाया गया, जिसने 2,14,647 घरों के 10,71,315 लोगों का सर्वे किया। इनमें से 4,258 मामले इंफ्लूएंजा जैसी बीमारी के सामने आए और उनकी कोविड-19 के लिए जांच हुई। चार निजी अस्पतालों का अधिग्रहण किया गया, जिनमें प्रत्येक में 25 आइसोलेशन बेड थे।

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27 होटलों में 1,541 कमरों का क्वारंटाइन सेंटर बनाया गया। हालांकि इनमें सिर्फ 950 लोगों को ही रखा गया जबकि 7,620 लोग घर में ही क्वारंटाइन किये गये। किराना, फल-सब्जी तथा दूध की घर-घर आपूर्ति की गई। जरूरतमंदों को कच्चा और पके खाने के पैकेट वितरित किए गए और उद्योगों, फैक्ट्रियों और ईंट भट्ठों को पूरी तरह बंद कर दिया गया। स्वास्थ्य मंत्रालय के डाटा के मुताबिक, भीलवाड़ा में कुल 28 केस सामने आए।

आगरा में वार रूम बना कर किया सामना

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आगरा में मार्च की शुरुआत में कोरोना का प्रथम केस सामने आया। दो लोग अपने रिश्तेदारों के साथ आस्ट्रिया गए और बाद में दिल्ली के पहले कोविड-19 केस बने। बाद में जब ये लोग लौटकर आगरा अपने घर गए तो आगरा पहुँचने के कुछ दिनों बाद छह पॉजिटिव केस पाये गये। जिला प्रशासन तथा इंटेग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम अमले ने उनके संपर्कों की पड़ताल के लिए सघन अभियान चलाया। रिपोर्ट पॉजिटिव केस सामने आने के बाद तत्काल आगरा के लोहा मंडी में तीन किलोमीटर के इलाके की घेराबंदी कर दी गई और 1,248 टीमों ने 1,65,000 घरों में संपर्क की पड़ताल का सघन अभियान चलाया। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर बयान जारी कर बताया गया कि राज्य तथा जिला प्रशासन और फ्रंटलाइन वर्करों ने स्मार्ट सिटी इंटीग्रेटेड विद कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आइसीसीसी) को वार रूम की तरह इस्तेमाल कर समन्वित प्रयास किये।

1,248 टीमें पहुँचीं 9.3 लाख लोगों तक

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कलस्टर कंटेनमेंट और आउटब्रेक कंटेनमेंट के तहत जिला प्रशासन ने एपिसेंटर तथा पॉजिटिव पुष्ट मामलों के प्रभाव को चिह्नित कर अपनी सूक्ष्म स्तरीय योजना के तहत विशेष टास्क फोर्स को तैनात कर दिया। हॉटस्पॉट का प्रबंधन एवं सर्वेक्षण कंटेनमेंट योजना के तहत किया गया। एपिसेंटर से तीन किलोमीटर के दायरे को चिह्नित किया गया जबकि 5 किलोमीटर के दायरे में आने वाले इलाके को कंटेनमेंट जोन के रूप में चिह्नित किया। सघन जांच अभियान चलाने के लिए कंटेनमेंट जोन में शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की मदद ली गई। कुल 1,248 टीमें बनीं, जिनमें एएनएम/आशा/एडब्ल्यूडब्ल्यू वर्करों के दो-दो सदस्य शामिल थे और ये लोग घर-घर जांच के जरिये 9.3 लाख लोगों तक पहुंचे। इसके अतिरिक्त उनके संपर्कों की भी प्रभावी पड़ताल कर व्यापक मैपिंग की।

तकनीक प्रयोग कर मॉडल बना पथनमथिट्टा

केरल के पथनमथिट्टा मॉडल की पहचान तकनीक रही है। जिले में पहला केस मार्च की शुरुआत में उस समय आया, जब इटली से लौटे एक परिवार के तीन सदस्यों ने मिलने-जुलने के क्रम में कई लोगों को संक्रमित कर दिया। इससे संक्रमितों की संख्या 16 तक पहुंच गई। यहां भी सीमा को सील करने तथा संपर्कों की पड़ताल की गई। जिले में आने वाले हर व्यक्ति की स्क्रीनिंग की गई। डाटाबेस तैयार किया गया। पॉजिटिव लोगों के यात्रा मार्ग का ग्राफिक्स तैयार कर उसे प्रकाशित किया गया।

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इसमें 29 फरवरी से 6 मार्च तक परिवार कहां-कहां गया और उनके संभावित संपर्कों का भी ब्योरा दिया गया। इसका फायदा यह हुआ कि लोग खुद ही रिपोर्ट करने लगे। यात्रा मार्ग के नक्शे से कई लोगों को ऐसा लगा कि हो सकता है कि वे कोविड-19 पॉजिटिव लोगों के संपर्क में आए हों और उन्होंने खुद से ही जांच या इलाज करवाने की पहल की।

छात्रों ने बनाया कोरोना आरएम ऐप

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जिन लोगों को क्वारंटाइन किया गया, उन पर एक कॉल सेंटर के जरिये रोजाना नजर रखी गई और सीमा सील होने से पहले जिले में प्रवेश करने वाले करीब 4,000 लोगों पर स्वास्थ्य कर्मियों की 14 टीमों ने निगरानी रखी। आइएचआरडी कॉलेज, चेंगान्नूर के इंजीनियरिंग छात्रों ने ‘कोरोना आरएम’ नामक एक एप भी बनाया। इस एप जरिये उन लोगों पर निगरानी रखी गई, जिन्हें घर में क्वारंटाइन किया गया था। इस एप से तत्काल ही पता चलता था कि क्वारंटाइन किये गये लोग कहां हैं और क्या वे उसका उल्लंघन कर रहे हैं। इन उपायों का परिणाम यह रहा कि केरल में पिछले दस में से छह दिनों में नये मामलों की वृद्धि दर इकाई अंक में आ गई है।

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