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कंपनियों को भाया ये कल्चरः स्थायी हो सकता है वर्क फ्राम होम, हो जाएं तैयार

नियोक्ता छोटे दफ्तरों का इस्तेमाल करके बचत कर रहे हैं। मॉर्गन स्टैनली कंपनी का तो कहना है कि आफिस में कोई भी न आये, तब भी चलेगा। भारत में भी कई आईटी कम्पनियाँ और निजी बैंक अब आफिस स्पेस कम करने की सोच रहे हैं।

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NewstrackBy Newstrack

Published on 21 July 2020 6:41 AM GMT

कंपनियों को भाया ये कल्चरः स्थायी हो सकता है वर्क फ्राम होम, हो जाएं तैयार
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नील मणि लाल

लखनऊ। कोरोना के चलते पूरी दुनिया में वर्क फ्रॉम होम अब नया नॉर्मल हो गया है। वैसे तो आईटी कंपनियों में काफी समय से वर्क फ्रॉम होम का सिस्टम प्रचलन में है लेकिन बाकी सेक्टरों में ये काम ही प्रचलित है। अब लगभग सभी सेक्टरों में घर से ही काम हो रहा है।

कई देशों ने वर्क फ्रॉम होम को अनिवार्य भी कर दिया है। कोरोना काल में आया वर्क फ्रॉम होम अब या तो स्थाई रूप ले लेगा या अनिश्चित काल तक बना रहेगा क्योंकि कंपनियां अब यही चाहती हैं। दरअसल बीते तीन साढ़े तीन महीनों से चल रहे एक वृहद और अनियोजित सामाजिक एक्सपेरिमेंट ने अफिस में बैठ कर काम करने वालों को केबिनों और वर्क स्टेशनों से उठा कर बेडरूम या ड्राइंगरूम में बैठा दिया है।

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फायदे का सौदा

बहुत सी कम्पनियों और नियोक्ताओं को अपने कर्मचारियों से वर्क फ्रॉम होम कराने में ज्यादा फायदा नजर आ रहा है। ट्विटर और फेसबुक जैसी टेक कंपनियों ने अपने यहां स्थाई रूप से वर्क फ्रॉम होम लागू कर दिया है। इन्होंने अपने कर्मचारियों से कह दिया है कि वे अब घर से ही काम करें। इसके अलावा गूगल ने अगले साल तक के लिए ये व्यवस्था लागू कर दी है।

और तो और, अमेरिका की ९४ साल पुराणी नेशनवाइड इंश्योरेंस में वर्क फ्रॉम होम कोरोना महामारी के दौरान इतनी बढ़िया तरीके से चला कि अब इस कंपनी ने अपने पांच रीजनल आफिसों को बंद करने का फैसला कर लिया है। इसके हजारों कर्मचारी अब रोज रोज दफ्तर न जा कर अब स्थाई रूप से घर से ही काम करेंगे।

बात पैसा बचाने की है

कोई भी बिजनेस हो, फोकस हमेशा पैसा बचाने पर रहता है। अब महामारी के संकटकाल में तो इस बात पर ज्यादा ही जोर है। रिमोट वर्क कराके कंपनियों को पैसे की अच्छी खासी बचत दिखाई दी है। मंदी और घाटे के दौर में बिजनेस ओनर हमेशा खर्चे घटाने के उपाय सोचते रहते हैं। रिमोट वर्किंग से बिजली, इन्टरनेट, हाउसकीपिंग आदि का काफी खर्चा बचा कर नियोक्ताओं को नयी व्यवस्था बहुत मुफीद लग रही है। और तो और, कर्मचारियों की प्रोडक्टिविटी भी बिना आफिस आये उतनी ही बनी हुई है।

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कमर्शियल रियल एस्टेट की डिमांड घटी

महामारी, मंदी और रिमोट वर्किंग से कमर्शियल रियल एस्टेट की मांग प्रभावित हुई है। नियोक्ता छोटे दफ्तरों का इस्तेमाल करके बचत कर रहे हैं। मॉर्गन स्टैनली कंपनी का तो कहना है कि आफिस में कोई भी न आये, तब भी चलेगा। भारत में भी कई आईटी कम्पनियाँ और निजी बैंक अब आफिस स्पेस कम करने की सोच रहे हैं।

घर में आफिस जैसी प्रोडक्टिविटी

ग्लोबल वर्कप्लेस एनालिटिक्स के एक सर्वे के अनुसार वर्क फ्रॉम होम कर रहे ७७ फीसदी कर्मचारियों का कहना है कि वे जितनी प्रोडक्टिविटी से आफिस में काम करते हैं उतना ही घर से कर रहे हैं। कर्मचारियों के लिए घर से काम करने के फायदे भी बहुत हैं।

- रोज आफिस जाने के लिए ट्रैफिक के झंझट से मुक्ति मिली हुई है।

- पार्किंग की समस्या से छुटकारा मिला है।

- रोजाना आने जाने में लगने वाला समय और खर्चे की बचत है।

- प्रदूषण से छुटकारा मिला है।

- आफिस के बंद वातावरण में हर समय वायरस के खौफ से मुक्ति है।

शिकायतें भी हैं

रिमोट वर्क के फायदे कम्पनियाँ और नियोक्ता तो बहुत समझ में आ रहे हैं लेकिन कर्मचारियों को शिकायतें भी हैं। ग्लोबल वर्कप्लेस एनालिटिक्स के अनुसार सभी कर्मचारी और उनके बॉस रिमोट वर्क से खुश नहीं हैं।

कर्मचारियों की सबसे बड़ी शिकायत है कि रिमोट वर्क में वे चौबीसों घंटे ऑन द जॉब रहते हैं। कर्मचारियों का कहना है कि उनके बॉस शायद ये समझते हैं कि कर्मचारी घर पर आराम करता रहता है इसलिए उसपर काम पर काम लादते चले जाओ। इसके अलावा घर पर दस तरह के व्यवधान आते रहते हैं, परिवारवाले कुछ न कुछ काम अलग बताते रहते हैं।

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इसके अलावा भी कई कारण हैं जो घर से काम करने को एक बेहतर अनुभव नहीं बनाते।

- रिमोट वर्किंग में कर्मचारियों के लिए सबसे कठिन चीज रहती है आफिस जैसा माहौल न मिलना। ग्लोबल एनालिटिक्स के अनुसार लोग घर से काम करते वक्त अपने सहकर्मियों के साथ होने वाली हलकी फुलकी बातों को मिस करते हैं।

- रिमोट वर्क में लोगों को लगता है कि वे अदृश्य हो गए हैं, उनका अस्तित्व खत्म हो रहा है और ऐसे में कर्मचारी अधिक से अधिक काम करने और अपनी उपस्थिति हर समय दर्ज कराने के लिए उत्सुक रहते हैं।

- कर्मचारियों को अब लगने लगा है कि वर्क फ्रॉम होम का मतलब है हमेशा उपलब्ध रहना। आफिस में तो काम के निश्चित घंटे होते हैं लेकिन रिमोट वर्किंग में घर २४ घंटे का आफिस हो गया है। ज़ूम कॉल्स और कॉल कांफ्रेंसिंग हर वक्त लगी रहती है। काम का बोझ हर वक्त डाला जाने लगा है क्योंकि कंपनियों को पता है कि संकट और मंदी के इस दौर में कर्मचारी कहीं और जा भी तो नहीं सकते।

- सबसे बड़ी बात ये कि अब निजी जिन्दगी और ऑफिस की जिन्दगी के बीच फर्क लगभग खत्म हो गया है कर्मचारियों से अपेक्षा की जाने लगी है कि वे हर वक्त उपलब्ध रहेंगे। वीक एंड भी अब वर्किंग डे हो गए हैं क्योंकि नियोक्ता ये समझते हैं कि वर्तमान हालातों में कर्मचारी घर पर ही तो रहेंगे। इसके अलावा वर्क फ्रॉम होम में कर्मचारियों का बिजली और इन्टरनेट का खर्चा काफी बढ़ गया है।

वर्क फ्रॉम होम के लिए अब कई कंसल्टेंसी भी आ गयीं हैं जो नियोक्ता और कर्मचारी, दोनों को सलाह देतीं हैं कि एक सकारात्मक माहौल कैसे बनाया जाये और आफिस जैसा माहौल घर ही कैसे क्रियेट किया जाए।

- अपने आफिस की चेयर एक चेयर घर पर अपने काम के लिए खरीद लें। इससे आप ज्यादा आराम और सुकून से काम कर पाएंगे क्योंकि घर पर आपके काम करने की व्यवस्थाएं छिटपुट काम करने के लिए होती हैं।

- घर पर रोजाना काम शुरू करने से पहले ठीक उसी तरह तैयार होने जैसे आफिस जाने के लिए होते हैं। भले ही सूट टाई, जूते न पहनें लेकिन नहा-धो कर पैंट शर्ट तो जरूर पहनें।

- घर पर अपने काम की एक निश्चित जगह या टेबल बना लें। जहाँ कहीं और कैसे भी बैठ कर देर तक काम करने से पीठ और गर्दन की समस्याएं घेर लेंगी।

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आईएलओ का नियम

भारत में कर्मचारी हफ्ते में ४८ घंटे से कहीं ज्यादा काम कर रहे हैं जबकि अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएललो) ने सप्ताह में ४८ घंटे काम की लिमिट बाँध रखी है। आईएलओ की वेबसाइट के अनुसार प्रति सप्ताह काम का जनरल स्टैण्डर्ड ४८ घंटे का है और एक दिन में अधिकतम ८ घंटे ही काम कराया जाना चाहिए। लेकिन स्थिति का एक नमूना माइक्रोसॉफ्ट के एक डेटा से पता चलता है। माइक्रोसॉफ्ट टीम्स एक अप्लिकेशन है जिसमें आफिस की तरह रिमोट मीटिंगें की जाती हैं। अप्रैल में माइक्रोसॉफ्ट टीम्स पर एक दिन में ही करोड़ लोग मीटिंगों में शामिल हुए। २९ अप्रैल को एक दिन में 4.1 अरब मीटिंग मिनट्स का नया दैनिक रिकार्ड बन गया।

कंपनियों की पहल

- गूगल ने अपने कर्मचारियों के स्ट्रेस और चिंता को समझते हुए मई में ही छुट्टी की घोषणा कर दी थी ताकि कर्मचारी रिलैक्स कर सकें।

- लोकप्रिय गेमिंग ऐप ड्रीम 11 की निर्माता कंपनी ड्रीमस्पोर्ट्स ने मीटिंगों का बढ़ता बोझ देख कर ऐलान किया है कि गुरुवार को नो मीटिंग डे रहेगा। इसके अलावा किसी भी दिन दो मीटिंगों के बीच कम से कम चार घंटे का गैप रहा करेगा और रोजाना लंच ब्रेक एक की बजाये डेढ़ घंटे का हुआ करेगा।

- बंगलुरु की रेज़रपे नामक आईटी कंपनी ने अपने कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम अलाउंस देना शुरू किया है। कंपनी का कहना है कि उसके कर्मचारी घर पर आराम से काम कर सकें ये सुनिश्चित करना भी एक बड़ी जिम्मेदारी है। लोगों के घरों में हाईस्पीड नेट कनेक्शन नहीं होते, आफिस चेयर नहीं होती सो रेज़रपे कंपनी ने इसकी व्यवस्था भी अपनी तरफ से करा दी है।

- बंगलुरु के एक एचआर स्टार्टअप ‘स्प्रिंग वर्क्स’ ने आफिस में खाली पड़ी कुर्सियों को अपने कर्मचारियों के घर भिजवा दिया है साथ ही हाई स्पीड नेट कनेक्शन आफिस की तरफ से लगवाए गए हैं।

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