कंडक्टर मां के बेटे का कमाल, भारत की झोली में डाल दिया एशिया कप

भारत की निराशाजनक बल्लेबाजी के कारण किसी को इस मुकाबले में जीत की उम्मीद नहीं थी मगर अथर्व ने शानदार गेंदबाजी करते हुए भारत को असंभव लग रही जीत दिला दी। भारतीय टीम ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया था। टीम के बल्लेबाजों ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया और पूरी टीम 32.4 ओवर में सिर्फ 106 रन बनाकर ऑल आउट हो गई।

लखनऊ: भारत ने एशिया कप अंडर-19 फाइनल में भारत ने बांग्लादेश को पांच रन से हराकर खिताब जीता। भारत को जीत दिलाने में 18 साल के अथर्व विनोद अंकोलेकर की सबसे बड़ी भूमिका रही। बाएं हाथ के स्पिनर अथर्व ने कोलंबो के आर.प्रेमदासा स्टेडियम में 28 रन देकर पांच विकेट लेकर बांग्लादेश की कमर तोड़ दी। यह अथर्व के लिए सपना पूरा होने जैसा था। अथर्व के बचपन में ही सिर से पिता का साया उठ गया था। तमाम विपत्तियों को चुनौती देते हुए मां ने बस कंडक्टर का काम किया और पेट काटकर बेटे के उस सपने को पूरा किया जो अथर्व के पिता देखा करते थे।

 

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सिर्फ 106 पर ऑल आउट हो गई भारतीय टीम:

भारत की निराशाजनक बल्लेबाजी के कारण किसी को इस मुकाबले में जीत की उम्मीद नहीं थी मगर अथर्व ने शानदार गेंदबाजी करते हुए भारत को असंभव लग रही जीत दिला दी। भारतीय टीम ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया था। टीम के बल्लेबाजों ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया और पूरी टीम 32.4 ओवर में सिर्फ 106 रन बनाकर ऑल आउट हो गई।

अथर्व ने लिए पांच विकेट: यह स्कोर कोई बड़ा नहीं था और किसी ने भारत की जीत के बारे में सोचा तक नहीं था। लेकिन अथर्व ने अपनी फिरकी के जाल में बांग्लादेशी खिलाडिय़ों को ऐसा फंसाया कि पूरी टीम सिर्फ 101 रन ही बना सकी। अथर्व अंकोलेकर ने भारतीय अंडर 19 टीम के लिए एशिया कप के फाइनल में 8 ओवर गेंदबाजी की और अपने इस दमदार स्पेल में महज 28 रन खर्च किए और 5 विकेट चटकाकर बांग्लादेश को बैकफुट पर धकेलने में सफलता हासिल की।

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अथर्व को उनके इस शानदार प्रदर्शन के लिए मैन ऑफ द मैच चुना गया। बाएं हाथ के मध्यम तेज गति के गेंजबाज आकाश सिंह ने भी तीन विकेट झटककर बांग्लादेश को खिलाडिय़ों को जमने का मौका नहीं दिया।

क्रिकेटर बनाने में मां-बाप की बड़ी भूमिका:

मुंबई के अथर्व को कामयाबी के इस मुकाम तक पहुंचाने में उनकी मां की बहुत बड़ी भूमिका रही है। अथर्व एक मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं। उनकी मां वैदेही बृहन मुंबई इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट (बेस्ट) में कंडक्टर हैं। नौ साल पहले अथर्व के पिता विनोद का देहांत हो गया था। वह भी बेस्ट में कर्मचारी थे। परिवार में वे इकलौते कमाने वाले थे।

पति की मौत के बाद पूरे परिवार का गुजर बसर तक मुश्किल हो गया था। ऐसे में वैदेही ने दोस्त की मदद से ट्यूशन देना शुरू किया। बाद में उन्हें अपने पति की जगह कंडक्टर की नौकरी मिल गई। मां चाहती थी कि उसके बेटे का सपना जरूर पूरा हो। मां ने नौकरी के साथ-साथ अपने बेटे के सपनों को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। मां की मदद, प्रेरणा और आशीर्वाद के बल पर अथर्व अपना सपना पूरा करने में कामयाब रहे और एक बड़े मुकाबले में भारत को नामुमकिन लग रही जीत दिला दी।

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बस कंडक्टर का काम करती हैं मां वैदेही:

मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के कुछ सदस्य और दोस्तों की माने तो अथर्व की कामयाबी के पीछे उनकी मां वैदेही की ही लगन है। आज के दौर में भी बस कंडक्टर जैसे कार्य को भारत में महिलाओं के लिए कठिन ही माना जाता है।

अथर्व की सफलता उनकी मां वैदेही की इन्हीं चुनौतियों पर जीत की कहानी है। वैदेही की ड्यूटी मारोल बस डिपो पर हैं और वह बस नंबर 186 (अगरकर चौक से विहार लेक) और 340 (घाटकोपर स्टेशन से अगरकर चौक) में कार्यरत हैं।

सचिन भी हुए थे प्रभावित:

अथर्व के करियर में सबसे बड़ा मोड़ नौ साल पहले 2010 में आया था। 2010 में मुंबई में एक प्रैक्टिस सेशन में उन्होंने महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर को गेंदबाजी की थी। अथर्व के हाथों आउट होने के बाद सचिन ने उन्हें ऑटोग्राफ करके ग्लव्स गिफ्ट किए थे।

अथर्व जब छोटे थे तब उनके पिता ने उन्हें बैट गिफ्ट किया था। पिता उन्हें हमेशा बड़े क्रिकेटर्स की कहानियां सुनाया करते थे। इसी कारण अथर्व के मन में क्रिकेट के प्रति दीवानगी पैदा हुई। बाद में मां ने उनका सपना पूरा करने में पूरी मदद की। मुंबई में अच्छा प्रदर्शन करने के बाद वे इंडिया अंडर-19 टीम का हिस्सा बने।

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टीम इंडिया के लिए खेलना है सपना:

बाएं हाथ के स्पिनर अथर्व मुंबई के रिजवी कॉलेज में बीकॉम सेकेंड ईयर के छात्र हैं। अथर्व ने एशिया कप अंडर-19 में कुल 12 विकेट झटके। वह टूनामेंट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज रहे। उनकी मां हालांकि उनके प्रदर्शन से बहुत खुश हैं, लेकिन वह जानती हैं कि उनके बेटे को अभी बहुत लंबा सफर तय करना है। अथर्व आज भी अपने पिता को काफी याद करते हैं।

बकौल अथर्व जब वह छोटे थे तब पिता उनके बिस्तर के पास बैट रख देते थे। अच्छा खेलने पर क्रिकेट का बाकी सामान भी लाकर देते थे। अब यह सब काफी याद आता है। अथर्व का सपना कड़ी मेहनत करके टीम इंडिया के लिए खेलना है।