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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) की बैठक हुई। इस बैठक में कैबिनेट ने दादरा-नागर हवेली और दमन-दीव में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

नए साल की शुरुआत में अभी कुछ ही घंटे हुए है कि पहले दिन केंद्र की मोदी सरकार के लिए खुशखबरी है कि दिसंबर महीने में जीएसटी संग्रह 1.03 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचा है। बता दें कि केंद्र सरकार को इससे पहले नवंबर महीने में भी जीएसटी से 1.03 लाख करोड़ रुपए का राजस्‍व प्राप्त हुआ है। ऐसे में यह लगातार दूसरा महीना है जब जीएसटी संग्रह एक लाख करोड़ रुपए से ज्यादा है।

हाल ही में जीएसटी काउंसिल की 38वीं बैठक हुई, इसमें राज्यों और निजी क्षेत्र की लॅाटरी के लिए 28 फीसदी की दर से जीएसटी लगाने का फैसला लिया गया। वहीं अब लॅाटरी की नई दरें मार्च 2020 से लागू होंगी।

देश भर में एक तरह का वस्तु एवं सेवा कर (GST) लगने के बाद काफी ताकतवर जीएसटी कौंसिल को पहली बार आम सहमति की परंपरा तोड़कर किसी फैसले के लिए वोटिंग करानी पड़ी है।

यदि यह सच नहीं है तो क्या नरेंद्र मोदी से नोटबंदी- जैसी भूल कभी हो सकती थी ? जीएसटी जैसा लंगड़ा-लूला कानून कभी देश के सामने लाया जा सकता था ? अब नागरिकता संशोधन विधेयक के मामले में भी यही हुआ है।

एक साल पहले इसी माह की तुलना में यह संग्रह छह प्रतिशत बढ़ा है और 1.03 लाख करोड़ रुपये रहा है। इससे पहले अक्टूबर में जीएसटी वसूली 95,380 करोड़ रुपये थी जबकि पिछले वर्ष नवंबर में 97,637 करोड़ रुपये की वसूली हुई थी।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाणिज्य कर विभाग को विशेष अभियान चलाकर व्यापारियों के पंजीकरण में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि 31 दिसंबर, 2019 तक 25 लाख व्यापारियों के पंजीकरण का लक्ष्य सुनिश्चित किया जाए।

जीएसटी रिटर्न फ़ाइल करने को लेकर मोदी सरकार की सख्ती का असर दिखाई देना शुरू हो गया है। रजिस्ट्रेशन कैंसिल होने के डर से बड़ी संख्या में व्यापारियों ने गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) रिटर्न भरना शुरू कर दिया है।

जीएसटी से जुड़ी एक बड़ी खबर आई है। जिन लोगों ने अभी तक अपना जीएसटी रिटर्न फ़ाइल नहीं किया है। ऐसे लोगों के खिलाफ मोदी सरकार कड़ी कार्रवाई का मन बना चुकी है।

देश में 1 अक्टूबर यानी कल से कई नियम से बदलने जा रहे हैं। इन नियमों के बदलने से आपकी जेब पर सीधा असर पड़ने वाला है। इस बदलाव से आपको कुछ राहत मिलेगी, तो वहीं कुछ आपकी जेब पर भारी पड़ेगा। सड़क और रसोई से लेकर बैंकिग सेवाओं तक में एक अक्टूबर 2019 से कई तरह से बदलाव लागू हो गए हैं।